केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने IIT दिल्ली द्वारा विकसित एक किफायती तकनीक का समर्थन किया है, जो पुराने डीजल ट्रकों और बसों से होने वाले प्रदूषण को 90% तक कम कर सकती है। यह तकनीक पुराने वाहनों को बिना बदले उन्हें पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मदद करेगी।

  • IIT दिल्ली द्वारा विकसित रेट्रोफिट उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण (RECD) प्रदूषण को 90% तक कम कर सकता है।
  • यह उपकरण BS-III और BS-IV जैसे पुराने डीजल वाहनों पर लगाया जा सकता है।
  • इस तकनीक की लागत मात्र ₹4,000 से ₹5,000 के बीच होने की उम्मीद है।
  • सरकार जल्द ही इसके लिए AIS-228 मानक अधिसूचित करेगी।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक क्रांतिकारी घोषणा करते हुए कहा है कि सरकार अब पुराने डीजल ट्रकों और बसों में IIT दिल्ली द्वारा विकसित एक कम लागत वाला उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण लगाने की अनुमति देगी। यह नवाचार भारत में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

यह उपकरण, जिसे रेट्रोफिट उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण (RECD) कहा जाता है, मौजूदा डीजल इंजनों के निकास (exhaust) को साफ करने का काम करता है। यह तकनीक पार्टिकुलेट मैटर (PM) उत्सर्जन को 90% तक और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) उत्सर्जन को लगभग 60% तक कम करने में सक्षम है। इससे पुराने वाहन लगभग BS-VI मानकों के बराबर प्रदूषण स्तर प्राप्त कर सकेंगे।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में लाखों पुराने डीजल वाहन अभी भी सड़कों पर चल रहे हैं, जो शहरी वायु गुणवत्ता के लिए एक बड़ा खतरा हैं। नए BS-VI वाहन खरीदना बहुत महंगा है, ऐसे में यह किफायती समाधान छोटे ट्रांसपोर्टरों और वाहन मालिकों के लिए वरदान साबित होगा।

यह तकनीक न केवल पर्यावरण को बचाएगी, बल्कि पुराने वाहनों को समय से पहले स्क्रैप करने के आर्थिक बोझ को भी कम करेगी।

इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लागत है। जहाँ एक नया BS-VI वाहन खरीदना लाखों का निवेश है, वहीं यह उपकरण मात्र ₹4,000 से ₹5,000 में उपलब्ध होगा। यह सरकार के वाहन प्रतिस्थापन (vehicle replacement) कार्यक्रम के पूरक के रूप में कार्य करेगा, न कि उसके विकल्प के रूप में।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में उत्सर्जन मानकों को धीरे-धीरे कड़ा किया गया है, जो BS-I से शुरू होकर अब BS-VI तक पहुँच चुका है। पुराने वाहनों से होने वाला धुआं विशेष रूप से दिल्ली-NCR जैसे क्षेत्रों में स्मॉग का मुख्य कारण रहा है। पहले इस तरह की तकनीक का उपयोग केवल डीजल जनरेटर सेटों में किया जाता था, लेकिन अब इसे भारी वाहनों के लिए विस्तारित किया जा रहा है।

तुलनात्मक विश्लेषण

विशेषतापुराना डीजल वाहन (बिना RECD)पुराना डीजल वाहन (RECD के साथ)
PM उत्सर्जन में कमी0%~90% तक
NOx उत्सर्जन में कमी0%~60% तक
अनुमानित लागत₹0₹4,000 - ₹5,000
मानक स्तरBS-III/IVBS-VI के करीब
Did You Know?: RECD एक प्रकार के 'एयर प्यूरीफायर' की तरह काम करता है जो इंजन से निकलने वाले हानिकारक धुएं को हवा में मिलने से पहले ही साफ कर देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या यह उपकरण सभी डीजल वाहनों पर काम करेगा?
उत्तर: यह मुख्य रूप से BS-III, BS-IV और उससे पुराने डीजल वाहनों के लिए डिज़ाइन किया गया है।

प्रश्न 2: सरकार इसके लिए क्या कदम उठा रही है?
उत्तर: सड़क परिवहन मंत्रालय जल्द ही इसके तकनीकी मानकों के लिए AIS-228 अधिसूचना जारी करने की तैयारी कर रहा है।