राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारतीय सेना ने नई दिल्ली में 'आश्वस्त' (AASHVAST) लैब स्थापित की है, जो सैन्य ड्रोन में छिपे चीनी पुर्जों और हार्डवेयर की पहचान करेगी।

  • भारतीय सेना ने नई दिल्ली में AASHVAST लैब की स्थापना की है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य सैन्य ड्रोन में चीनी हार्डवेयर और घटकों का पता लगाना है।
  • यह कदम आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा और डेटा लीक को रोकने के लिए उठाया गया है।

भारतीय सेना ने अपनी तकनीकी क्षमताओं को उन्नत करते हुए नई दिल्ली में एक विशेष परीक्षण सुविधा, जिसे 'आश्वस्त' (AASHVAST) लैब नाम दिया गया है, की शुरुआत की है। इस लैब का प्राथमिक उद्देश्य सैन्य संचालन में उपयोग किए जाने वाले ड्रोन और अन्य मानव रहित प्रणालियों (UAVs) की गहन जांच करना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनमें कोई भी चीनी निर्मित घटक या संदिग्ध हार्डवेयर मौजूद न हो।

हाल के वर्षों में, वैश्विक स्तर पर यह देखा गया है कि विदेशी हार्डवेयर, विशेष रूप से चीनी चिप्स और सर्किट, में 'बैकडोर' प्रविष्टियां हो सकती हैं। ये प्रविष्टियां संवेदनशील सैन्य डेटा को चोरी करने या आपात स्थिति में उपकरणों को निष्क्रिय करने के लिए उपयोग की जा सकती हैं। भारतीय सेना अब इस जोखिम को शून्य करने के लिए स्वदेशी जांच तंत्र विकसित कर रही है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम केवल तकनीकी जांच नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता है। चीन के साथ सीमा विवादों के बीच, ड्रोन युद्ध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। यदि ड्रोन के आंतरिक पुर्जे विदेशी नियंत्रण में हों, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है। AASHVAST लैब के माध्यम से सेना अब 'ट्रस्टेड सोर्स' (विश्वसनीय स्रोत) की अवधारणा को लागू कर रही है।

"आधुनिक युद्धक्षेत्र में डेटा ही सबसे बड़ा हथियार है; हार्डवेयर स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करना अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य है।"

यह लैब न केवल मौजूदा ड्रोन की स्क्रीनिंग करेगी, बल्कि भविष्य में खरीदे जाने वाले उपकरणों के लिए कड़े मानक भी निर्धारित करेगी। इससे भारतीय रक्षा उद्योग में 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को और अधिक बल मिलेगा, क्योंकि सेना अब पूरी तरह से स्वदेशी और प्रमाणित घटकों की मांग करेगी।

ऐतिहासिक रूप से, भारत ने चीनी ऐप्स और दूरसंचार उपकरणों (जैसे Huawei और ZTE) पर प्रतिबंध लगाकर डिजिटल संप्रभुता की दिशा में कदम उठाए हैं। AASHVAST लैब इसी रणनीति का भौतिक हार्डवेयर विस्तार है, जो यह सुनिश्चित करता है कि आकाश में उड़ने वाले हमारे ड्रोन पूरी तरह से सुरक्षित और विश्वसनीय हैं।

क्या आप जानते हैं?: ड्रोन में 'हार्डवेयर ट्रोजन' छोटे सर्किट होते हैं जो सामान्य रूप से काम करते हैं लेकिन एक विशिष्ट सिग्नल मिलने पर जासूसी शुरू कर सकते हैं।

Frequently Asked Questions

1. AASHVAST लैब का मुख्य कार्य क्या है?
यह लैब सैन्य ड्रोन के हार्डवेयर की जांच करती है ताकि उनमें छिपे चीनी घटकों या जासूसी उपकरणों का पता लगाया जा सके।

2. यह लैब कहाँ स्थित है?
यह विशेष परीक्षण सुविधा नई दिल्ली में स्थापित की गई है।