केंद्र सरकार के वार्षिक स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने 'मिलियन-प्लस' शहरों की श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इंदौर दूसरे और जबलपुर तीसरे स्थान पर रहा, जबकि दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों की रैंकिंग काफी नीचे रही।
- लखनऊ 'मिलियन-प्लस' शहरों की श्रेणी में भारत का सबसे स्वच्छ हवा वाला शहर बना।
- इंदौर दूसरे स्थान पर और जबलपुर तीसरे स्थान पर रहा।
- दिल्ली (30वां) और मुंबई (37वां) प्रदूषण के मामले में काफी पीछे रहे।
- लखनऊ ने कचरा प्रबंधन और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
केंद्र सरकार द्वारा जारी 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026' के नवीनतम आंकड़ों ने देश के शहरी वायु गुणवत्ता परिदृश्य को स्पष्ट कर दिया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। लखनऊ की इस सफलता का मुख्य श्रेय कचरा संग्रहण के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग, सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए मशीनीकृत स्वीपर्स की तैनाती और पुराने कचरे (legacy waste) के कुशल प्रबंधन को दिया जा रहा है।
इस सर्वेक्षण में इंदौर, जिसे भारत का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, दूसरे स्थान पर रहा। वहीं, मध्य प्रदेश का जबलपुर तीसरे स्थान पर काबिज हुआ। जबलपुर की सफलता के पीछे वहां का वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, 100 प्रतिशत कचरा संग्रहण और वैज्ञानिक निपटान जैसे ठोस कदम रहे हैं। हालांकि, एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि लखनऊ ने शीर्ष स्थान तो जीत लिया है, लेकिन वह अभी भी राष्ट्रीय मानकों के तहत निर्धारित PM 10 वार्षिक वायु गुणवत्ता मानक (60 ug/m3) को पूरा करने में संघर्ष कर रहा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह रैंकिंग केवल शहरों की रैंकिंग नहीं है, बल्कि यह शहरी नियोजन और पर्यावरण नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन का प्रमाण है। लखनऊ का प्रदर्शन दर्शाता है कि यदि कचरा प्रबंधन और धूल नियंत्रण पर ध्यान दिया जाए, तो वायु गुणवत्ता में सुधार संभव है। हालांकि, बड़े महानगरों जैसे दिल्ली और मुंबई की खराब रैंकिंग भारत के शहरी स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
वायु गुणवत्ता में सुधार केवल तकनीक से नहीं, बल्कि कचरा प्रबंधन और धूल नियंत्रण के प्रति निरंतर प्रशासनिक प्रतिबद्धता से आता है।
सर्वेक्षण के अन्य परिणामों पर नज़र डालें तो 3-10 लाख की आबादी वाले शहरों में रौरकेला पहले स्थान पर रहा। वहीं, 3 लाख से कम आबादी वाले शहरों में कलिंग नगर ने बाजी मारी। रैंकिंग के लिए अपशिष्ट प्रबंधन, सड़क की धूल नियंत्रण, निर्माण और विध्वंस कचरे का प्रबंधन, और वाहनों व औद्योगिक प्रदूषण में कमी जैसे प्रमुख मापदंडों का उपयोग किया गया है।
| शहर श्रेणी | प्रथम स्थान | द्वितीय स्थान | तृतीय स्थान |
|---|---|---|---|
| मिलियन-प्लस शहर | लखनऊ | इंदौर | जबलपुर |
| 3-10 लाख आबादी | रौरकेला | फिरोजाबाद/गुंटूर | अमरावती |
| < 3 लाख आबादी | कलिंग नगर | अंगुल | तल्चर |
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत 130 शहरों को कवर किया गया है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य 2019-20 के स्तर की तुलना में 2025-26 तक पार्टिकुलेट मैटर (PM 10) सांद्रता को 40 प्रतिशत तक कम करना है। वर्तमान में केवल 14 शहर ही राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा कर पा रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि अभी लंबी लड़ाई बाकी है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में रैंकिंग किस आधार पर की जाती है?
उत्तर: रैंकिंग कचरा प्रबंधन, सड़क की धूल नियंत्रण, निर्माण कचरे का प्रबंधन और वाहनों/औद्योगिक प्रदूषण में कमी जैसे कारकों पर आधारित होती है।
प्रश्न 2: दिल्ली और मुंबई की रैंकिंग क्या है?
उत्तर: मिलियन-प्लस शहरों की श्रेणी में दिल्ली 30वें और मुंबई 37वें स्थान पर रहे।