दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र नेता कृष्णा भारद्वाज ने सत्य निकेतन में हुए भवन हादसे के दौरान छात्रों को मलबे से निकालने के अपने रोंगटे खड़े कर देने वाले अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे एक छात्र की आखिरी पुकार उनके कानों में गूंज रही है।

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  • सत्य निकेतन में इमारत गिरने से कई छात्र मलबे में दब गए।
  • DUSU कार्यकर्ता कृष्णा भारद्वाज और उनकी टीम ने पुलिस के पहुंचने से पहले ही बचाव कार्य शुरू कर दिया था।
  • हादसे में एक छात्र की मौत हो गई, जिसने मलबे के नीचे से मदद की गुहार लगाई थी।
  • स्थानीय स्तर पर अवैध निर्माण और फर्जी NOC के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार, 6 सितंबर 2026 को हुई हृदयविदारक इमारत गिरने की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस त्रासदी के बीच, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के प्रचारक कृष्णा भारद्वाज की बहादुरी और उनके द्वारा साझा किए गए दर्दनाक अनुभव सामने आए हैं।

कृष्णा भारद्वाज, जो मूल रूप से मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले हैं, उस समय दिल्ली में चुनाव प्रचार कर रहे थे। जैसे ही इमारत ढही, वे बिना किसी देरी के मौके पर पहुंचे। भारद्वाज ने बताया कि जब वे वहां पहुंचे, तब तक पुलिस या अग्निशमन विभाग की कोई टीम वहां मौजूद नहीं थी। उन्होंने अपनी टीम के 25-30 सदस्यों के साथ मिलकर मलबे से छात्रों को निकालने का साहसिक कार्य शुरू किया।

एक दर्दनाक याद: 'भैया, प्लीज मुझे बचा लो'

हादसे की भयावहता को बताते हुए भारद्वाज की आंखें नम हो गईं। उन्होंने एक ऐसी घटना का जिक्र किया जो उन्हें जीवन भर कचोटती रहेगी। उन्होंने बताया, "मैं मलबे से एक छात्र को बाहर खींच रहा था, तभी उस लड़के ने मेरा हाथ पकड़ लिया और रोते हुए कहा, 'भैया, प्लीज मुझे बचा लो।' मैंने उसे ढांढस बंधाया कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन बाद में पता चला कि वह लड़का दम तोड़ चुका था।"

मलबे के नीचे से आती वो आखिरी पुकार किसी भी इंसान की रूह कंपा देने के लिए काफी है।

बचाव कार्य के दौरान कृष्णा भारद्वाज खुद भी घायल हो गए। मलबे से एक शव को निकालने की कोशिश करते समय उनके पैर पर एक भारी पत्थर गिर गया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने एक अन्य चमत्कारिक बचाव का भी जिक्र किया, जहां एक छात्र की जान सिर्फ इसलिए बच गई क्योंकि एक मेज उसके ऊपर गिर गई थी, जिसने मलबे के भारी वजन से उसे बचा लिया।

क्यों यह घटना चिंताजनक है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का परिणाम हो सकता है। भारद्वाज ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस क्षेत्र में कई इमारतें अवैध हैं और वे 'फर्जी NOC' के सहारे संचालित हो रही हैं। इससे छात्रों के जीवन पर हर दिन खतरा मंडराता रहता है।

तुलना: बचाव कार्य का स्वरूप

विशेषतास्वयंसेवकों की भूमिकासरकारी प्रतिक्रिया
पहुंचने का समयतत्काल (घटना के तुरंत बाद)देरी से (बचाव कार्य शुरू होने के बाद)
मुख्य कार्यमलबे से प्रत्यक्ष निकासी और CPRमशीनरी और आधिकारिक राहत कार्य

फिलहाल, सात छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और प्रशासन मृतकों व घायलों की सटीक संख्या का आकलन कर रहा है।

Did You Know?: दिल्ली के छात्र क्षेत्रों में अत्यधिक जनसंख्या घनत्व के कारण पुरानी और अवैध इमारतों का जोखिम हमेशा बना रहता है।

Frequently Asked Questions

1. सत्य निकेतन हादसा कब हुआ?
यह हादसा रविवार, 6 सितंबर 2026 को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में हुआ।

2. क्या बचाव कार्य में कोई बाधा आई?
हाँ, बचाव दल ने बताया कि पुलिस और अग्निशमन दल के पहुंचने से पहले स्वयंसेवकों को अकेले ही मोर्चा संभालना पड़ा।