UPSC 2025 के 958 सफल उम्मीदवार सेवा आवंटन और फाउंडेशन कोर्स की शुरुआत का इंतजार कर रहे हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जहां केंद्र सरकार ने 'रोहित नंदन' फैसले के कार्यान्वयन पर छूट मांगी है।

  • UPSC CSE 2025 के 958 उम्मीदवारों का फाउंडेशन कोर्स और सर्विस एलोकेशन रुका हुआ है।
  • केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से रोहित नंदन फैसले को लागू किए बिना सर्विस एलोकेशन की अनुमति मांगी है।
  • विवाद का मुख्य कारण OBC क्रीमी लेयर के लिए 'आय परीक्षण' (Income Test) के नियमों की व्याख्या है।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा 2025 की सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में अनुशंसित 958 उम्मीदवार वर्तमान में एक अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। अगस्त के अंत में शुरू होने वाला फाउंडेशन कोर्स अब तक शुरू नहीं हो सका है, और उम्मीदवारों को कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) या लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) से कोई आधिकारिक संचार प्राप्त नहीं हुआ है।

इस देरी की जड़ें एक कानूनी विवाद में हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर किया है, जिसमें अनुरोध किया गया है कि DoPT को 11 मार्च के रोहित नंदन फैसले को लागू किए बिना सेवाओं का आवंटन करने की अनुमति दी जाए। इस महत्वपूर्ण फैसले में अदालत ने पाया था कि DoPT केवल माता-पिता की वेतन आय के आधार पर कुछ OBC उम्मीदवारों को 'क्रीमी लेयर' में डालकर आरक्षण से बाहर रख रहा था, जो कि त्रुटिपूर्ण था।

अदालत ने इस विसंगति को दूर करने के लिए छह महीने के भीतर सुधारात्मक उपाय करने का निर्देश दिया था। हालांकि, CSE 2025 के परिणाम 6 मार्च को घोषित किए गए थे, यानी रोहित नंदन फैसले के आने से ठीक कुछ दिन पहले, जिससे अब सेवा आवंटन की प्रक्रिया जटिल हो गई है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल प्रशासनिक देरी नहीं है, बल्कि आरक्षण के सिद्धांतों और न्यायिक व्याख्याओं के बीच का टकराव है। यदि कोर्ट केंद्र की याचिका खारिज करता है, तो कई उम्मीदवारों की श्रेणी और पात्रता बदल सकती है, जिससे पूरी मेरिट लिस्ट प्रभावित होने की संभावना है। यह प्रशासनिक अनिश्चितता भविष्य के नौकरशाहों के मनोबल पर गहरा प्रभाव डाल रही है।

"आरक्षण नियमों में बदलाव का प्रभाव पिछली चयन प्रक्रियाओं पर डालना प्रशासनिक अराजकता पैदा कर सकता है, लेकिन संवैधानिक न्याय सुनिश्चित करना सर्वोपरि है।"

केंद्र सरकार का तर्क है कि यदि आय परीक्षण की नई व्याख्या को 2025 बैच पर लागू किया जाता है, तो यह उन लोगों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने पुरानी समझ के आधार पर आवेदन किया था या जो उस समय पात्र नहीं थे। सरकार इसे 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' के विरुद्ध मान रही है।

उम्मीदवारों के बीच भारी तनाव है। कई उम्मीदवारों ने बताया कि उन्हें अगस्त 24 की संभावित तारीख दी गई थी, लेकिन अब वे 17 सितंबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।

क्या आप जानते हैं?: LBSNAA (लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी) मसूरी में स्थित है और यह भारत के सभी IAS अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण का केंद्र है।
पक्ष तर्क / स्थिति
सुप्रीम कोर्ट (रोहित नंदन फैसला) केवल वेतन आय के आधार पर OBC को क्रीमी लेयर मानना गलत है।
केंद्र सरकार (DoPT) पुराने नियमों के आधार पर आवंटन करना चाहिए ताकि मौजूदा लिस्ट प्रभावित न हो।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: फाउंडेशन कोर्स में देरी का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक कानूनी मामला है जो OBC आरक्षण के क्रीमी लेयर आय परीक्षण से संबंधित है।

प्रश्न 2: अगली महत्वपूर्ण तारीख क्या है?
सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर 17 सितंबर को सुनवाई करने वाला है।