ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की सुरक्षा व्यवस्था के चलते दिल्ली पुलिस ने जनपथ और कनॉट प्लेस जैसे प्रमुख मार्गों पर फेरीवालों को दुकानें बंद रखने का निर्देश दिया है, जिससे दैनिक वेतन भोगी गंभीर आर्थिक संकट में हैं।
- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के कारण 11 से 13 सितंबर तक प्रमुख मार्गों पर फेरीवालों के लिए बंदी।
- जनपथ और कनॉट प्लेस के आसपास के क्षेत्रों में पुलिस ने मौखिक निर्देश जारी किए।
- स्थायी दुकानों के लिए बाजार खुले रहेंगे, लेकिन फुटपाथ विक्रेताओं की आय पर सीधा असर।
भारत की राजधानी नई दिल्ली वर्तमान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी की तैयारियों में जुटी है। सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए दिल्ली पुलिस ने वीआईपी मूवमेंट और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के ठहरने वाले होटलों से जुड़े मार्गों पर कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं। इन प्रतिबंधों का सबसे गहरा असर उन हजारों सड़क किनारे विक्रेताओं और फेरीवालों पर पड़ा है, जिनकी आजीविका पूरी तरह से दैनिक बिक्री पर निर्भर है।
जनपथ मार्केट की गलियां, जो आमतौर पर कपड़ों, गहनों और सामानों की दुकानों से गुलजार रहती हैं, अब वीरान नजर आ रही हैं। पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इन विक्रेताओं को 11 सितंबर से 13 सितंबर तक अपनी दुकानें बंद रखने को कहा है। कई विक्रेताओं के लिए यह केवल तीन दिन की बंदी नहीं, बल्कि पूरे महीने के बजट का संकट है। उदाहरण के तौर पर, नरेला से आने वाले सूरज कुमार जैसे श्रमिकों की दिहाड़ी आधी रह गई है और अब आने वाले दिनों में शून्य होने की कगार पर है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि वैश्विक शिखर सम्मेलनों के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल अक्सर शहर के सबसे कमजोर आर्थिक वर्ग—अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों—को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं। जबकि औपचारिक व्यापारिक प्रतिष्ठान (जैसे शोरूम और आउटलेट्स) चालू रहते हैं, फुटपाथ विक्रेता, जिन्हें भीड़ का केंद्र माना जाता है, उन्हें हटा दिया जाता है। यह शहरी नियोजन और सुरक्षा प्रबंधन के बीच के वर्ग-भेद को उजागर करता है।
"एक दैनिक वेतन भोगी के लिए एक दिन की कमाई का जाना भी उसके परिवार की खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।"
गुजराती लेन में लहंगा बेचने वाले सिमरन और अश्विन जैसे व्यापारियों का कहना है कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा सप्ताहांत (वीकेंड) की बिक्री से आता है। इस बंदी के कारण वे अपनी संभावित आय का एक बड़ा हिस्सा खो रहे हैं। वहीं, रामकुमार सिंह जैसे छोटे स्नैक विक्रेता, जो अपने पांच सदस्यों के परिवार का भरण-पोषण करते हैं, के लिए यह नुकसान असहनीय है।
दिलचस्प बात यह है कि इस प्रतिबंध का प्रभाव असमान है। नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन और जनपथ ट्रेडर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि स्थायी दुकानें खुली रहेंगी। हालांकि, कुछ दुकानदारों ने खुद ही बंदी का विकल्प चुना है क्योंकि ट्रैफिक प्रतिबंधों के कारण ग्राहकों का पहुंचना लगभग असंभव हो गया है।
| विक्रेता प्रकार | स्थिति | प्रभाव |
|---|---|---|
| सड़क किनारे फेरीवाले | पूर्णतः बंद | गंभीर आर्थिक हानि (दैनिक आय शून्य) |
| स्थायी दुकानें/आउटलेट्स | खुले रहेंगे | कम फुटफॉल, लेकिन परिचालन जारी |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: यह प्रतिबंध कितने समय के लिए लागू हैं?
उत्तर: यह प्रतिबंध मुख्य रूप से 11 सितंबर से 13 सितंबर 2026 तक प्रभावी हैं।
प्रश्न 2: क्या कनॉट प्लेस के सभी बाजार बंद हैं?
उत्तर: नहीं, केवल सड़क किनारे के फेरीवालों को बंद रहने को कहा गया है; स्थायी दुकानें और आउटलेट्स खुले हैं।