पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान से पशु विनिमय कार्यक्रम के तहत लाए गए पांच भारतीय ग्रे भेड़ियों को क्वारंटीन अवधि के बाद शिवमोगा के तявरेकोप्पा सफारी के प्रदर्शनी क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया है।

  • पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान से 5 भारतीय ग्रे भेड़िये शिवमोगा लाए गए।
  • पशु विनिमय कार्यक्रम के तहत 2 भारतीय गौर के बदले भेड़िये और घड़ियाल प्राप्त हुए।
  • इस नए जुड़ाव से शिवमोगा जू की प्रजातियों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है।

कर्नाटक के शिवमोगा स्थित त्यावरेकोप्पा टाइगर और लायन सफारी ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। पटना से लाए गए पांच भारतीय ग्रे भेड़ियों को सोमवार को उनके क्वारंटीन क्षेत्र से निकालकर मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया। यह कदम इन वन्यजीवों के स्वास्थ्य और स्थानीय वातावरण के साथ उनके तालमेल को सुनिश्चित करने के बाद उठाया गया है।

यह स्थानांतरण एक व्यापक पशु विनिमय कार्यक्रम का हिस्सा था। पिछले महीने, शिवमोगा चिड़ियाघर ने पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान से आठ भेड़ियों और चार घड़ियालों का अधिग्रहण किया था। इसके बदले में, शिवमोगा जू ने दो नर भारतीय गौर (Indian Gaurs) पटना भेजे थे। इस विनिमय का मुख्य उद्देश्य विभिन्न चिड़ियाघरों के बीच आनुवंशिक विविधता को बढ़ावा देना और प्रजातियों का संरक्षण करना है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल जानवरों का आदान-प्रदान नहीं है, बल्कि चिड़ियाघर की प्रशासनिक स्थिति को बदलने की एक रणनीतिक चाल है। शिवमोगा जू के कार्यकारी निदेशक वी.एम. अमरक्षरा के अनुसार, वर्तमान में यह संस्थान 'छोटे चिड़ियाघर' की श्रेणी में आता है। हालांकि, प्रजातियों की संख्या 37 तक पहुंचने से अब यह 'मध्यम चिड़ियाघर' (Medium-zoo) के दर्जे के लिए आवश्यक मानदंडों को पूरा करने की स्थिति में है।

वन्यजीव विनिमय कार्यक्रम न केवल प्रजातियों के संरक्षण में मदद करते हैं, बल्कि स्थानीय आगंतुकों के लिए जैव विविधता के प्रति जागरूकता भी बढ़ाते हैं।

भेड़ियों को सीधे प्रदर्शनी क्षेत्र में नहीं डाला गया था। उन्हें पहले एक सख्त क्वारंटीन अवधि से गुजरना पड़ा ताकि वे स्थानीय मौसम की स्थिति के अनुकूल हो सकें। इस दौरान चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने उनके व्यवहार की बारीकी से निगरानी की और अनिवार्य पशु-देखभाल प्रोटोकॉल का पालन किया। वर्तमान में, पांच में से चार भेड़ियों को सफलतापूर्वक प्रदर्शनी क्षेत्र में छोड़ दिया गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारतीय ग्रे भेड़िये (Canis lupus pallipes) भारत के कई हिस्सों में पाए जाते हैं, लेकिन शहरीकरण और पर्यावास के नुकसान के कारण उनकी संख्या में गिरावट आई है। चिड़ियाघरों में उनके संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें विलुप्त होने से बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। तявरेकोप्पा सफारी ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी प्रजातियों की विविधता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है।

प्राप्त पशु (From Patna) विनिमय पशु (From Shivamogga)
8 भारतीय ग्रे भेड़िये 2 नर भारतीय गौर
4 घड़ियाल -
क्या आप जानते हैं?: भारतीय ग्रे भेड़िये सामाजिक प्राणी होते हैं और वे एक संगठित 'पैक' में रहते हैं, जिसका नेतृत्व एक अल्फा जोड़ा करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: भेड़ियों को सीधे प्रदर्शनी क्षेत्र में क्यों नहीं ले जाया गया?
उत्तर: उन्हें स्थानीय मौसम के अनुकूल बनाने और स्वास्थ्य जांच के लिए क्वारंटीन में रखा गया था।

प्रश्न 2: शिवमोगा जू अब किस श्रेणी में आने की उम्मीद कर रहा है?
उत्तर: प्रजातियों की संख्या 37 होने के कारण यह अब 'मध्यम चिड़ियाघर' की श्रेणी में आ सकता है।