सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने के लिए केरल सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है। यह समिति शेल्टर होम बनाने, जन्म नियंत्रण (ABC) उपायों और खतरनाक कुत्तों की दया मृत्यु जैसे कड़े कदमों की निगरानी करेगी।

  • स्थानीय स्वशासन विभाग (LSGD) के सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति का गठन।
  • आवारा कुत्तों के लिए पर्याप्त शेल्टर होम और विशिष्ट फीडिंग पॉइंट बनाए जाएंगे।
  • जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यों में बाधा डालने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान।
  • असाध्य रूप से बीमार या खतरनाक कुत्तों के लिए 'दया मृत्यु' (Mercy Killing) के SOP लागू होंगे।

तिरुवनंतपुरम: केरल सरकार ने राज्य में आवारा कुत्तों से जुड़ी बढ़ती समस्याओं और सार्वजनिक सुरक्षा की चिंताओं को दूर करने के लिए एक निर्णायक कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया गया है। इस समिति का नेतृत्व स्थानीय स्वशासन विभाग (LSGD) के सचिव करेंगे, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के निदेशक, राज्य सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण अधिकारी और कानूनी विशेषज्ञ शामिल होंगे।

समिति का प्राथमिक उद्देश्य राज्य भर में आवारा कुत्तों के लिए पर्याप्त संख्या में शेल्टर होम की स्थापना सुनिश्चित करना है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक स्थानीय निकाय को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है, जो विशेष रूप से इस समस्या का प्रबंधन करेगा। जनता की सुविधा के लिए, शिकायतों और जानकारी के लिए समर्पित हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए जाएंगे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि केरल सरकार अब केवल पशु कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। विशिष्ट फीडिंग पॉइंट निर्धारित करने का निर्णय शहरी क्षेत्रों में कुत्तों और मनुष्यों के बीच संघर्ष को कम करने की एक रणनीतिक कोशिश है।

समिति का एक महत्वपूर्ण कार्य 'एनिमल बर्थ कंट्रोल' (ABC) उपायों के लिए विशेष स्क्वाड का गठन करना है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नसबंदी और टीकाकरण अभियान बिना किसी बाधा के चलें। यदि कोई व्यक्ति या समूह इन मानवीय और कानूनी प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करता है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

"आवारा कुत्तों का प्रबंधन केवल उन्हें हटाने के बारे में नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक नसबंदी और व्यवस्थित शेल्टर प्रबंधन के माध्यम से जनसंख्या नियंत्रण के बारे में है।"

सबसे विवादास्पद और संवेदनशील मुद्दा 'दया मृत्यु' (Mercy Killing) का है। समिति उन कुत्तों के लिए दया मृत्यु के निर्णय की निगरानी करेगी जो रेबीज से ग्रस्त हैं, असाध्य रूप से बीमार हैं या समाज के लिए अत्यधिक खतरनाक साबित हुए हैं। इसके लिए स्थानीय स्तर पर प्रबंधन समितियां बनाई जाएंगी, जिसमें वार्ड पार्षद, पशु चिकित्सक और चिकित्सा अधिकारी शामिल होंगे।

कार्यक्षेत्र पुरानी व्यवस्था नई निगरानी समिति व्यवस्था
शिकायत निवारण असंगठित/धीमी प्रक्रिया समर्पित नोडल अधिकारी और हेल्पलाइन
जनसंख्या नियंत्रण सीमित ABC अभियान विशेष स्क्वाड और कानूनी सुरक्षा
भोजन प्रबंधन कहीं भी फीडिंग निर्धारित विशिष्ट फीडिंग पॉइंट
क्या आप जानते हैं?: पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियमों के तहत, नसबंदी के बाद कुत्तों को उसी स्थान पर वापस छोड़ना अनिवार्य होता है जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था।

Frequently Asked Questions

1. क्या सभी आवारा कुत्तों को मारा जाएगा?
नहीं, केवल उन्हीं कुत्तों के लिए दया मृत्यु का प्रावधान है जो रेबीज से ग्रस्त हैं, लाइलाज बीमार हैं या अत्यंत खतरनाक हैं, और यह निर्णय एक विशेष समिति द्वारा लिया जाएगा।

2. आम नागरिक अपनी शिकायतें कहाँ दर्ज करा सकते हैं?
प्रत्येक स्थानीय निकाय द्वारा जारी किए जाने वाले समर्पित हेल्पलाइन नंबर पर शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं।