कर्नाटक विद्युत नियामक आयोग (KERC) ने नए बिजली कनेक्शनों के लिए उपभोक्ताओं को स्वयं सुरक्षा प्रमाणन की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है, जिससे ठेकेदारों और विशेषज्ञों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
- KERC ने बिजली आपूर्ति विनियम ड्राफ्ट 2026 में स्व-प्रमाणन का क्लॉज जोड़ा है।
- उपभोक्ता अब सुरक्षा मानकों के अनुपालन की पुष्टि स्वयं कर सकेंगे।
- ठेकेदारों और ऊर्जा विशेषज्ञों ने इसे सुरक्षा जोखिम और नियमों का उल्लंघन बताया है।
- KERC का कहना है कि इसका उद्देश्य भ्रष्टाचार कम करना और प्रक्रिया को सरल बनाना है।
बेंगलुरु: कर्नाटक विद्युत नियामक आयोग (KERC) द्वारा 'बिजली आपूर्ति विनियम ड्राफ्ट, 2026' में प्रस्तावित एक नए क्लॉज ने राज्य में एक बड़ी बहस छेड़ दी है। इस प्रस्ताव के तहत, नए बिजली कनेक्शन प्राप्त करने के लिए भवन मालिकों को सुरक्षा उपायों के पालन के संबंध में 'स्व-प्रमाणन' (Self-certification) करने की अनुमति देने की योजना है।
जहाँ एक ओर स्थानीय निवासी इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कर्नाटक राज्य लाइसेंस प्राप्त विद्युत ठेकेदार संघ (KSLECA) ने इसका कड़ा विरोध किया है। वर्तमान नियमों के अनुसार, केवल लाइसेंस प्राप्त ठेकेदार ही नए कनेक्शन के लिए सुरक्षा मानकों की पुष्टि करने हेतु अधिकृत हैं। ठेकेदारों का तर्क है कि एक आम नागरिक के लिए तकनीकी सुरक्षा मानकों को समझना और प्रमाणित करना लगभग असंभव है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल प्रशासनिक सुधार का नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और भ्रष्टाचार के बीच के संघर्ष का है। यदि स्व-प्रमाणन लागू होता है, तो यह बिजली वितरण प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका को समाप्त कर सकता है, लेकिन साथ ही यह तकनीकी त्रुटियों के कारण जान-माल के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।
एक आम नागरिक बिजली के जटिल तकनीकी मानकों और सुरक्षा मापदंडों को समझने में सक्षम नहीं हो सकता, जो जीवन के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
FKCCI के ऊर्जा समिति के सलाहकार एम.जी. प्रभाकर ने चेतावनी दी है कि यह कदम केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के सुरक्षा नियमों के खिलाफ है। उन्होंने तर्क दिया कि अन्य राज्यों द्वारा इसे अपनाना कर्नाटक के लिए एक मिसाल नहीं होनी चाहिए, क्योंकि बिजली के उपकरण संभालना अत्यधिक जोखिम भरा काम है।
दूसरी ओर, KERC के अध्यक्ष पी. रविकुमार ने स्पष्ट किया है कि स्व-प्रमाणन का अर्थ यह नहीं है कि उपभोक्ता बिना किसी विशेषज्ञ के काम करेंगे। उन्होंने कहा, "स्व-प्रमाणन का अर्थ है कि वे अपने स्वयं के ठेकेदारों, लाइसेंस प्राप्त इलेक्ट्रीशियन या इंजीनियरों से निरीक्षण करा सकते हैं। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को दफ्तरों के चक्कर लगाने से बचाना और प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है।"
बेंगलुरु के निवासी कल्याण संघों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका मानना है कि वर्तमान प्रणाली में ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच सांठगांठ के कारण भ्रष्टाचार बढ़ता है। स्व-प्रमाणन से पारदर्शिता आएगी और बिना बिल के लिए जाने जाने वाले अनौपचारिक भुगतान पर लगाम लगेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. KERC का नया प्रस्ताव क्या है?
KERC उपभोक्ताओं को नए बिजली कनेक्शन के लिए सुरक्षा मानकों के अनुपालन का स्व-प्रमाणन करने की अनुमति देने का प्रस्ताव दे रहा है।
2. ठेकेदारों को इससे क्या आपत्ति है?
ठेकेदारों का कहना है कि गैर-विशेषज्ञों द्वारा प्रमाणन करने से सुरक्षा से समझौता हो सकता है और यह उनके पेशेवर अधिकारों का उल्लंघन है।