मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में पहले अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य कश्मीर को फिर से फिल्म शूटिंग के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना और स्थानीय रोजगार बढ़ाना है।
- ओमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के पहले अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का उद्घाटन किया।
- मुख्यमंत्री ने फिल्म उद्योग को याद दिलाया कि स्विट्जरलैंड जैसे देशों से पहले कश्मीर शूटिंग के लिए पसंदीदा जगह था।
- इस महोत्सव में 41 देशों की 135 फिल्में प्रदर्शित की जा रही हैं।
- मुख्यमंत्री ने कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा, मेडिकल इंटर्न की हड़ताल और सांप्रदायिक सद्भाव जैसे मुद्दों पर बात की।
क्षेत्र के पर्यटन और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के एक रणनीतिक कदम के रूप में, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में पहले जम्मू-कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आधिकारिक उद्घाटन किया। महोत्सव के दौरान मीडिया से बात करते हुए, मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह आयोजन भारतीय फिल्म उद्योग को याद दिलाएगा कि कश्मीर कभी फिल्म शूटिंग के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य हुआ करता था, वह भी तब जब स्विट्जरलैंड जैसे देशों का चलन शुरू नहीं हुआ था।
'रंग-ए-सिनेमा' नामक यह महोत्सव केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक आयोजन है। 7 सितंबर से 10 सितंबर तक चलने वाले इस महोत्सव में 41 देशों की 135 फिल्मों को शामिल किया गया है। इन फिल्मों का प्रदर्शन शेरी कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC), श्रीनगर के INOX PVR, जम्मू के वेव्स सिनेमा और गुलमर्ग के एक हेल्थ रिसॉर्ट में किया जा रहा है, जो पूरे क्षेत्र को सिनेमा से जोड़ने के प्रयास को दर्शाता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह पहल केवल कला के बारे में नहीं, बल्कि आर्थिक कूटनीति के बारे में है। कश्मीर को फिल्म निर्माताओं के लिए एक "पसंदीदा स्रोत" के रूप में पेश करके, सरकार तकनीशियनों, कलाकारों और आतिथ्य क्षेत्र के लिए स्थानीय रोजगार का एक स्थायी पारिस्थितिकी तंत्र बनाना चाहती है। "पूर्व का स्विट्जरलैंड" वाली छवि को वापस पाना वैश्विक स्तर पर क्षेत्र की छवि को सामान्य बनाने की दिशा में एक सोचा-समझा कदम है।
कश्मीर में फिल्म शूटिंग की वापसी सॉफ्ट पावर के एक शक्तिशाली उत्प्रेरक के रूप में कार्य करती है, जो घाटी की वैश्विक धारणा को संघर्ष क्षेत्र से बदलकर एक सांस्कृतिक केंद्र में बदल देती है।
सिनेमा की चमक-धमक से परे, मुख्यमंत्री ने गंभीर सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों पर भी चर्चा की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के बाद, अब्दुल्ला ने कहा कि वे राज्य का दर्जा, व्यापार नियम और आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर शाह के साथ "निरंतर संपर्क" में हैं। उन्होंने स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार और प्रशासन के बीच सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
सुरक्षा के मुद्दे पर, ओमर अब्दुल्ला ने कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को भेजे गए हालिया धमकी भरे पत्रों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने सुरक्षा प्रतिष्ठानों से इन खतरों को गंभीरता से लेने का आग्रह किया और 90 के दशक की शुरुआत में प्रवासियों की लक्षित हत्याओं के दर्दनाक इतिहास का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य इस तरह की जातीय या धार्मिक हिंसा को दोबारा बर्दाश्त नहीं कर सकता।
मुख्यमंत्री ने सांप्रदायिक सद्भाव पर भी कड़ा रुख अपनाया और सहारनपुर में मस्जिद के ढहाए जाने की निंदा की। उन्होंने न्यूयॉर्क में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया भाषण का हवाला देते हुए कहा कि सरकार के कार्यों को उस बयान के अनुरूप होना चाहिए जिसमें कहा गया था कि भारत में मुसलमानों का उचित स्थान है। इसके अलावा, उन्होंने दिल्ली में दो महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार पर दुख जताया और मुसलमानों को "बाहरी" मानने की प्रवृत्ति की आलोचना की।
घरेलू मोर्चे पर, अब्दुल्ला ने मेडिकल इंटर्न की हड़ताल का मुद्दा उठाया, जो अपने वजीफे (स्टाइपेंड) को 12,500 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले का जल्द से जल्द समाधान होना चाहिए ताकि चिकित्सा सेवाओं और छात्रों के करियर में कोई बाधा न आए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: जम्मू-कश्मीर के पहले अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का पैमाना क्या है?
इस महोत्सव में 41 देशों की 135 फिल्में शामिल हैं, जिन्हें श्रीनगर, जम्मू और गुलमर्ग में प्रदर्शित किया जा रहा है।
प्रश्न 2: जम्मू-कश्मीर के मेडिकल इंटर्न की मुख्य मांग क्या है?
इंटर्न अपने मासिक स्टाइपेंड को 12,500 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं।