मलंकरा ऑर्थोडॉक्स चर्च ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESA) की सूची से कृषि भूमि और रिहायशी इलाकों को हटाया जाए ताकि स्थानीय लोगों की आजीविका सुरक्षित रहे।
- मलंकरा ऑर्थोडॉक्स चर्च ने पश्चिमी घाट ESA अधिसूचना के सातवें ड्राफ्ट पर चिंता जताई है।
- मांग है कि केवल वन क्षेत्रों को ESA में रखा जाए, रिहायशी और कृषि भूमि को बाहर किया जाए।
- चर्च ने सार्वजनिक सुनवाई और पंचायत स्तर पर विस्तृत मानचित्र जारी करने की मांग की है।
मलंकरा ऑर्थोडॉक्स चर्च ने सोमवार को राज्य सरकार से पथनमथिट्टा जिले के उच्च-रेंज क्षेत्रों के निवासियों की चिंताओं को दूर करने का आग्रह किया। यह मामला पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESA) के सातवें ड्राफ्ट नोटिफिकेशन से संबंधित है, जिसने स्थानीय समुदायों के बीच अनिश्चितता पैदा कर दी है।
मलंकरा एसोसिएशन के सचिव बीजू ओम्मन ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ESA की सीमाएं केवल वन क्षेत्रों तक सीमित होनी चाहिए और इसमें बसे हुए इलाकों तथा कृषि योग्य भूमि को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि पर्यावरण संरक्षण और मानव आजीविका के बीच एक संतुलन होना अनिवार्य है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the tension between environmental conservation and land-use rights is reaching a boiling point in Kerala. If the ESA boundaries are not precisely defined, thousands of farmers and small-scale landowners could face severe restrictions on construction, farming, and commercial activities, potentially leading to an economic downturn in the high-range regions.
चर्च ने विशेष रूप से मांग की है कि अंतिम अधिसूचना से खेतों, बागानों, पूजा स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को पूरी तरह बाहर रखा जाए। उन्होंने जोर दिया कि प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जानी चाहिए और पंचायत स्तर पर सर्वेक्षण विवरणों के साथ मानचित्र प्रकाशित किए जाने चाहिए।
"पर्यावरण का संरक्षण आवश्यक है, लेकिन यह स्थानीय समुदायों के अस्तित्व की कीमत पर नहीं होना चाहिए।"
इसके अलावा, बीजू ओम्मन ने निर्वाचित प्रतिनिधियों, किसान संगठनों, स्थानीय निकायों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ गहन परामर्श की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर पर्याप्त जांच और सार्वजनिक परामर्श पूरा नहीं हो पाता है, तो केंद्र सरकार से आपत्तियों और सुझावों को जमा करने की समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया जाना चाहिए।
Historical Background
पश्चिमी घाट, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है, अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। पिछले एक दशक से, केंद्र और राज्य सरकारें इसे संरक्षित करने के लिए ESA अधिसूचनाओं पर काम कर रही हैं। हालांकि, हर बार जब नया ड्राफ्ट आता है, तो स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों के बीच विवाद बढ़ जाता है क्योंकि सीमाओं का निर्धारण अक्सर अस्पष्ट होता है।
Frequently Asked Questions
1. ESA का क्या मतलब है?
ESA का अर्थ 'पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र' (Ecologically Sensitive Area) है, जहाँ पर्यावरण की रक्षा के लिए कुछ मानवीय गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जाता है।
2. चर्च इस अधिसूचना का विरोध क्यों कर रहा है?
चर्च का मानना है कि यदि रिहायशी इलाकों और कृषि भूमि को ESA में शामिल किया गया, तो लोगों की आजीविका और बुनियादी ढांचे के विकास में बाधा आएगी।