दिल्ली विश्वविद्यालय के पास सत्य निकेतन में एक पीजी भवन ढहने के बाद छात्रों में भारी दहशत है। सैकड़ों छात्र अपने सामान के साथ रातों-रात पीजी छोड़ अपने घरों या रिश्तेदारों के पास जाने को मजबूर हैं।
- सत्य निकेतन में 50 साल पुराना पांच मंजिला भवन ढहने से भारी तबाही हुई।
- छात्रों में सुरक्षा को लेकर इतना डर है कि वे अपने पीजी वापस लौटने को तैयार नहीं हैं।
- बचाव कार्यों के बीच अब तक 6 लोगों की मौत की खबर है।
- कॉलेजों को अस्थायी आश्रय स्थल में बदल दिया गया है।
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के पास स्थित छात्र हब सत्य निकेतन में एक भीषण भवन हादसे ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। रविवार की रात, जब पूरा इलाका सो रहा था, एक 50 साल पुराने पांच मंजिला बॉयज हॉस्टल के ढहने से चीख-पुकार मच गई। इस घटना के बाद से ही छात्र इतने डरे हुए हैं कि वे अपने सामान के साथ रातों-रात इलाके को खाली कर रहे हैं।
हादसे के बाद की तस्वीरें हृदयविदारक हैं। छात्र अपने सूटकेस और बैग कंधे पर लटकाए, डर और सदमे में गलियों से बाहर निकलते देखे जा रहे हैं। कानपुर की रहने वाली अनुश्रुति जैसी कई छात्राएं बिना किसी तैयारी के, सिर्फ अपने फोन के साथ अपने दोस्तों के घर या रिश्तेदारों के पास भागने को मजबूर हो गईं। उन्होंने बताया कि इमारत गिरने का झटका इतना तेज था कि उनके कमरे की जमीन हिल गई थी, जिससे उन्हें लगा कि उनका अपना पीजी भी गिर जाएगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना दिल्ली के छात्र आवासों में व्याप्त असुरक्षित बुनियादी ढांचे और नियामक विफलता का एक गंभीर प्रमाण है। सत्य निकेतन जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में पुराने और जर्जर भवन छात्रों के जीवन के लिए निरंतर खतरा बने हुए हैं, जहाँ एमसीडी (MCD) की निगरानी का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
छात्रों का पलायन केवल डर नहीं, बल्कि प्रशासन की विफलता के प्रति एक मूक विरोध है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए, अर्यावर्त कॉलेज और वेंकटेश्वर कॉलेज जैसे शैक्षणिक संस्थानों ने अपने क्लासरूम को अस्थायी आश्रय स्थलों में बदल दिया है। वहां छात्रों के लिए गद्दे बिछाए गए हैं ताकि वे रात बिता सकें। छात्र प्रतिनिधियों का अनुमान है कि 100 से अधिक छात्र अब तक अपने घरों के लिए निकल चुके हैं।
छात्रों की मांग स्पष्ट है: जब तक दिल्ली नगर निगम (MCD) सभी पीजी भवनों की गहन सुरक्षा जांच नहीं करता और उन्हें लिखित आश्वासन नहीं देता कि उनकी इमारतें सुरक्षित हैं, तब तक कोई भी छात्र वापस लौटने को तैयार नहीं है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सत्य निकेतन दशकों से दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए एक प्रमुख आवासीय केंद्र रहा है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में अनियंत्रित निर्माण और पुराने भवनों के पुनर्विकास की कमी के कारण यहाँ संरचनात्मक सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन गई है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: छात्र अपने पीजी वापस क्यों नहीं जाना चाहते?
उत्तर: छात्र अपनी इमारतों की संरचनात्मक मजबूती को लेकर अत्यधिक डरे हुए हैं और वे एमसीडी द्वारा सुरक्षा प्रमाणन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
प्रश्न 2: प्रभावित छात्रों को कहाँ शरण मिल रही है?
उत्तर: स्थानीय कॉलेजों के क्लासरूम और दोस्तों के घरों में छात्रों को अस्थायी आश्रय दिया जा रहा है।