संसदीय समिति ने मध्य प्रदेश के बालाघाट में बैगा जनजाति के बच्चों की रहस्यमय मौतों और PM-JANMAN योजना के धीमे क्रियान्वयन पर गहरी चिंता जताई है। समिति ने स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल और दूरसंचार की बदहाल स्थिति पर सरकार को घेरा है।

  • बालाघाट जिले में बैगा जनजाति के बच्चों की मौत के कारणों पर सरकार के पास स्पष्ट जवाबों का अभाव।
  • PM-JANMAN योजना के तहत बुनियादी सुविधाओं के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर।
  • स्वास्थ्य संकट के बावजूद मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की तैनाती में भारी देरी।
  • पीवीटीजी (PVTG) बस्तियों में पेयजल और दूरसंचार सेवाओं की गंभीर कमी।

नई दिल्ली: सामाजिक न्याय और अधिकारिता पर संसदीय स्थायी समिति ने मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बैगा जनजाति के बच्चों की दुखद मौतों के मामले में केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति के सदस्यों ने इस बात पर हैरानी जताई कि पहली रिपोर्ट आने के कई महीनों बाद भी सरकार के पास मौतों के सटीक कारणों पर कोई स्पष्ट विवरण नहीं है।

यह मामला तब सामने आया जब समिति ने जनजातीय मामलों के मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और दूरसंचार विभाग के प्रतिनिधियों के साथ प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) के कार्यान्वयन की समीक्षा की। इस योजना का कुल बजट ₹24,104 करोड़ है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना है।

स्वास्थ्य संकट और सरकारी लापरवाही

विपक्ष के सदस्यों ने आरोप लगाया कि सरकार जहां एक ओर गांवों में सेवाओं के 'सैचुरेशन' (पूर्णता) का दावा कर रही है, वहीं स्वास्थ्य संकट के समय प्रशासन पूरी तरह विफल रहा। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जून के अंत में बिरसा ब्लॉक में बुखार और चकत्तों के मामले सामने आए थे। आधिकारिक तौर पर 6 मौतों की पुष्टि हुई है, जिन्हें मलेरिया और खसरे का मिला-जुला असर बताया गया, लेकिन स्थानीय प्रतिनिधियों का दावा है कि यह संख्या 25 से अधिक हो सकती है।

जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे का अभाव और समय पर हस्तक्षेप न होना, निवारणीय बीमारियों को महामारी में बदल देता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घटना केवल एक स्वास्थ्य विफलता नहीं है, बल्कि यह शासन के उस अंतराल को दर्शाती है जहाँ कागजी आंकड़े और जमीनी वास्तविकताएं एक-दूसरे से कोसों दूर हैं। जब एक ₹24,000 करोड़ की योजना के बावजूद बच्चों की जान जाती है, तो यह योजना के कार्यान्वयन मॉडल और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

समिति के सामने यह बात भी आई कि जल शक्ति मंत्रालय को इस त्रासदी की जानकारी तक नहीं थी। वहीं, जनजातीय मामलों के सचिव ने तर्क दिया कि बालाघाट क्षेत्र में 2025 तक वामपंथी उग्रवाद (LWE) की मौजूदगी के कारण योजना का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाया।

विवरण सरकारी दावा (PM-JANMAN) जमीनी रिपोर्ट (समिति/विपक्ष)
परियोजना स्वीकृति 95% पूर्ण क्रियान्वयन में भारी कमी
स्वास्थ्य सेवा मोबाइल यूनिट्स का प्रावधान हस्तक्षेप में महीनों की देरी
पेयजल हर घर नल से जल बस्तियों में पानी का अभाव

दूरसंचार के मुद्दे पर, एक भाजपा सांसद ने केवल BSNL कनेक्टिविटी पर जोर देने की आलोचना की और अन्य निजी ऑपरेटरों को शामिल न करने पर सवाल उठाए। समिति ने अब सरकार से गांव-वार डेटा मांगा है ताकि वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके।

क्या आप जानते हैं?: PM-JANMAN योजना का लक्ष्य 18 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के लगभग 12.36 लाख परिवारों (करीब 48.52 लाख लोग) को लाभ पहुँचाना है।

Frequently Asked Questions

1. PM-JANMAN योजना क्या है?
यह एक केंद्रित अभियान है जिसका उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के लिए आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना है।

2. बालाघाट में बच्चों की मौत का मुख्य कारण क्या बताया गया है?
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मलेरिया, खसरा, कुपोषण और एनीमिया जैसे कारकों के संयुक्त प्रभाव के कारण ये मौतें हुई हैं।