कर्नाटक के मंत्री संतोष लाड ने शिक्षण को सभी पेशों की जननी बताते हुए समाज के निर्माण में शिक्षकों की अपरिहार्य भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षकों से छात्रों में नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों को विकसित करने का आह्वान किया।
- मंत्री संतोष लाड ने शिक्षण को 'सभी पेशों का निर्माता' बताया।
- भारत की साक्षरता दर स्वतंत्रता के समय 20% से बढ़कर अब लगभग 75% हो गई है।
- शिक्षकों को राजनीतिक रूप से तटस्थ रहने और संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने का आग्रह किया गया।
कर्नाटक के श्रम कल्याण मंत्री और धारवाड़ के प्रभारी मंत्री संतोष लाड ने रविवार को जिले में शिक्षक दिवस समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षण पेशे की गरिमा पर प्रकाश डालते हुए इसे एक अत्यंत पवित्र कार्य बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज के हर सफल व्यक्ति, चाहे वह स्वतंत्रता सेनानी हो या कोई बड़ा प्रोफेसर, के पीछे एक शिक्षक का मार्गदर्शन होता है।
अपने संबोधन में, मंत्री लाड ने बसवनना, गौतम बुद्ध, सुकरात, प्लेटो, कार्ल मार्क्स, लुई पाश्चर और अल्बर्ट आइंस्टीन जैसे महान विचारकों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन महान विभूतियों के विचार उनकी मृत्यु के सदियों बाद भी समाज को दिशा दे रहे हैं, जो यह सिद्ध करता है कि शिक्षा का प्रभाव शाश्वत होता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, डिजिटल युग में जहाँ सूचनाओं की भरमार है, वहां शिक्षक की भूमिका 'सूचना प्रदाता' से बदलकर 'मार्गदर्शक' (Mentor) की हो गई है। जब एक मंत्री संवैधानिक तटस्थता और नैतिकता की बात करते हैं, तो यह संकेत देता है कि शिक्षा प्रणाली को केवल डिग्री बांटने के बजाय चरित्र निर्माण पर केंद्रित करने की आवश्यकता है।
"शिक्षा केवल कक्षा की दीवारों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें नैतिकता, कृतज्ञता और सामाजिक जिम्मेदारी का समावेश होना अनिवार्य है।"
मंत्री लाड ने देश की शैक्षिक प्रगति पर चर्चा करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के समय भारत की साक्षरता दर 20% से कम थी, जो अब बढ़कर 75% तक पहुंच गई है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि केवल आंकड़ों में वृद्धि पर्याप्त नहीं है, बल्कि देश की वर्तमान प्रणालियों के कामकाज पर आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने कर्नाटक विद्यावर्धक संघ हॉल में उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे स्वयं रोल मॉडल बनें और छात्रों में मानवता, सहानुभूति और देश के इतिहास के प्रति सम्मान जगाएं।
उपायुक्त स्नेहल आर. ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इंटरनेट और मोबाइल के दौर में छात्रों को सही और गलत के बीच अंतर समझाना शिक्षकों की सबसे बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी है। उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
Frequently Asked Questions
1. मंत्री संतोष लाड ने शिक्षण पेशे को क्या संज्ञा दी?
उन्होंने इसे एक 'महान पेशा' और 'सभी पेशों का निर्माता' बताया जो समाज की नींव रखता है।
2. साक्षरता दर के संबंध में क्या आंकड़े प्रस्तुत किए गए?
उन्होंने बताया कि भारत की साक्षरता दर स्वतंत्रता के समय 20% से कम थी, जो अब बढ़कर लगभग 75% हो गई है।