बेंगलुरु के निवासियों ने शहर में प्रस्तावित 11 एलिवेटेड कॉरिडोर के खिलाफ एक ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। नागरिकों का तर्क है कि यह मेगा प्रोजेक्ट ट्रैफिक कम करने के बजाय शहर की बुनियादी संरचना को और अधिक नुकसान पहुंचाएगा।

  • 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 11 एलिवेटेड कॉरिडोर प्रस्तावित हैं।
  • नागरिकों ने 'Dear DK, Flyovers Yaake?' अभियान के माध्यम से मुख्यमंत्री से परियोजना रोकने की मांग की है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि ये फ्लाईओवर्स ट्रैफिक समस्या का समाधान नहीं हैं, बल्कि समस्या बढ़ाएंगे।

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु एक बार फिर बुनियादी ढांचे के विकास और शहरी नियोजन के बीच छिड़े संघर्ष का केंद्र बन गई है। शहर के जागरूक नागरिकों ने सरकार द्वारा प्रस्तावित 11 नए एलिवेटेड कॉरिडोर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस विरोध का मुख्य केंद्र एक ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान है, जिसका शीर्षक है 'Dear DK, Flyovers Yaake?' (प्रिय डीके, फ्लाईओवर्स क्यों?), जो सीधे तौर पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को संबोधित है।

यह प्रस्तावित परियोजना कुल 13,262 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ 75.6 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के निर्माण की योजना है। सरकार ने अप्रैल में इस मेगा मोबिलिटी प्लान को मंजूरी दी थी, जिसमें से नौ फ्लाईओवर्स पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत और दो बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल के तहत विकसित किए जाने हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विरोध केवल निर्माण के खिलाफ नहीं, बल्कि 'शहरी नियोजन की विफलता' के खिलाफ है। जब शहर का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही संकीर्ण सड़कों और जलजमाव से जूझ रहा है, तो कंक्रीट के भारी ढांचे पर्यावरण और स्थानीय जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करेंगे। विशेष रूप से इंदिरानगर 100 फीट रोड जैसे क्षेत्रों में, जहां हाल ही में व्हाइट-टॉपिंग का काम पूरा हुआ है, वहां फिर से खुदाई करना सरकारी संसाधनों की बर्बादी माना जा रहा है।

"बिना व्यापक सार्वजनिक परामर्श और वैज्ञानिक डेटा के बनाए गए फ्लाईओवर्स केवल अस्थायी राहत देते हैं, जबकि दीर्घकालिक समाधान सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना है।"

अभियान चलाने वालों ने मांग की है कि सरकार इस बजट को भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के मार्गदर्शन में अधिक उपयोगी मोबिलिटी प्रोजेक्ट्स की ओर मोड़ दे। इसके साथ ही, उन्होंने बेंगलुरु स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (B-SMILE) और बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन लैंड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (BMLTA) को तत्काल भंग करने की मांग की है, क्योंकि इन निकायों पर बिना जवाबदेही के परियोजनाएं थोपने का आरोप है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बेंगलुरु ने पिछले एक दशक में कई फ्लाईओवर और मेट्रो लाइनों का निर्माण देखा है, लेकिन 'इंड्यूस्ड डिमांड' (Induced Demand) के सिद्धांत के कारण, नई सड़कों के बनने से वाहनों की संख्या और बढ़ जाती है, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या कभी खत्म नहीं होती। यही कारण है कि अब शहर के लोग 'कंक्रीट जंगल' के बजाय टिकाऊ शहरी नियोजन की मांग कर रहे हैं।

क्या आप जानते हैं?: 'इंड्यूस्ड डिमांड' एक परिवहन सिद्धांत है जिसके अनुसार नई सड़कों के निर्माण से ट्रैफिक कम होने के बजाय अधिक लोग कारें निकालने लगते हैं, जिससे सड़क फिर से भर जाती है।
विशेषताप्रस्तावित योजनानागरिकों की मांग
मॉडलPPP और BOTIISc आधारित वैज्ञानिक योजना
लागत₹13,262 करोड़सार्वजनिक परिवहन में निवेश
दृष्टिकोणफ्लाईओवर्स का निर्माणटिकाऊ शहरी मोबिलिटी

Frequently Asked Questions

1. 'Dear DK, Flyovers Yaake?' अभियान क्या है?
यह बेंगलुरु के नागरिकों द्वारा शुरू किया गया एक ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान है, जिसका उद्देश्य मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को 11 प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर के खिलाफ जनता की नाराजगी से अवगत कराना है।

2. विरोध करने वालों की मुख्य चिंता क्या है?
मुख्य चिंता यह है कि ये फ्लाईओवर्स ट्रैफिक को कम नहीं करेंगे, बल्कि शहर के सौंदर्य और पर्यावरण को नष्ट करेंगे, साथ ही हाल ही में बनी सड़कों को फिर से खोदना होगा।