कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) को आयुष विभाग द्वारा सीट मैट्रिक्स न दिए जाने के कारण काउंसलिंग प्रक्रिया में देरी हो रही है। इससे उन हजारों छात्रों का भविष्य अधर में है जिन्होंने अन्य कोर्स में प्रोविजनल एडमिशन लिया है।

  • आयुष विभाग ने अभी तक KEA को सीट मैट्रिक्स जमा नहीं किया है, जिससे काउंसलिंग रुकी हुई है।
  • इंजीनियरिंग और डेंटल जैसे अन्य प्रोफेशनल कोर्स की काउंसलिंग अंतिम चरण में है।
  • 14 सितंबर को इंजीनियरिंग कॉलेजों में कक्षाएं शुरू हो रही हैं, जिससे कोर्स बदलने की समय सीमा समाप्त हो जाएगी।
  • देरी का मुख्य कारण केंद्रीय आयुष मंत्रालय से अनुमति मिलने में हो रही देरी बताया जा रहा है।

बेंगलुरु: कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) में आयुष (आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) पाठ्यक्रमों की काउंसलिंग प्रक्रिया में अनिश्चितकालीन देरी हो रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि आयुष विभाग ने अभी तक उपलब्ध सीटों का विवरण (सीट मैट्रिक्स) KEA को नहीं सौंपा है। इस प्रशासनिक विफलता ने हजारों महत्वाकांक्षी छात्रों और उनके अभिभावकों को गहरे तनाव में डाल दिया है।

वर्तमान स्थिति यह है कि इंजीनियरिंग सहित अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए सीईटी (CET) सीट आवंटन प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। केईए के कार्यकारी निदेशक प्रसन्न ने पुष्टि की है कि विभाग ने आयुष विभाग को कई रिमाइंडर भेजे हैं, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

क्यों बढ़ रही है छात्रों की परेशानी?

कई छात्र ऐसे हैं जिन्होंने आयुष पाठ्यक्रमों में रुचि दिखाई है, लेकिन काउंसलिंग में देरी के कारण उन्होंने अस्थायी रूप से इंजीनियरिंग या डेंटल साइंस जैसे कोर्स में प्रवेश ले लिया है। केईए के नियमों के अनुसार, छात्र बेहतर विकल्प मिलने पर कोर्स बदल सकते हैं, लेकिन इसमें एक समय सीमा होती है।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक प्रशासनिक देरी नहीं है, बल्कि छात्रों के करियर के साथ एक बड़ा जोखिम है। AICTE के आदेशानुसार, 14 सितंबर को इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अंतिम तिथि है और कक्षाएं आधिकारिक तौर पर शुरू हो जाएंगी। एक बार कक्षाएं शुरू होने के बाद, कॉलेज छात्रों को कोर्स बदलने की अनुमति नहीं देते हैं और प्रवेश रद्द करने पर पूरी फीस जुर्माने के रूप में वसूलते हैं।

प्रशासनिक समन्वय की कमी के कारण योग्य छात्र अपनी पसंद के चिकित्सा क्षेत्र से वंचित हो सकते हैं, जो राज्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए दीर्घकालिक नुकसान है।

ऐतिहासिक रूप से, कर्नाटक में आयुष पाठ्यक्रमों की काउंसलिंग में देरी देखी गई है। वर्ष 2025-26 में राज्य में 121 आयुष कॉलेज थे, जिनमें कुल 8,945 सीटें थीं। इनमें से 7,950 सीटें भरी गई थीं, जबकि 995 सीटें खाली रह गई थीं। इस वर्ष भी वही पैटर्न दोहराया जा रहा है, जिससे शैक्षणिक कैलेंडर पूरी तरह बाधित हो गया है।

विवरण अन्य प्रोफेशनल कोर्स (इंजीनियरिंग/डेंटल) आयुष (AYUSH) कोर्स
काउंसलिंग स्थिति अंतिम चरण/पूर्ण लंबित (Pending)
कक्षाएं शुरू होने की तिथि 14 सितंबर 2026 अघोषित
सीट मैट्रिक्स स्थिति जमा हो चुका है प्रतीक्षित

आयुष विभाग के सूत्रों का कहना है कि देरी का कारण केंद्रीय आयुष मंत्रालय है, जिसने अभी तक सीट मैट्रिक्स, सीटों की वृद्धि और अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर अपनी अनुमति नहीं दी है।

क्या आप जानते हैं?: आयुष (AYUSH) शब्द आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी का संक्षिप्त रूप है, जो भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का प्रतिनिधित्व करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: आयुष काउंसलिंग में देरी का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: आयुष विभाग द्वारा KEA को सीट मैट्रिक्स जमा न करना, जिसके पीछे केंद्रीय आयुष मंत्रालय से अनुमति मिलने में देरी बताई जा रही है।

प्रश्न 2: यदि छात्र 14 सितंबर के बाद कोर्स बदलना चाहें तो क्या होगा?
उत्तर: अधिकांश कॉलेज कक्षाएं शुरू होने के बाद कोर्स बदलने की अनुमति नहीं देते हैं और प्रवेश रद्द करने पर पूरी फीस जुर्माने के रूप में ले सकते हैं।