खाद्य सुरक्षा पर एक बड़े अभियान के तहत, FDA ने बेंगलुरु के कई 'डार्क स्टोर्स' पर छापेमारी की, जिसमें अमेज़न और इंस्टामार्ट सहित विभिन्न प्लेटफार्मों से 1.43 करोड़ रुपये से अधिक का एक्सपायर्ड भोजन और दवाएं जब्त की गईं।
- FDA ने 1.43 करोड़ रुपये मूल्य के एक्सपायर्ड और गलत लेबल वाले सामान जब्त किए।
- अमेज़न और इंस्टामार्ट जैसे बड़े क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म निशाने पर आए।
- कर्नाटक सरकार अब ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए नए दिशानिर्देशों पर विचार कर रही है।
कर्नाटक के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बेंगलुरु में तेजी से बढ़ते 'डार्क स्टोर' इकोसिस्टम के खिलाफ एक आक्रामक प्रवर्तन अभियान शुरू किया है। समन्वित छापेमारी के दौरान, अधिकारियों ने भारी मात्रा में एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद और दवाएं बरामद कीं, जिसकी कुल कीमत लगभग 1.43 करोड़ रुपये आंकी गई है।
इन ऑपरेशनों में विशेष रूप से उन बैकएंड गोदामों को निशाना बनाया गया, जिन्हें 'डार्क स्टोर' कहा जाता है और जो क्विक-कॉमर्स दिग्गजों की त्वरित डिलीवरी सेवा को संचालित करते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, जब्त किए गए सामानों का एक बड़ा हिस्सा, जिसकी कीमत लगभग 1.38 करोड़ रुपये है, अमेज़न और इंस्टामार्ट से जुड़े केंद्रों से बरामद किया गया। जब्त किए गए सामानों में न केवल समय सीमा समाप्त हो चुके खाद्य पदार्थ थे, बल्कि गलत लेबल वाले उत्पाद भी थे जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकते थे।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि '10-मिनट डिलीवरी' मॉडल के तेजी से विस्तार ने कठोर गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र के कार्यान्वयन को पीछे छोड़ दिया है। उच्च-वेग वाले वातावरण में स्वचालित इन्वेंट्री प्रबंधन अक्सर एक्सपायर्ड यूनिट्स को चिह्नित करने में विफल रहता है, जिससे एक प्रणालीगत जोखिम पैदा होता है जहाँ उपभोक्ताओं को असुरक्षित उत्पाद मिलते हैं।
डार्क स्टोर्स की ओर बदलाव ने एक नियामक अंधबिंदु (blind spot) पैदा कर दिया है, जहाँ डिलीवरी की गति के सामने खाद्य सुरक्षा ऑडिट की अक्सर अनदेखी की जाती है।
इन छापों के बाद, कर्नाटक राज्य सरकार ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से दवाओं की बिक्री और मूल्य निर्धारण के संबंध में नए और सख्त दिशानिर्देश लागू करने की योजना की घोषणा की है। इस कदम का उद्देश्य फार्मास्यूटिकल्स के अनियमित वितरण को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल फार्मेसी भी भौतिक स्टोरों के समान कड़े मानकों का पालन करें।
ऐतिहासिक रूप से, भारत में खाद्य सुरक्षा निरीक्षण पारंपरिक बाजारों और रेस्तरां पर केंद्रित रहे हैं। हालांकि, 'प्लेटफॉर्म इकोनॉमी' के उदय ने जोखिम प्रोफाइल को बदल दिया है। FDA का वर्तमान रुख यह बताता है कि अब डिजिटल इंटरफेस से लेकर फिजिकल फुलफिलमेंट सेंटर तक पूरी सप्लाई चेन का ऑडिट किया जाएगा ताकि कॉर्पोरेट लापरवाही सार्वजनिक स्वास्थ्य से समझौता न करे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
FDA छापों से कौन सी कंपनियां प्रभावित हुईं?
छापेमारी मुख्य रूप से बेंगलुरु में अमेज़न और इंस्टामार्ट जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्मों से जुड़े डार्क स्टोर्स पर की गई।
सरकार भविष्य में इसे रोकने के लिए क्या कर रही है?
कर्नाटक सरकार ऑनलाइन दवा बिक्री और क्विक-कॉमर्स गोदामों के लिए खाद्य सुरक्षा प्रोटोकॉल के दिशानिर्देशों की समीक्षा और अपडेट कर रही है।