भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के नए विश्व मानचित्र में 'विसंगतियों' को लेकर औपचारिक आपत्ति जताई है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अस्पष्ट रेखाओं के बीच दिखाया गया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह मानचित्र समानता के सिद्धांत का समर्थन करता है, लेकिन अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।
- भारत ने अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन के चित्रण को लेकर UN के समक्ष चिंता व्यक्त की है।
- 'मैप को सही करें' (Correct the Map) प्रस्ताव का उद्देश्य अफ्रीका जैसे महाद्वीपों के आकार के विरूपण को ठीक करना है।
- भारत समान-क्षेत्र मानचित्रण के सिद्धांत का समर्थन करता है, लेकिन गलत सीमाओं वाले किसी भी मानचित्र को स्वीकार नहीं करता।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार को घोषणा की कि उसने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्रों के दौरान उपयोग किए गए विश्व मानचित्र में पाई गई "विसंगतियों" को "संबंधित व्यक्तियों" के समक्ष उठाया है। यह मानचित्र भारत द्वारा समर्थित 'करेक्ट द मैप' प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान व्यापक रूप से उपयोग किया गया था, लेकिन इसमें अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अस्पष्ट भारतीय और चीनी दावा रेखाओं के बीच अलग क्षेत्रों के रूप में दिखाया गया था।
मंत्रालय के प्रवक्ता रंधिर जायसवाल ने दोहराया कि भारत ने 'करेक्ट द मैप' प्रस्ताव के पीछे के सिद्धांत के लिए मतदान किया था, लेकिन किसी विशिष्ट मानचित्र का समर्थन नहीं किया था। यह प्रस्ताव दुनिया के सामान्य मानचित्रों में मौजूद विरूपणों को ठीक करने का प्रयास करता है, जो अफ्रीका और अन्य भूमध्यरेखीय क्षेत्रों के आकार को छोटा दिखाते हैं। अफ्रीकी संघ ने इस दृष्टिकोण को "संज्ञानात्मक न्याय" (Cognitive Justice) करार दिया है।
विवाद की जड़ 1 जुलाई को UN Geospatial द्वारा जारी किया गया मानचित्र है। इस मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन के सीमांकन के लिए पारंपरिक UN मार्करों जैसे "भारतीय रेखा" और "चीनी रेखा" का उपयोग नहीं किया गया, जिससे इन दो क्षेत्रों की स्थिति को लेकर अस्पष्टता पैदा हो गई।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना तकनीकी मानचित्रण और राष्ट्रीय संप्रभुता के बीच के संवेदनशील संबंध को उजागर करती है। भारत जैसे उभरते वैश्विक शक्ति के लिए, UN द्वारा समर्थित किसी भी चित्रण में अस्पष्टता को प्रतिद्वंद्वी देशों के दावों के मौन समर्थन के रूप में देखा जा सकता है। 'इक्वल अर्थ' प्रोजेक्शन की ओर बदलाव ग्लोबल साउथ को सशक्त बनाने का एक भू-राजनीतिक कदम है, लेकिन जब तकनीकी अपडेट द्विपक्षीय सीमा विवादों की अनदेखी करते हैं, तो वे राजनयिक संकट पैदा कर सकते हैं।
"अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मानचित्रण की सटीकता केवल एक तकनीकी आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह मान्यता प्राप्त संप्रभुता और राजनयिक वैधता का प्रतिबिंब है।"
ऐतिहासिक रूप से, संयुक्त राष्ट्र ने विवादित क्षेत्रों के लिए 'कंट्रोल लाइन' या 'क्लेम लाइन' का उपयोग करके एक सतर्क दृष्टिकोण अपनाया है। UN Geospatial मानचित्र में इन मार्करों का अचानक गायब होना स्थापित प्रोटोकॉल से विचलन है। भारत ने स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सहित भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही उसकी संप्रभु सीमाओं का चित्रण होना चाहिए।
| विशेषता | पिछले UN मानचित्र | नया UN Geospatial मानचित्र |
|---|---|---|
| सीमा मार्कर | 'भारतीय' और 'चीनी' रेखाओं का उपयोग | अनिर्दिष्ट दावा रेखाएं |
| LoC चित्रण | स्पष्टीकरण के साथ बिंदीदार रेखा | स्पष्टीकरण के साथ बिंदीदार रेखा |
| मुख्य ध्यान | मानक प्रोजेक्शन | समान क्षेत्र प्रोजेक्शन (अफ्रीका केंद्रित) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या भारत ने 'करेक्ट द मैप' प्रस्ताव का विरोध किया?
नहीं, भारत ने समान-क्षेत्र प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के पक्ष में मतदान किया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि इसका मतलब किसी भी गलत मानचित्र का समर्थन करना नहीं है।
प्रश्न 2: 'इक्वल अर्थ' प्रोजेक्शन क्या है?
यह एक ऐसा मानचित्र प्रोजेक्शन है जिसे महाद्वीपों के सापेक्ष आकार को अधिक सटीक रूप से दर्शाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि अफ्रीका जैसे क्षेत्रों का आकार छोटा न दिखे।