कोल्लम के पुट्टिंगल देवी मंदिर में हुए एक भीषण आतिशबाजी विस्फोट में 110 लोगों की जान चली गई और लगभग 400 घायल हो गए। प्रशासन द्वारा प्रतिस्पर्धी आतिशबाजी की अनुमति न दिए जाने के बावजूद यह आयोजन किया गया था।

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  • केरल की अब तक की सबसे भीषण आतिशबाजी त्रासदी में 110 मौतें और करीब 400 घायल।
  • हवा में फटने वाले पटाखे के जमीन पर गिरने से गोदाम में रखे पटाखों में आग लगी।
  • प्रशासन ने प्रतिस्पर्धी आतिशबाजी की अनुमति नहीं दी थी, फिर भी आयोजन किया गया।
  • पीएम नरेंद्र मोदी AIIMS के विशेषज्ञों की टीम के साथ राहत कार्यों के लिए कोल्लम पहुंचे।

केरल के इतिहास की सबसे दर्दनाक आतिशबाजी दुर्घटना में कोल्लम के दक्षिण में स्थित परवर के पुट्टिंगल देवी मंदिर के परिसर में भारी तबाही मची है। रविवार सुबह करीब 3:30 बजे, मीना-भरणी उत्सव के समापन के अवसर पर पटाखों के एक विशाल भंडार में विस्फोट हो गया। इस धमाके में 40 से अधिक लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास की कई इमारतें ढह गईं और मंदिर परिसर मलबे में तब्दील हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा तब शुरू हुआ जब हवा में फटने के लिए बनाया गया एक पटाखा जमीन पर गिर गया, जिससे चारों ओर चिंगारियां फैल गईं। ये चिंगारियां पटाखों के गोदाम तक पहुंच गईं, जिससे वहां जमा भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री में आग लग गई। इसके बाद हुए सिलसिलेवार धमाकों ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया। विस्फोट के तुरंत बाद बिजली गुल हो गई, जिससे भीड़ को त्रासदी की भयावहता का अंदाजा लगाने में समय लगा। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए मलबे से शवों और घायलों को बाहर निकाला।

यह महत्वपूर्ण क्यों है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि नियामक प्रवर्तन की विफलता है। कोल्लम जिला प्रशासन ने स्पष्ट रूप से प्रतिस्पर्धी आतिशबाजी की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, फिर भी मंदिर अधिकारियों ने व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ आयोजन किया। यह घटना दर्शाती है कि परंपराओं के नाम पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी करना कितना घातक हो सकता है।

घायलों को कोल्लम के सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जबकि 12 गंभीर रूप से घायल मरीजों को तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और AIIMS के विशेषज्ञों की एक टीम के साथ तुरंत कोल्लम पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री ओमन चंडी के साथ बैठक की और राज्य को केंद्र की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

"जब प्रशासनिक प्रतिबंधों को केवल सुझाव माना जाता है, तो उत्सव अक्सर मातम में बदल जाते हैं।"

राज्य सरकार ने इस आपदा की न्यायिक जांच और क्राइम ब्रांच द्वारा जांच के आदेश दिए हैं। परवर पुलिस ने मंदिर अधिकारियों और आतिशबाजी ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ठेकेदार, जो 80 प्रतिशत तक जल गया है, वर्तमान में मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपचाराधीन है।

मुआवजे का स्रोत मृतकों के परिजन घायलों के लिए
केरल राज्य सरकार 10 लाख रुपये 2 लाख रुपये
केंद्र सरकार 2 लाख रुपये घोषित नहीं

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मंदिर परिसर और अस्पतालों का दौरा किया। राज्य कैबिनेट की आपात बैठक में मृतकों के परिजनों के लिए 10 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों के लिए 2 लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा की गई। विपक्ष के नेता वी.एस. अचुतनंदन ने इस त्रासदी को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने की मांग की है।

क्या आप जानते हैं?: मीना-भरणी उत्सव इस क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जिसमें प्रतिस्पर्धी आतिशबाजी की परंपरा है, जिसे देखने के लिए पड़ोसी जिलों से हजारों लोग जुटते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: प्रशासन ने आतिशबाजी की अनुमति क्यों नहीं दी थी?
कोल्लम जिला प्रशासन ने पुलिस रिपोर्ट के आधार पर अनुमति नहीं दी थी क्योंकि मंदिर प्रशासन 'प्रतिस्पर्धी' आतिशबाजी करना चाहता था, जो सुरक्षा नियमों के खिलाफ है।

प्रश्न 2: अब तक क्या कानूनी कार्रवाई की गई है?
परवर पुलिस ने लापरवाही और प्रशासनिक आदेशों के उल्लंघन के लिए मंदिर प्रबंधन और ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।