भारत में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेश्कीयन के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इन वार्ताओं का मुख्य केंद्र व्यापार विस्तार और रणनीतिक रक्षा सहयोग होगा।

  • पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच एक वर्ष में तीसरी मुलाकात।
  • 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य।
  • S-400 मिसाइल डिलीवरी और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर चर्चा।

भारत वर्तमान में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसने वैश्विक राजनीति के केंद्र को दिल्ली की ओर मोड़ दिया है। इस उच्च-स्तरीय आयोजन के इतर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कीयन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच यह 22वीं आमने-सामने की मुलाकात होगी, जो पिछले एक साल के भीतर उनकी तीसरी बातचीत है, जो दोनों देशों के बीच गहरे होते रणनीतिक संबंधों को दर्शाता है।

इस बैठक का प्राथमिक एजेंडा आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। वर्तमान में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 60 अरब डॉलर है, जिसे 2030 तक बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। व्यापार के साथ-साथ रक्षा सहयोग पर भी गहन चर्चा होने की उम्मीद है, जिसमें विशेष रूप से S-400 मिसाइल सिस्टम की शेष डिलीवरी और भविष्य की जरूरतों के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की खरीद पर विचार किया जाएगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बैठक केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक संतुलन बनाने की एक कोशिश है। एक तरफ जहां पश्चिमी देश रूस पर दबाव बना रहे हैं, वहीं भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को बरकरार रखा है। ऊर्जा व्यापार और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, भारत का रुख स्पष्ट है कि वह अपने आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है।

"भारत और रूस के बीच यह निरंतर संवाद वैश्विक व्यवस्था में एक बहुध्रुवीय दुनिया (Multipolar World) की नींव रख रहा है, जहाँ कोई एक देश वर्चस्व नहीं रखेगा।"

यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में, भारत ने हमेशा कूटनीति और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने पर जोर दिया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का आगमन भी इस बात की पुष्टि करता है कि रूस भारत को अपनी वैश्विक पहुंच के लिए एक अनिवार्य भागीदार मानता है।

क्षेत्रवर्तमान स्थिति2030 का लक्ष्य
द्विपक्षीय व्यापार$60 बिलियन$100 बिलियन
रक्षा सहयोगS-400 डिलीवरी जारी5th Gen विमानों पर विचार
क्या आप जानते हैं?: ब्रिक्स (BRICS) समूह की स्थापना मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए की गई थी, लेकिन अब यह एक शक्तिशाली भू-राजनीतिक ब्लॉक बन चुका है।

Frequently Asked Questions

1. पीएम मोदी और पुतिन की बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मुख्य उद्देश्य व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुँचाना और रक्षा समझौतों, विशेषकर S-400 की डिलीवरी को सुनिश्चित करना है।

2. यूक्रेन संकट पर भारत का क्या रुख है?
भारत ने लगातार कूटनीति, संवाद और शांतिपूर्ण समाधान के माध्यम से संघर्ष को समाप्त करने की वकालत की है।