पटना में दलित और ओबीसी संगठनों ने आरक्षण सीमा को 50% से बढ़ाकर 65% करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने मार्च को रोककर कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।

  • प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण की सीमा 50% से बढ़ाकर 65% करने की मांग की है।
  • 'आरक्षण बढ़ाओ, संविधान बचाओ संघर्ष समिति' के बैनर तले गांधी मैदान से मार्च निकाला गया।
  • राजभवन की ओर जा रहे प्रदर्शनकारियों को डाक बंगला चौक पर पुलिस ने रोका।
  • निजी क्षेत्र में आरक्षण और नौवीं अनुसूची में शामिल करने की प्रमुख मांगें।

बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि राज्य सरकार वर्तमान 50% की आरक्षण सीमा को तोड़कर इसे 65% लागू करे। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद सात कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।

दलित अधिकार कार्यकर्ता अमर पासवान आजाद के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन 'आरक्षण बढ़ाओ संविधान बचाओ संघर्ष समिति' के बैनर तले आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से राजभवन की ओर कूच कर रहे थे, लेकिन डाक बंगला चौक पर पुलिस ने लोहे के बैरिकेड्स लगाकर रास्ता रोक दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 20 से अधिक पुलिस थानों की फोर्स तैनात की गई थी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह विरोध केवल एक रैली नहीं है, बल्कि यह न्यायिक आदेशों और राजनीतिक वादों के बीच के टकराव को दर्शाता है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने 2022-23 के जाति आधारित गणना के बाद आरक्षण को 65% किया था, लेकिन पटना उच्च न्यायालय ने 2024 में इसे 'असंवैधानिक' करार दिया। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस आदेश पर रोक न लगाने के बाद अब सड़क पर संघर्ष तेज हो गया है।

आरक्षण के फैसले को संविधान की नौवीं अनुसूची में डालने की मांग एक कानूनी रणनीति है, ताकि इसे अदालती हस्तक्षेप से बचाया जा सके।

प्रदर्शनकारियों ने केवल आरक्षण प्रतिशत ही नहीं, बल्कि कई अन्य गंभीर मुद्दे भी उठाए। उन्होंने एससी/एसटी उप-योजना कोष के दुरुपयोग को रोकने, दलितों के घरों पर 'बुलडोजर कार्रवाई' बंद करने और दलित अत्याचारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही, उन्होंने संविदा कार्यों में 50% आरक्षण और पदोन्नति में आरक्षण की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई।

वर्तमान में, बिहार सरकार अनुसूचित जातियों को 16%, अनुसूचित जनजातियों को 1%, अत्यंत पिछड़ा वर्ग को 18%, अन्य पिछड़ा वर्ग को 12% और पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को 3% आरक्षण प्रदान करती है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यह वितरण जनसंख्या के वास्तविक आंकड़ों के अनुरूप नहीं है।

श्रेणी वर्तमान कोटा (%) मांगा गया कोटा (%)
कुल सीमा 50% 65%
अनुसूचित जाति 16% अनुपातिक वृद्धि
अत्यंत पिछड़ा वर्ग 18% अनुपातिक वृद्धि
क्या आप जानते हैं?: भारतीय संविधान की नौवीं अनुसूची का निर्माण कुछ विशेष कानूनों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर न्यायिक समीक्षा से बचाने के लिए किया गया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: 65% आरक्षण को असंवैधानिक क्यों घोषित किया गया?
पटना उच्च न्यायालय ने माना कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50% की सीमा का उल्लंघन करना असंवैधानिक है, जब तक कि कोई असाधारण डेटा इसे उचित न ठहराए।

प्रश्न 2: 'आरक्षण बढ़ाओ संविधान बचाओ संघर्ष समिति' का लक्ष्य क्या है?
यह समिति हाशिए पर रहने वाली जातियों के लिए अधिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लड़ रही है।