टीटीडी के कलाकार गिन्ने वेंकटेश्वरलु ने महीनों की कड़ी मेहनत के बाद 'पॉइंटिलिज्म' तकनीक का उपयोग करके भगवान वेंकटेश्वर और देवी पद्मावती की भव्य पेंटिंग तैयार की है। यह कलाकृति तिरुमला के पुनर्विकसित होने वाले विशाल संग्रहालय का मुख्य आकर्षण होगी।
- कलाकार गिन्ने वेंकटेश्वरलु ने 12 रंगों के मार्कर पेन का उपयोग करके हजारों डॉट्स से यह चित्र बनाया है।
- यह पेंटिंग तिरुमला में 1.2 लाख वर्ग फुट में विकसित हो रहे नए श्री वेंकटेश्वर संग्रहालय में प्रदर्शित की जाएगी।
- यह कलाकृति 'आगम शास्त्र' के प्राचीन सिद्धांतों और आधुनिक तकनीक का एक अनूठा संगम है।
तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर संस्थान (SVITSA) के एक समर्पित कलाकार ने भक्ति और कला का एक ऐसा मेल प्रस्तुत किया है जो देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देगा। गिन्ने वेंकटेश्वरलु, जो 'गिन्ने सागर' के नाम से जाने जाते हैं, ने महीनों तक अपने कार्यालय के घंटों के बाद घर पर बैठकर भगवान वेंकटेश्वर और देवी पद्मावती की भव्य पेंटिंग तैयार की है।
यह पेंटिंग 'पॉइंटिलिज्म' (Pointillism) नामक एक जटिल तकनीक का उपयोग करके बनाई गई है, जिसमें ब्रश के बजाय हजारों रंगीन बिंदुओं (dots) के माध्यम से आकृति उभर कर आती है। कलाकार ने इस दिव्य कार्य के लिए 12 अलग-अलग रंगों के स्थायी मार्कर पेन का उपयोग किया है। प्रत्येक पेंटिंग की ऊंचाई 54 इंच और चौड़ाई 34 इंच है, और जब इन्हें साथ रखा जाता है, तो यह 68 इंच चौड़ी एक भव्य दृश्य रचना बनाती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह परियोजना केवल एक कलाकृति नहीं है, बल्कि यह तिरुमला की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक तकनीक के समन्वय का प्रतीक है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) द्वारा 1.2 लाख वर्ग फुट में विकसित किया जा रहा यह नया संग्रहालय, तिरुमला के इतिहास, आध्यात्मिकता और वास्तुकला को 14 इंटरैक्टिव गैलरी के माध्यम से दुनिया के सामने लाएगा।
यह कलाकृति प्राचीन आगम शास्त्रों की गणनाओं और आधुनिक कलात्मकता का एक दुर्लभ संगम है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी।
कलाकार वेंकटेश्वरलु ने बताया कि उन्होंने टीटीडी द्वारा दशकों से कैलेंडरों के लिए उपयोग की जाने वाली पारंपरिक छवियों को आधार बनाया है। यह कार्य न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे पारंपरिक कला रूपों को आधुनिक माध्यमों के साथ जीवित रखा जा सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तिरुपति बालाजी मंदिर सदियों से कला और वास्तुकला का केंद्र रहा है। टीटीडी का श्री वेंकटेश्वर संस्थान पारंपरिक मूर्तिकला और वास्तुकला को संरक्षित करने के लिए समर्पित है। इस तरह के प्रयास यह सुनिश्चित करते हैं कि मंदिर की परंपराएं केवल अनुष्ठानों तक सीमित न रहें, बल्कि कला के माध्यम से भी जीवित रहें।
Frequently Asked Questions
1. यह पेंटिंग कहाँ प्रदर्शित की जाएगी?
यह पेंटिंग तिरुमला में पुनर्विकसित हो रहे श्री वेंकटेश्वर संग्रहालय की पेंटिंग गैलरी के सामने प्रदर्शित की जाएगी।
2. इस कलाकृति को बनाने में कितना समय लगा?
कलाकार ने इसे पूरा करने के लिए लगभग चार से पांच महीने का समय लिया, जो उन्होंने अपने नियमित कार्यालय समय के बाद समर्पित किया।