'आरक्षण हटाओ आंदोलन' (RHA) के बैनर तले हजारों प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस के साथ झड़प की और शिक्षा एवं नौकरियों में जाति के बजाय आय-आधारित आरक्षण की मांग की।

  • प्रदर्शनकारियों की मांग है कि आरक्षण सामाजिक-आर्थिक श्रेणियों के बजाय केवल आय मानदंडों पर आधारित हो।
  • यह आंदोलन 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' (RHA) द्वारा संचालित है, जो UGC के 2026 के जाति-समानता नियमों को वापस लेने की मांग कर रहा है।
  • दिल्ली पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने के बावजूद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ, जिसके बाद झड़पें हुईं।

शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक तनाव में भारी वृद्धि देखी गई। 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' (RHA) के बैनर तले हजारों प्रदर्शनकारी एकत्र हुए, जिन्होंने भारत की मौजूदा आरक्षण नीति में बुनियादी बदलाव की मांग की। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि सार्वजनिक शिक्षा और रोजगार में कोटा जाति के बजाय पूरी तरह से आर्थिक स्थिति (आय मानदंड) पर आधारित होना चाहिए।

इस आंदोलन की शुरुआत छात्र हर्ष दुबे द्वारा शुरू किए गए एक इंस्टाग्राम पेज से हुई थी। अब इस अभियान की कमान अनुभवी आरक्षण-विरोधी कार्यकर्ताओं जैसे अनुराधा तिवारी, अजीत भारती और नेहा दास के हाथों में है। इस विरोध प्रदर्शन में करणी सेना और रणबीर सेना जैसे संगठनों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई, जो सामान्य श्रेणी के लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह आंदोलन राज्य की ऐतिहासिक सामाजिक न्याय की प्रतिबद्धता और सामान्य श्रेणी के युवाओं के बीच बढ़ते असंतोष के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। "एक परिवार, एक आरक्षण" की मांग करके, RHA भारतीय संविधान के उस ढांचे को चुनौती दे रहा है जो आरक्षण को गरीबी उन्मूलन योजना के बजाय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के साधन के रूप में देखता है।

पुलिस के साथ टकराव दोपहर 2 बजे के करीब तब बढ़ गया जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ दिए और 'जय श्री राम' के नारे लगाते हुए परिसर में प्रवेश किया। दिल्ली पुलिस ने उन्हें रामलीला मैदान जाने का सुझाव दिया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने वहां जाने से इनकार कर दिया और "आरक्षण सुधार सत्याग्रह" के लिए मंच स्थापित किया। शाम तक पुलिस ने जमावड़े को अवैध घोषित कर दिया और प्रदर्शनकारियों को बसों में भरकर हिरासत में लिया।

"जाति-आधारित से आय-आधारित आरक्षण की मांग यह दर्शाती है कि आधुनिक भारत का शहरी मध्यम वर्ग सामाजिक समानता को अब एक अलग नजरिए से देख रहा है।"

केंद्र सरकार ने अपना रुख स्पष्ट रखा है कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण उन समुदायों के प्रतिनिधित्व के लिए है जिन्होंने पीढ़ियों से सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन का सामना किया है। हालांकि, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह 2026 के UGC समानता नियमों पर पुनर्विचार कर रही है।

प्रदर्शन स्थल पर मौजूद 27 वर्षीय हिमानी सिसोदिया ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि सामान्य श्रेणी के छात्र अधिक अंक लाने के बावजूद आरक्षण के कारण नौकरियों से वंचित रह जाते हैं। वहीं, रणबीर सेना के आलोक प्रताप सिंह ने तर्क दिया कि गरीबी की कोई जाति नहीं होती और अब आरक्षण का आधार केवल आय होना चाहिए।

क्या आप जानते हैं?: जंतर-मंतर ऐतिहासिक रूप से भारत के सबसे प्रभावशाली जमीनी विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रहा है, जिसमें भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों से लेकर छात्र अधिकार रैलियां शामिल हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: आरक्षण हटाओ आंदोलन की मुख्य मांग क्या है?
मुख्य मांग यह है कि नौकरियों और शिक्षा में जाति-आधारित आरक्षण को समाप्त कर आय-आधारित मानदंड लागू किए जाएं और 'एक परिवार, एक आरक्षण' की नीति अपनाई जाए।

प्रश्न 2: दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर कार्रवाई क्यों की?
पुलिस का कहना था कि इस स्थल पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी, और बाद में भीड़ को रामलीला मैदान जाने के लिए कहा गया, जिसके बाद जमावड़े को अवैध घोषित कर दिया गया।