तमिलनाडु सरकार डेंगू के संक्रमण को रोकने के लिए नए वैज्ञानिक तरीकों की खोज हेतु विशेष अध्ययन शुरू करने जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री के.जी. अरुणराज ने विधानसभा में इस महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है।
- तमिलनाडु के टेन्कासी जिले के कडायानल्लूर क्षेत्र में तीन क्लस्टर रैंडमाइज्ड नियंत्रित अध्ययन किए जाएंगे।
- अध्ययन में मॉस्किटो रिपेलेंट, प्राकृतिक तेल और वेपोराइजर की प्रभावशीलता जांची जाएगी।
- लगभग 2,880 घरों को इन वैज्ञानिक परीक्षणों में शामिल किया जाएगा।
- इस पूरी परियोजना पर ₹43 लाख का अनुमानित खर्च आएगा।
तमिलनाडु के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के.जी. अरुणराज ने मंगलवार को विधानसभा में घोषणा की कि राज्य सरकार डेंगू के प्रसार को रोकने के लिए नए और वैज्ञानिक तरीकों की पहचान करने हेतु गहन अध्ययन करेगी। यह कदम राज्य में डेंगू के बढ़ते मामलों और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसके गंभीर प्रभाव को देखते हुए उठाया गया है।
यह अध्ययन विशेष रूप से टेन्कासी जिले के कडायानल्लूर क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा, जो वर्तमान में डेंगू के उच्च संक्रमण दर के लिए जाना जाता है। सरकार ने इसे तीन 'क्लस्टर रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड स्टडीज' के रूप में तैयार किया है, ताकि डेटा की सटीकता सुनिश्चित की जा सके।
अध्ययन का मुख्य उद्देश्य
डॉ. अरुणराज के अनुसार, अध्ययन का प्राथमिक लक्ष्य यह पता लगाना है कि क्या त्वचा पर लगाए जाने वाले मॉस्किटो रिपेलेंट, प्राकृतिक तेल (जैसे नींबू यूकेलिप्टस ऑयल) और वेपोराइजर का उपयोग एडेस मच्छरों के काटने से सुरक्षा प्रदान करने में कितना प्रभावी है। इसके साथ ही, यह भी जांचा जाएगा कि क्या इन उपायों के कोई दुष्प्रभाव (side effects) होते हैं।
सामुदायिक स्तर पर मॉस्किटो रिपेलेंट के उपयोग से डेंगू के प्रसार में कमी आती है या नहीं, इसे स्थापित करने के लिए अब तक कोई ठोस फील्ड डेटा उपलब्ध नहीं था।
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि हालांकि व्यक्तिगत स्तर पर रिपेलेंट प्रभावी होते हैं, लेकिन पूरे समुदाय में इनका उपयोग संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में कितना सक्षम है, यह जानना नीति निर्माताओं के लिए अत्यंत आवश्यक है।
डेटा और सांख्यिकीय संदर्भ
तमिलनाडु में डेंगू एक निरंतर चुनौती बना हुआ है। वर्ष 2025 में कुल 25,580 लोग इससे प्रभावित हुए थे, जिनमें 12 मौतें दर्ज की गई थीं। इस वर्ष अब तक 14,581 मामले सामने आ चुके हैं और 9 लोगों की जान जा चुकी है।
| वर्ष | कुल मामले | कुल मौतें |
|---|---|---|
| 2025 | 25,580 | 12 |
| 2026 (अब तक) | 14,581 | 9 |
इस अध्ययन के तहत प्रत्येक अध्ययन में 48 क्लस्टर होंगे और प्रत्येक क्लस्टर में 20 घर होंगे। इस प्रकार, लगभग 2,880 घरों की भागीदारी से प्राप्त परिणामों के आधार पर भविष्य की स्वास्थ्य रणनीतियां तैयार की जाएंगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तमिलनाडु में पिछले कई दशकों से डेंगू एक मौसमी लेकिन घातक समस्या रही है। विभिन्न सरकारों ने स्वच्छता अभियान और कीटनाशक छिड़काव जैसे पारंपरिक उपाय किए हैं, लेकिन मच्छरों के बदलते व्यवहार और शहरीकरण के कारण नए वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
Frequently Asked Questions
1. यह अध्ययन कहां आयोजित किया जा रहा है?
यह अध्ययन तमिलनाडु के टेन्कासी जिले के कडायानल्लूर क्षेत्र में किया जा रहा है।
2. इस शोध का बजट कितना है?
इस वैज्ञानिक अध्ययन के लिए लगभग ₹43 लाख का बजट आवंटित किया गया है।