सामान्य से कम बारिश के बावजूद पटना में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक 'जंक्शन फ्लड' था, जहां कई सहायक नदियां एक साथ उफान पर थीं।

  • पटना की भौगोलिक स्थिति इसे सोन, गंडक और पुनपुन नदियों का संगम स्थल बनाती है।
  • 'जंक्शन फ्लड' तब होता है जब मुख्य नदी के उच्च स्तर के दौरान सहायक नदियां भी उफान पर हों।
  • मुंगेर और भागलपुर में जलस्तर अधिक होने के कारण पानी की निकासी धीमी हो गई।
  • इस बार जलस्तर बढ़ने में सोन नदी की सबसे प्रमुख भूमिका रही।

पटना शहर केवल एक नदी के किनारे नहीं बसा है, बल्कि यह एक हाइड्रोलॉजिकल जंक्शन (संगम बिंदु) पर स्थित है। कुछ ही किलोमीटर के दायरे में गंगा को तीन बड़ी नदियां मिलती हैं: दक्षिण-पश्चिम से सोन, उत्तर से नेपाल के रास्ते गंडक, और दक्षिण-पूर्व से पुनपुन। इसका मतलब है कि पटना में गंगा का स्तर केवल स्थानीय बारिश पर निर्भर नहीं करता, बल्कि कई राज्यों के जलग्रहण क्षेत्रों के पानी का परिणाम होता है।

हाल ही में कम बारिश के बावजूद जलस्तर में वृद्धि को 'जंक्शन फ्लड' कहा गया है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब कई सहायक नदियां एक साथ बढ़ती हैं और मुख्य गंगा नदी पहले से ही उच्च स्तर पर बह रही होती है। बिहार की जमीन लगभग समतल है, जिससे नदी की पानी ले जाने की क्षमता कम हो जाती है। जब पानी का प्रवाह अधिक होता है, तो वह संगम बिंदुओं पर पीछे की ओर दबाव डालता है, जिससे पटना के गेज में अचानक उछाल आता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना शहरी नियोजन और आपदा प्रबंधन की एक बड़ी कमी को उजागर करती है। जब 'निकासी मार्ग' (मुंगेर और भागलपुर की ओर जाने वाला हिस्सा) पहले से ही भरा हो, तो नदी एक बहती धारा के बजाय एक स्थिर झील की तरह व्यवहार करने लगती है। इस 'स्टैकिंग' प्रभाव के कारण दानापुर से फतुहा के बीच पानी जमा हो गया, जिससे शहर के निचले इलाकों में खतरा बढ़ गया।

"किसी एक बिंदु पर जलस्तर बढ़ने के लिए पूरी नदी का उफान पर होना जरूरी नहीं है; बस उस हिस्से में आने वाला पानी वहां से निकलने वाले पानी से अधिक होना चाहिए।"

इस सीजन में सबसे बड़ा योगदान सोन नदी का था। अमरकंटक से निकलने वाली सोन एक पठारी नदी है। 2 सितंबर को इंद्रपुरी बैराज से 563,654 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जो इस सीजन का उच्चतम स्तर था। यह भारी मात्रा में पानी जब पटना पहुंचा, तो गंगा पहले से ही दबाव में थी, जिससे गांधी घाट और दानापुर में रिकॉर्ड स्तर देखे गए।

इसके अलावा, पानी के आगे निकलने का रास्ता भी बंद था। जिस समय पटना में जलस्तर बढ़ रहा था, उसी समय हतिदाह, मुंगेर और भागलपुर के गेज भी खतरे के निशान से ऊपर थे। इस 'बॉटलनेक' प्रभाव के कारण पटना का अतिरिक्त पानी आगे नहीं बढ़ सका और शहर के आसपास जमा होने लगा।

नदीस्रोत/क्षेत्रहालिया वृद्धि में भूमिका
सोनपठार (MP/CG)मुख्य योगदानकर्ता; इंद्रपुरी बैराज से भारी डिस्चार्ज।
गंडकहिमालयी (नेपाल)द्वितीयक दबाव; हाजीपुर में खतरे के निशान से ऊपर।
पुनपुनवर्षा-आधारित (झारखंड)पटना के दक्षिणी निचले इलाकों में दबाव बढ़ाया।
क्या आप जानते हैं?: यमुना के बाद सोन नदी गंगा की दूसरी सबसे बड़ी दक्षिणी सहायक नदी है, जिसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग 69,000 वर्ग किमी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: अगर पटना में बारिश कम थी, तो पानी क्यों बढ़ा?
यह पानी स्थानीय बारिश से नहीं, बल्कि नेपाल, मध्य प्रदेश और झारखंड के जलग्रहण क्षेत्रों से सहायक नदियों के माध्यम से आया था।

प्रश्न 2: 'जंक्शन फ्लड' क्या होता है?
यह वह स्थिति है जब मुख्य नदी के जलस्तर के पहले से अधिक होने पर कई सहायक नदियां एक साथ उसमें मिलती हैं, जिससे पानी का बैकअप हो जाता है।