बिहार सरकार ने राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा उर्दू को बढ़ावा देने के लिए सरकारी कर्मचारियों के लिए एक विशेष 70-दिवसीय ऑनलाइन प्रमाणन पाठ्यक्रम शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में भाषाई समावेशिता को बढ़ाना है।
- सरकारी कर्मचारियों के लिए 70 दिनों का ऑनलाइन उर्दू प्रमाणन पाठ्यक्रम शुरू।
- पाठ्यक्रम 13 अक्टूबर से शुरू होगा, जिसमें सोमवार से गुरुवार तक कक्षाएं चलेंगी।
- बिहार 1981 में उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा बनाने वाला देश का पहला राज्य था।
- हाल ही में 2,000 उर्दू अनुवादकों की नियुक्ति की घोषणा की गई है।
बिहार सरकार ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में भाषाई विविधता और समावेशिता को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। कैबिनेट सचिवालय विभाग के तहत उर्दू निदेशालय ने राज्य सरकार के उन अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक 70-दिवसीय ऑनलाइन उर्दू सीखने का कोर्स लॉन्च किया है, जिन्हें इस भाषा का ज्ञान नहीं है।
इस कार्यक्रम का विवरण देते हुए अतिरिक्त सचिव-सह-निदेशक एस.एम. परवेज आलम ने सभी अतिरिक्त मुख्य सचिवों, जिलाधिकारियों और विभाग प्रमुखों को सूचित किया है कि यह कोर्स 13 अक्टूबर से शुरू होगा। यह प्रशिक्षण सोमवार से गुरुवार तक दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे तक आयोजित किया जाएगा। पाठ्यक्रम के अंत में एक परीक्षा होगी, जिसे पास करने वाले कर्मचारियों को 'उर्दू लर्निंग सर्टिफिकेट' प्रदान किया जाएगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम केवल भाषाई शिक्षा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक प्रशासनिक सुधार है। बिहार में मुस्लिम आबादी लगभग 17 प्रतिशत है, और सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए उर्दू का ज्ञान अनिवार्य हो जाता है। जब सरकारी अधिकारी दूसरी आधिकारिक भाषा में संवाद करने में सक्षम होंगे, तो शासन और जनता के बीच की दूरी कम होगी।
"भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं है, बल्कि शासन में समावेशिता सुनिश्चित करने का एक उपकरण है।"
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जामा खान ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य सरकार सभी समुदायों को समान अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में और अधिक ऑनलाइन और ऑफलाइन पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। यह कदम मार्च में घोषित 2,000 उर्दू अनुवादकों की भर्ती के बाद आया है, जिसे बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) के माध्यम से पूरा किया जाएगा।
ऐतिहासिक रूप से, बिहार ने 1981 में उर्दू को अपनी दूसरी आधिकारिक भाषा घोषित कर एक मिसाल कायम की थी। तब से, राज्य के सभी आधिकारिक गजट और सूचनाएं हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में जारी की जाती हैं। हालांकि, पहले केवल आवासीय प्रशिक्षण दिए जाते थे, लेकिन यह पहली बार है जब बड़े पैमाने पर ऑनलाइन प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है।
| विशेषता | पिछला प्रशिक्षण (2018-19) | नया प्रशिक्षण (2026) |
|---|---|---|
| प्रारूप (Format) | आवासीय (Residential) | ऑनलाइन (Online) |
| अवधि (Duration) | 60 दिन | 70 दिन |
| पहुंच (Reach) | सीमित कर्मचारी | व्यापक सरकारी ढांचा |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: यह उर्दू कोर्स किसके लिए अनिवार्य या उपलब्ध है?
उत्तर: यह कोर्स उन सभी गैर-उर्दू भाषी राज्य सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है जो अपनी प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना चाहते हैं।
प्रश्न 2: कोर्स पूरा करने के बाद कर्मचारियों को क्या लाभ मिलेगा?
उत्तर: सफल उम्मीदवारों को उर्दू लर्निंग सर्टिफिकेट दिया जाएगा, जो उनके आधिकारिक रिकॉर्ड में भाषाई दक्षता के रूप में जोड़ा जाएगा।