पल्लिकरनई कलेक्टिव ने एक विस्तृत 'नागरिक चार्टर' जारी कर मार्शलैंड के प्रबंधन के लिए एक स्वतंत्र अंतर-विभागीय समिति के गठन की मांग की है। रिपोर्ट में सरकारी डेटा को सार्वजनिक न करने और नीतिगत खामियों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

  • पल्लिकरनई कलेक्टिव ने नीतिगत अंतराल को भरने के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ पैनल की मांग की है।
  • तिरुप्पुगझ समिति की 2023 की रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
  • तमिलनाडु में 50 वर्षों से 'फ्लड प्लेन जोनिंग एक्ट' लागू नहीं हुआ है।

चेन्नई के महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र, पल्लिकरनई मार्शलैंड को बचाने के लिए नागरिक समाज, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के एक समूह, जिसे 'पल्लिकरनई कलेक्टिव' कहा जाता है, ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को जारी 'नागरिक चार्टर फॉर पल्लिकरनई वाटरशेड' नामक रिपोर्ट में एक स्वतंत्र अंतर-विभागीय समिति के गठन की पुरजोर मांग की गई है।

यह चार्टर चेन्नई वेटलैंड्स एक्शन कलेक्टिव (CWAC), ऊरवानी फाउंडेशन और फेडरेशन ऑफ ओएमआर रेजिडेंट्स एसोसिएशन (FOMRRA) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया है। इस प्रस्तावित समिति में विषय विशेषज्ञों और जन प्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है, ताकि मार्शलैंड के एकीकृत जल प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक सिफारिशें दी जा सकें और संबंधित विभागों की जवाबदेही तय की जा सके।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि शहरीकरण के दबाव और प्रशासनिक उदासीनता के कारण चेन्नई के प्राकृतिक जल निकासी तंत्र नष्ट हो रहे हैं। यदि पल्लिकरनई मार्शलैंड का सही प्रबंधन नहीं हुआ, तो भविष्य में शहर को और अधिक विनाशकारी बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है। यह केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि चेन्नई की जल सुरक्षा का सवाल है।

रिपोर्ट में तमिलनाडु सरकार की गंभीर प्रशासनिक विफलताओं को उजागर किया गया है। इसमें उल्लेख है कि तमिलनाडु जल नीति, जिसे 1994 में तैयार किया गया था, तब से अपडेट नहीं की गई है। वहीं, 2024 में तैयार की गई नई राज्य जल नीति को अभी तक अधिसूचित (Notify) नहीं किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि केंद्र सरकार द्वारा 1975 में जारी टेम्पलेट के बावजूद, राज्य ने पांच दशकों में 'फ्लड प्लेन जोनिंग एक्ट' लागू नहीं किया है।

"नीतियों का केवल कागजों पर होना और जमीन पर उनका कार्यान्वयन न होना चेन्नई जैसे संवेदनशील तटीय शहरों के लिए एक समय बम की तरह है।"

पारदर्शिता की कमी पर प्रहार करते हुए चार्टर में दावा किया गया है कि तिरुप्पुगझ समिति की अंतिम रिपोर्ट, जिसने 1,189 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और 30 वर्षों के बाढ़ डेटा का अध्ययन किया था, उसे मई 2023 में जमा करने के बावजूद जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसके अलावा, राज्य के जल संसाधन सूचना और प्रबंधन प्रणाली में दर्ज 92,068 टैंकों और 127 जलाशयों का डेटा भी गोपनीय रखा गया है।

कलेक्टिव ने अपनी मांगों में वेटलैंड्स और उनके बाढ़ मैदानों के सीमांकन, मैपिंग और संरक्षण की मांग की है। साथ ही, उन्होंने नहरों की नियमित गाद निकालने (Desilting), सीवेज के प्रवेश को रोकने और पल्लिकरनई रामसर साइट के बफर जोन से अवैध अतिक्रमणों को हटाने की मांग की है।

क्या आप जानते हैं?: पल्लिकरनई मार्शलैंड एक 'रामसर साइट' है, जिसका अर्थ है कि यह अंतरराष्ट्रीय महत्व का एक आर्द्रभूमि क्षेत्र है जिसे वैश्विक स्तर पर संरक्षित किया जाना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: पल्लिकरनई कलेक्टिव की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: उनकी मुख्य मांग एक स्वतंत्र अंतर-विभागीय समिति का गठन है जो नीतिगत खामियों को दूर करे और मार्शलैंड के लिए एक समन्वित कार्यान्वयन योजना तैयार करे।

प्रश्न 2: तिरुप्पुगझ समिति की रिपोर्ट क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: क्योंकि इस रिपोर्ट में 30 वर्षों के बाढ़ डेटा और एक विशाल क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन शामिल है, जो चेन्नई की बाढ़ समस्या को हल करने में मददगार हो सकता है।