प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में CCEA ने भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए आठ प्रमुख मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। यह निवेश दक्षिण और मध्य भारत में माल ढुलाई और यात्री आवाजाही को नई गति प्रदान करेगा।
- ₹20,804 करोड़ के कुल निवेश से 8 नई रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं शुरू होंगी।
- नेटवर्क में कुल 1,196 किलोमीटर की वृद्धि होगी, जिससे हजारों गांवों को सीधा लाभ मिलेगा।
- कुल 74 MTPA की अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने बुधवार को भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सरकार ने कुल ₹20,804 करोड़ की लागत वाली आठ महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनका उद्देश्य रेल नेटवर्क की क्षमता को बढ़ाना और लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार करना है।
इन परियोजनाओं को दो मुख्य समूहों में विभाजित किया गया है। पहले समूह में पांच परियोजनाएं शामिल हैं जो तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना राज्यों में फैली हुई हैं। इनमें अराक्कोनम-रेनिगुंटा (77 किमी), व्हाइटफील्ड-बंगापेट (47 किमी), होसुर-ओमलूर (147 किमी), सेलम-करूर-दिंडीगुल (159 किमी) और सिकंदराबाद-काजीपेट (110 किमी) की लाइनें शामिल हैं। ये परियोजनाएं लगभग 2,121 गांवों और 52 लाख की आबादी को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विस्तार केवल यात्री सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के औद्योगिक गलियारों को मजबूत करने की एक सोची-समझी रणनीति है। कोयला, सीमेंट, लोहा, इस्पात और उर्वरकों जैसे आवश्यक सामानों की ढुलाई के लिए ये मार्ग जीवनरेखा साबित होंगे।
"मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं के माध्यम से क्षमता विस्तार न केवल ट्रेनों की देरी को कम करेगा, बल्कि भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रतिस्पर्धी बनाएगा।"
दूसरे समूह में तीन महत्वपूर्ण परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में लागू की जाएंगी। इनमें खड़गपुर-झारसुगुडा, कटनी-पेंड्रा रोड और बिलासपुर-पेंड्रा रोड की लाइनें शामिल हैं। ये परियोजनाएं लगभग 4,790 गांवों और 56 लाख लोगों के जीवन को प्रभावित करेंगी और 27 MTPA की अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता जोड़ेंगी।
इन परियोजनाओं का एक बड़ा प्रभाव पर्यटन क्षेत्र पर पड़ेगा। तिरुपति, कोडाइकनाल हिल्स, बंदवगढ़ टाइगर रिजर्व और जगन्नाथ मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन राजस्व में भारी वृद्धि होने की संभावना है।
यह पूरी योजना PM-गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना है, ताकि माल और यात्रियों का परिवहन बिना किसी बाधा के हो सके।
| क्षेत्र/समूह | प्रभावित राज्य | लाभान्वित जनसंख्या (लगभग) | अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता |
|---|---|---|---|
| दक्षिण भारत समूह | TN, AP, KA, TS | 52 लाख | 47 MTPA |
| मध्य/पूर्वी समूह | WB, JH, OD, MP, CG | 56 लाख | 27 MTPA |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इन परियोजनाओं से माल ढुलाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: इन परियोजनाओं के पूरा होने से कुल 74 MTPA (मिलियन टन प्रति वर्ष) की अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी, जिससे कोयला और स्टील जैसे सामानों का परिवहन तेज होगा।
प्रश्न 2: कौन से प्रमुख पर्यटन स्थल इससे लाभान्वित होंगे?
उत्तर: तिरुपति, कोडाइकनाल, बंदवगढ़ टाइगर रिजर्व और जगन्नाथ मंदिर जैसे कई प्रमुख स्थल अब रेल नेटवर्क से बेहतर तरीके से जुड़ेंगे।