केंद्र सरकार ने भारतीय रेलवे की क्षमता बढ़ाने के लिए 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को फोर-लेन करने और 3 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इस पहल से दिल्ली-मुंबई सहित प्रमुख रूटों पर ट्रेनों की समयबद्धता और संख्या में भारी वृद्धि होगी।
- 7 हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को फोर-लेन करने की मंजूरी।
- दिल्ली-मुंबई रूट सहित कुल 11,000 किमी लंबे ट्रैक का कायाकल्प।
- 5 राज्यों के 14 जिलों में ₹10,783 करोड़ की लागत से 3 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स।
- लक्ष्य: 2029-30 तक बुनियादी ढांचे का पूर्ण विस्तार।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। सरकार ने देश के सबसे व्यस्त 7 हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को फोर-लेन (चार लाइनों वाला) बनाने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय का प्राथमिक उद्देश्य ट्रेनों की बढ़ती संख्या को संभालना और समय की पाबंदी (punctuality) में सुधार करना है, ताकि यात्रियों को अब ट्रेनों के लेट होने की समस्या से मुक्ति मिल सके।
इस विस्तार योजना में दिल्ली-मुंबई रूट जैसे महत्वपूर्ण गलियारे शामिल हैं। रेलवे के अनुसार, इन रूटों पर ट्रैफिक का दबाव अत्यधिक है, जिसके कारण ट्रेनों के संचालन में बाधा आती है। फोर-लेन ट्रैक बनने से न केवल ट्रेनों की गति बढ़ेगी, बल्कि कनेक्टिविटी भी अधिक तेज होगी। यह विशेष रूप से त्योहारों के दौरान घर जाने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा, क्योंकि रेलवे अब पहले की तुलना में अधिक ट्रेनें चलाने में सक्षम होगा।
क्यों है यह निर्णय महत्वपूर्ण?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारतीय रेलवे का 'गोल्डन क्वाड्रिलैटरल' (दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-मुंबई) देश के कुल रेल ट्रैफिक का लगभग 40% हिस्सा संभालता है। जब तक इन मुख्य धमनियों का विस्तार नहीं होता, तब तक पूरे नेटवर्क की दक्षता नहीं बढ़ सकती। फोर-लेन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से रेलवे अपनी माल ढुलाई और यात्री परिवहन की क्षमता को दोगुना करने की दिशा में अग्रसर है।
"हाई-डेंसिटी कॉरिडोर का विस्तार केवल ट्रैक बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह भारत की आर्थिक गतिशीलता को तेज करने का एक रणनीतिक निवेश है।"
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि कुल 11,000 किलोमीटर लंबे इन 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर पर काम किया जा रहा है। वर्तमान स्थिति यह है कि इनमें से लगभग 2,000 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है, 5,000 किलोमीटर पर काम चल रहा है या मंजूरी मिल चुकी है, और शेष 4,000 किलोमीटर के लिए अंतिम प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा है।
फोर-लेन प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ, कैबिनेट ने 5 राज्यों के 14 जिलों में फैले 3 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को भी हरी झंडी दी है। इन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से रेलवे नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर की अतिरिक्त लंबाई जोड़ी जाएगी। इस विशिष्ट कार्य के लिए ₹10,783 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जिसे वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
| प्रोजेक्ट प्रकार | कुल लंबाई/दायरा | मुख्य उद्देश्य | लक्ष्य/स्थिति |
|---|---|---|---|
| हाई-डेंसिटी कॉरिडोर | 11,000 किमी | ट्रैफिक भीड़ कम करना, समयबद्धता | प्रगति पर/अंतिम मंजूरी |
| मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स | 656 किमी | नेटवर्क विस्तार (14 जिले) | 2029-30 तक पूर्ण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. फोर-लेन ट्रैक से यात्रियों को क्या लाभ होगा?
इससे ट्रेनों की लेट होने की संभावना कम होगी, यात्रा का समय घटेगा और अधिक ट्रेनों का संचालन संभव होगा।
2. मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स की कुल लागत कितनी है?
इन प्रोजेक्ट्स की अनुमानित लागत ₹10,783 करोड़ है।