भाजपा सांसद विक्रमजीत साहनी ने पश्चिम एशिया के संकट के बीच वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए BRICS देशों के बीच सहयोग, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वैकल्पिक व्यापार गलियारों की आवश्यकता पर जोर दिया है।
- BRICS देशों को खाद्य, उर्वरक और ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक 'सेफ्टी नेट' बनाना चाहिए।
- डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की वकालत।
- पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण वैकल्पिक व्यापार मार्गों की खोज अनिवार्य।
- ग्लोबल साउथ के लिए BRICS अब एक अधिक शक्तिशाली और आवश्यक मंच बन गया है।
भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में आने वाले व्यवधानों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि BRICS समूह इस संकट के समय में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच (Safety Net) की भूमिका निभा सकता है, जिससे आवश्यक वस्तुओं जैसे भोजन, उर्वरक और ईंधन का प्रवाह बाधित न हो।
इंडिया टुडे BRICS राउंडटेबल 2026 में बोलते हुए, सांसद साहनी ने रेखांकित किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से शिपिंग में व्यवधान ने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक व्यापार मार्ग कितने संवेदनशील हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि वर्तमान स्थिति में 'सुरंग के अंत में कोई रोशनी नहीं दिख रही है', जिसका अर्थ है कि संकट का समाधान अभी दूर है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the shift towards BRICS as a strategic alternative to Western-led institutions is accelerating. As traditional multilateral agencies appear 'spineless' in the face of geopolitical conflicts, the Global South is looking for a platform that prioritizes mutual economic resilience over political alignment. The inclusion of energy giants like Saudi Arabia and Iran makes BRICS a decisive force in global energy security.
"BRICS को अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे स्पष्ट रूप से शत्रुता के खिलाफ खड़ा होना चाहिए और संवाद के माध्यम से समाधान खोजना चाहिए।"
साहनी ने भारत के 'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का दृष्टिकोण शांति और समृद्धि पर आधारित है। उन्होंने तर्क दिया कि डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम भरी है और सदस्य देशों को स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को तेज करना चाहिए ताकि अमेरिकी डॉलर के उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम हो सके।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे भारत ने जरूरत के समय चीन से उर्वरकों का आयात किया, जो बाजार मूल्य से आधे दाम पर उपलब्ध थे। यह इस बात का प्रमाण है कि BRICS के भीतर सहयोग से किसी एक देश या स्रोत पर निर्भरता कम की जा सकती है।
व्यापार मार्गों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि सऊदी अरब और ईरान के शामिल होने से वैकल्पिक गलियारों (Alternative Corridors) पर चर्चा आसान हो गई है। हालांकि रेड सी (लाल सागर) के मार्ग पर हूतियों के खतरों के कारण सुरक्षा चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन BRICS देशों द्वारा सामूहिक निवेश से नए सुरक्षित मार्ग विकसित किए जा सकते हैं।
अंत में, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि BRICS अब केवल 11 सदस्य देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें लगभग 25 देशों की भागीदारी बढ़ रही है। वैश्विक जनसंख्या का 49% हिस्सा होने के कारण, यह समूह दुनिया की आर्थिक और राजनीतिक दिशा तय करने की क्षमता रखता है।
Frequently Asked Questions
1. BRICS आपूर्ति श्रृंखला को कैसे सुरक्षित कर सकता है?
सदस्य देश वैकल्पिक व्यापार गलियारों का निर्माण करके और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करके बाहरी झटकों और प्रतिबंधों के प्रभाव को कम कर सकते हैं।
2. डॉलर के विकल्प के रूप में स्थानीय मुद्रा व्यापार क्यों जरूरी है?
ताकि वैश्विक आर्थिक संकट या अमेरिकी प्रतिबंधों के दौरान सदस्य देशों का व्यापार बाधित न हो और मुद्रा विनिमय दर स्थिर रहे।