हैदराबाद में मूसी रिवरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के खिलाफ आक्रोश बढ़ गया है। विस्थापित होने वाले परिवारों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने सरकार पर बिना वैज्ञानिक आधार के बफर जोन तय करने और रियल एस्टेट लॉबी को लाभ पहुँचाने का आरोप लगाया है।
- मूसी रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट के कारण सैकड़ों परिवारों के विस्थापन का खतरा।
- विशेषज्ञों ने राजस्व विभाग द्वारा तय किए गए 50 मीटर बफर जोन की वैज्ञानिक वैधता पर सवाल उठाए।
- प्रदर्शनकारियों ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) सार्वजनिक करने और जन-सुनवाई की मांग की।
हैदराबाद के धर्ना चौक, इंदिरा पार्क में गुरुवार को 'मूसी जन आंदोलन' द्वारा आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में स्थानीय निवासियों और विशेषज्ञों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। परियोजना से प्रभावित परिवारों का आरोप है कि सरकार बिना किसी उचित पुनर्वास योजना के उन्हें बेघर करने की तैयारी कर रही है।
एक हृदयविदारक मामले में, 50 वर्षीय मैकेनिकल इंजीनियर मोहम्मद मुस्तफा ने बताया कि उन्होंने 20 साल तक विदेश में कड़ी मेहनत करके बुडवेल की न्यू डिसेंट कॉलोनी में अपना घर बनाया था। उनका घर नदी के हाई फ्लड लेवल से 50 मीटर के दायरे में आने के कारण अधिग्रहित किया जा रहा है। मुस्तफा का तर्क है कि यदि बफर जोन का पालन सख्ती से किया जाता, तो तेलंगाना उच्च न्यायालय जैसी इमारतें, जो नदी के बहुत करीब हैं, पहले ही हटाई जानी चाहिए थीं।
पर्यावरणविद् और सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ दोनथी नरसिम्हा रेड्डी ने परियोजना की तकनीकी खामियों को उजागर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बफर जोन का निर्धारण सिंचाई विभाग जैसे तकनीकी विशेषज्ञों के बजाय राजस्व विभाग द्वारा किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य नदी का संरक्षण नहीं बल्कि रियल एस्टेट माफियाओं को फायदा पहुँचाना है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद केवल भूमि अधिग्रहण का नहीं है, बल्कि शहरी नियोजन में पारदर्शिता की कमी का है। जब सरकारी एजेंसियां बिना सार्वजनिक परामर्श के बड़े बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट शुरू करती हैं, तो यह न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है बल्कि भविष्य में कानूनी जटिलताओं को भी जन्म देता है।
"1990 से मूसी को केवल रियल एस्टेट की नजर से देखा गया है, जिसके कारण यह नदी आज सीवेज और कचरे का ढेर बन चुकी है।"
विरोध प्रदर्शन के दौरान बीआरएस विधायक डी. सुधीर रेड्डी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि नदी के किनारों पर 85% भूमि निजी पट्टा भूमि है। उन्होंने प्रदूषण कम करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और गाद निकालने (desilting) का सुझाव दिया, हालांकि विशेषज्ञों ने पुराने STPs की विफलता का हवाला देते हुए इसे अपर्याप्त बताया।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि नदी का वास्तव में पुनरुद्धार करना है, तो कार्य विकाराबाद से शुरू होना चाहिए और एक एकीकृत 'मूसी रिवर बेसिन अथॉरिटी' का गठन किया जाना चाहिए।
Frequently Asked Questions
1. मूसी जन आंदोलन की मुख्य मांगें क्या हैं?
आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें सार्वजनिक परामर्श आयोजित करना, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को सार्वजनिक करना और प्रदूषकों का स्रोत स्तर पर उपचार करना है।
2. बफर जोन को लेकर विवाद क्या है?
विवाद इस बात पर है कि 50 मीटर का बफर जोन राजस्व विभाग ने तय किया है, जिसे विशेषज्ञ अवैज्ञानिक और रियल एस्टेट हितों से प्रेरित मान रहे हैं।