बेंगलुरु के हेब्बल जंक्शन पर प्रस्तावित शॉर्ट टनल प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरणविदों और शहरी नियोजकों ने चिंता जताई है। 893 पेड़ों की कटाई और झील के अतिक्रमण के कारण इस परियोजना की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

  • ₹1,140 करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट में 893 पेड़ों की कटाई और 3.5 एकड़ झील क्षेत्र का उपयोग होगा।
  • विशेषज्ञों का दावा है कि टनल की लंबाई (2.2 किमी) सतह की सड़क (1.8 किमी) से अधिक है, जिससे इसका तर्क विफल होता है।
  • यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (UAS) के जैव-विविधता वाले हरित क्षेत्र को गंभीर खतरा है।

बेंगलुरु के सबसे व्यस्त ट्रैफिक पॉइंट्स में से एक, हेब्बल जंक्शन के जाम को कम करने के लिए प्रस्तावित हेब्बल शॉर्ट टनल प्रोजेक्ट अब विवादों के घेरे में है। हाल ही में 'कधैगल' बुकस्टोर में आयोजित एक पैनल चर्चा में पर्यावरणविदों, शहरी नियोजकों और स्थानीय नागरिकों ने इस परियोजना की व्यवहार्यता और पारिस्थितिक लागत पर गंभीर सवाल उठाए।

परियोजना के विवरणों का विश्लेषण करते हुए 'सिटिजन्स फॉर सिटिजन्स' के संस्थापक राजकुमार दुगर ने बताया कि आमतौर पर टनल का निर्माण दूरी कम करने या कठिन भौगोलिक क्षेत्रों को पार करने के लिए किया जाता है। हालांकि, इस मामले में टनल की लंबाई 2.2 किमी है, जबकि सतह की सड़क केवल 1.8 किमी है। यह विरोधाभास इस प्रोजेक्ट के बुनियादी तर्क को कमजोर करता है।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह प्रोजेक्ट केवल एक इंजीनियरिंग समाधान नहीं, बल्कि एक पारिस्थितिक जोखिम है। बेंगलुरु जैसे शहर में, जहाँ जल स्तर गिर रहा है और हरित क्षेत्र सिमट रहे हैं, झील के 3.5 एकड़ हिस्से का उपयोग करना आत्मघाती हो सकता है। यह परियोजना शहरी विकास और प्रकृति के बीच के गहरे संघर्ष को दर्शाती है।

जल विज्ञान विशेषज्ञ शशांक पालुर ने चेतावनी दी कि बेंगलुरु की झीलें एक 'कैस्केडिंग सिस्टम' (एक से दूसरी झील में बहने वाली प्रणाली) का हिस्सा हैं। हेब्बल झील के साथ छेड़छाड़ से न केवल स्थानीय जलभृत (aquifers) प्रभावित होंगे, बल्कि नागवारा झील और मन्यता टेक पार्क जैसे क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ जाएगा।

"पेड़ों का प्रत्यारोपण (Transplantation) केवल एक दिखावा है; वास्तव में इसकी सफलता दर बेहद कम है और यह प्राकृतिक जैव-विविधता का विकल्प नहीं हो सकता।"

पारिस्थितिकीविद् हरीशा ए.एस. ने यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (UAS) परिसर पर पड़ने वाले प्रभाव पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि यह परिसर उत्तर बेंगलुरु के उन अंतिम बचे हुए क्षेत्रों में से एक है जहाँ घास के मैदान, आर्द्रभूमि और घने जंगल एक साथ मौजूद हैं। 893 पेड़ों की कटाई इस नाजुक संतुलन को पूरी तरह नष्ट कर देगी।

इसके अलावा, चर्चा में यह बात भी सामने आई कि टनल में चार तीव्र मोड़ (sharp curves) होंगे, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही, वेंटिलेशन की कमी के कारण टनल के भीतर वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन सकता है। नागरिकों ने तर्क दिया कि यदि सार्वजनिक परिवहन और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी में सुधार किया जाए, तो टनल जैसे महंगे और विनाशकारी विकल्पों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

क्या आप जानते हैं?: बेंगलुरु की झीलें प्राचीन काल से एक परस्पर जुड़े तंत्र के रूप में विकसित हुई हैं, जहाँ एक झील का ओवरफ्लो अगली झील को भरता है, जिससे पूरे शहर का जल स्तर बना रहता है।

प्रश्न 1: हेब्बल शॉर्ट टनल प्रोजेक्ट की कुल लागत क्या है?
उत्तर: इस प्रस्तावित परियोजना की अनुमानित लागत ₹1,140 करोड़ है।

प्रश्न 2: पर्यावरणविदों की मुख्य चिंता क्या है?
उत्तर: मुख्य चिंताएं 893 पेड़ों की कटाई, हेब्बल झील के 3.5 एकड़ क्षेत्र का उपयोग और UAS परिसर की जैव-विविधता का नुकसान है।