द हिंदू की रिपोर्ट के बाद सेलम कॉर्पोरेशन ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर पार्षदों के नाम, फोटो और संपर्क विवरण वापस जोड़ दिए हैं। पिछले दो महीनों से यह महत्वपूर्ण जानकारी गायब थी, जिससे जनता को भारी परेशानी हो रही थी।

  • सेलम कॉर्पोरेशन की वेबसाइट पर 60 पार्षदों के विवरण बहाल किए गए।
  • पिछले दो महीनों से वेबसाइट पर केवल स्थानांतरित अधिकारियों के नाम दिख रहे थे।
  • द हिंदू की रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की।

तमिलनाडु के सेलम कॉर्पोरेशन की आधिकारिक वेबसाइट (www.salemcorporation.gov.in) पर एक गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक चूक के बाद अब स्थिति सामान्य हो गई है। गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को प्रशासन ने मेयर ए. रामचंद्रन और डिप्टी मेयर एम. शारदा देवी सहित सभी 60 पार्षदों के नाम, फोटोग्राफ, पते और मोबाइल नंबरों को पुनः वेबसाइट पर प्रदर्शित करना शुरू कर दिया है।

यह मामला तब सामने आया जब यह देखा गया कि पिछले दो महीनों से वेबसाइट से जनप्रतिनिधियों का डेटा हटा दिया गया था। हैरानी की बात यह थी कि जब नागरिक अपने वार्ड के पार्षदों की तलाश कर रहे थे, तो उन्हें उन अधिकारियों के नाम और संपर्क विवरण मिल रहे थे जिनका तबादला अन्य जिलों में हो चुका था। इस विसंगति के कारण आम जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच संचार पूरी तरह बाधित हो गया था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घटना डिजिटल गवर्नेंस में जवाबदेही की कमी को दर्शाती है। जब एक नगर निगम अपनी वेबसाइट से निर्वाचित प्रतिनिधियों का विवरण हटा देता है, तो यह न केवल पारदर्शिता का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक पहुंच को भी बाधित करता है। यह दर्शाता है कि कैसे एक छोटी सी प्रशासनिक लापरवाही नागरिकों और उनके प्रतिनिधियों के बीच की कड़ी को तोड़ सकती है।

"डिजिटल युग में सरकारी वेबसाइटें केवल सूचना का स्रोत नहीं, बल्कि जवाबदेही का माध्यम हैं; इनका रखरखाव अनिवार्य है।"

डीएमके पार्षद ईसन डी. एलंगो (वार्ड 34) ने इस मुद्दे को उजागर करने के लिए 'द हिंदू' का आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि परिषद के कार्यकाल का एक दिन भी शेष हो, तो जनप्रतिनिधियों का विवरण वेबसाइट पर होना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी त्रुटि न हो।

ऐतिहासिक रूप से, सेलम कॉर्पोरेशन तमिलनाडु के प्रमुख शहरी निकायों में से एक रहा है। वेबसाइट का सही संचालन यह सुनिश्चित करता है कि वार्ड स्तर पर बुनियादी सुविधाओं, जैसे सड़क, पानी और स्वच्छता की समस्याओं के लिए नागरिक सीधे अपने प्रतिनिधियों से संपर्क कर सकें।

क्या आप जानते हैं?: भारत में नगर निगमों की आधिकारिक वेबसाइटें 'डिजिटल इंडिया' पहल का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को पारदर्शी और सुलभ बनाना है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: वेबसाइट से पार्षदों का विवरण कितने समय तक गायब था?
उत्तर: यह विवरण पिछले दो महीनों से वेबसाइट से हटा हुआ था।

प्रश्न 2: इस मुद्दे का समाधान कैसे हुआ?
उत्तर: 'द हिंदू' समाचार पत्र द्वारा इस मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित करने के बाद प्रशासन ने इसे ठीक किया।