एक विशेष जांच में खुलासा हुआ है कि गुजरात की कई गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों ने करोड़ों रुपये का चंदा इकट्ठा किया, जबकि उनके कार्यालय बंद हैं और चुनावी भागीदारी नगण्य है।
- गुजरात की गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों ने 2019-2024 के बीच ₹2,000 करोड़ से अधिक का चंदा प्राप्त किया।
- भारतीय राष्ट्रीय जनता दल और न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी जैसे संगठनों ने सबसे अधिक राशि जुटाई।
- जमीनी जांच में पाया गया कि अधिकांश पार्टियों के कार्यालय बंद हैं और वे केवल कागजों पर अस्तित्व में हैं।
एक चौंकाने वाली विशेष जांच में यह सामने आया है कि गुजरात में पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों ने 2019 और 2024 के बीच 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का चंदा इकट्ठा किया है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा विश्लेषण किए गए आंकड़ों के आधार पर, यह खुलासा चुनावी फंडिंग में एक गहरे संकट और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग की ओर इशारा करता है।
जांच के दौरान गुजरात, दिल्ली, बिहार और मध्य प्रदेश में जमीनी स्तर पर सत्यापन किया गया, जिससे पता चला कि इनमें से कई पार्टियां वास्तव में सक्रिय नहीं हैं। उदाहरण के लिए, भारतीय राष्ट्रीय जनता दल ने 957.44 करोड़ रुपये प्राप्त किए, जबकि न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी ने 600 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए। हैरानी की बात यह है कि अहमदाबाद में न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी का पंजीकृत कार्यालय पूरी तरह बंद था और वहां कोई साइनबोर्ड तक नहीं था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल चुनावी फंडिंग का नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक आड़ में वित्तीय अनियमितताओं का एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है। जब पार्टियां चुनाव नहीं लड़तीं या न्यूनतम वोट प्राप्त करती हैं, लेकिन करोड़ों का चंदा लेती हैं, तो यह सीधे तौर पर कर चोरी और काले धन को सफेद करने की रणनीति की ओर संकेत करता है।
गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों के माध्यम से इस तरह का भारी फंड संग्रह भारतीय चुनावी वित्त प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर करता है।
एक अन्य उदाहरण सत्यवादी रक्षक पार्टी का है, जिसने 2023-24 में 330 करोड़ रुपये से अधिक एकत्र किए, लेकिन वडोदरा से केवल एक उम्मीदवार उतारा जो अंतिम स्थान पर रहा। यह पार्टी आनंद के एक बंद फ्लैट से संचालित हो रही थी। इसी तरह, आम जनमत पार्टी (₹220 करोड़) और सौराष्ट्र जनता पक्ष (₹200 करोड़) के कार्यालय भी बंद पाए गए।
ऐतिहासिक संदर्भ
भारत में राजनीतिक दलों को मिलने वाला चंदा अक्सर पारदर्शिता की कमी का शिकार रहा है। पिछले दशक में, चुनावी बॉन्ड और गैर-मान्यता प्राप्त दलों के माध्यम से फंडिंग के तरीकों ने चुनाव आयोग और आयकर विभाग के लिए बड़ी चुनौतियां पेश की हैं। ऐसी 'कागजी' पार्टियों का उदय अक्सर कॉर्पोरेट टैक्स छूट का लाभ उठाने के लिए किया जाता है।
| पार्टी का नाम | प्राप्त चंदा (लगभग) | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| भारतीय राष्ट्रीय जनता दल | ₹957.44 करोड़ | संदिग्ध/कागजी |
| न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी | ₹600 करोड़+ | कार्यालय बंद |
| सत्यवादी रक्षक पार्टी | ₹330 करोड़ | न्यूनतम चुनावी भागीदारी |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी क्या होती है?
उत्तर: यह वह पार्टी होती है जो चुनाव आयोग में पंजीकृत तो होती है, लेकिन किसी भी चुनाव में न्यूनतम वोट प्रतिशत या सीटें जीतने में विफल रहती है।
प्रश्न 2: इन पार्टियों को इतना चंदा क्यों मिल रहा है?
उत्तर: आशंका है कि इनका उपयोग टैक्स बचाने या अवैध धन को वैध बनाने के लिए किया जा रहा है।