तमिलनाडु के कोयंबटूर में लंबे समय से लंबित सिंगनल्लूर फ्लाईओवर का काम आखिरकार शुरू हो गया है। ₹170 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से शहर की ट्रैफिक समस्या का समाधान होगा।

  • सिंगनल्लूर फ्लाईओवर के लिए मिट्टी परीक्षण (soil testing) का काम शुरू।
  • कुल परियोजना लागत ₹170 करोड़, जिसमें निर्माण व्यय ₹114 करोड़ है।
  • 2.4 किमी लंबा चार-लेन फ्लाईओवर और सर्विस रोड का निर्माण होगा।
  • परियोजना को पूरा करने की समयसीमा दो वर्ष निर्धारित की गई है।

कोयंबटूर शहर के बुनियादी ढांचे में एक बड़ा सुधार करते हुए, राज्य राजमार्ग विभाग ने सिंगनल्लूर में बहुप्रतीक्षित फ्लाईओवर के निर्माण के लिए प्रारंभिक तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने संबंधित ठेकेदार को कार्य आदेश (work order) जारी कर दिया है, और वर्तमान में निर्माण स्थल पर मिट्टी के परीक्षण का कार्य चल रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, मिट्टी के परीक्षण के परिणामों के आधार पर ठेकेदार एक विस्तृत डिजाइन प्रस्तुत करेगा। विभाग द्वारा इस डिजाइन के अनुमोदन के बाद ही वास्तविक निर्माण कार्य शुरू होगा। यह पूरी प्रक्रिया अगले दो महीनों में पूरी होने की उम्मीद है, जिसके बाद औपचारिक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, सिंगनल्लूर क्षेत्र कोयंबटूर के सबसे व्यस्त ट्रैफिक जंक्शनों में से एक रहा है। पिछले पांच वर्षों से यह परियोजना लंबित थी, जिससे स्थानीय निवासियों और यात्रियों को भारी जाम का सामना करना पड़ रहा था। इस फ्लाईओवर का निर्माण न केवल यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि शहर की आर्थिक गतिविधियों को भी गति प्रदान करेगा।

"शहरी बुनियादी ढांचे में देरी अक्सर भूमि अधिग्रहण और डिजाइन मंजूरी के कारण होती है, लेकिन इस परियोजना की वर्तमान गति संकेत देती है कि प्रशासन अब इसे प्राथमिकता दे रहा है।"

परियोजना के तकनीकी विवरणों की बात करें तो, यह एक चार-लेन फ्लाईओवर होगा जिसकी कुल लंबाई 2.4 किलोमीटर होगी। इसके साथ ही सर्विस रोड का भी निर्माण किया जाएगा। विभाग ने बताया कि सर्विस लेन के लिए लगभग 1,500 वर्ग मीटर अतिरिक्त भूमि के अधिग्रहण की आवश्यकता है, जिसे अगले दो महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

विवरण परियोजना विवरण
कुल बजट ₹170 करोड़
निर्माण लागत ₹114 करोड़
फ्लाईओवर लंबाई 2.4 किमी
समय सीमा 2 वर्ष

ऐतिहासिक रूप से, सिंगनल्लूर फ्लाईओवर कोयंबटूर के नागरिकों के लिए एक 'मांग पत्र' बन गया था। बार-बार के आश्वासनों के बावजूद, प्रशासनिक बाधाओं के कारण यह काम शुरू नहीं हो पाया था। अब, मिट्टी परीक्षण और वर्क ऑर्डर के साथ, यह प्रोजेक्ट वास्तव में जमीन पर उतरता दिख रहा है।

क्या आप जानते हैं?: कोयंबटूर को 'दक्षिण भारत का मैनचेस्टर' कहा जाता है, और इसकी तेजी से बढ़ती औद्योगिक आबादी के कारण यहाँ उन्नत फ्लाईओवर नेटवर्क की सख्त जरूरत है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: सिंगनल्लूर फ्लाईओवर को पूरा होने में कितना समय लगेगा?
उत्तर: राजमार्ग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य पूरा होने में लगभग दो साल का समय लगेगा।

प्रश्न 2: क्या इस प्रोजेक्ट के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता है?
उत्तर: नहीं, अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता न्यूनतम है (लगभग 1,500 वर्ग मीटर), जिसे सर्विस रोड के लिए उपयोग किया जाएगा।