केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने इडुक्की के एक वेस्ट प्लांट में जहरीली गैस से मारे गए तीन तमिलनाडु के श्रमिकों के परिवारों के लिए तत्काल अधिकतम वित्तीय सहायता की मांग की है।
- KSHRC ने जहरीली गैस से मारे गए तीन तमिलनाडु निवासियों के लिए अधिकतम मुआवजे का आदेश दिया।
- मुख्य सचिव को मुख्यमंत्री संकट राहत कोष (CMDRF) से सहायता राशि जारी करने का निर्देश।
- घटना अक्टूबर 2025 में कट्टपना के एक होटल के वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में हुई थी।
- कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत कानूनी सहायता प्रदान करने का निर्देश।
केरल राज्य मानवाधिकार आयोग (KSHRC) ने एक कार्यस्थल त्रासदी के संबंध में कड़ा रुख अपनाया है जिसमें तीन प्रवासी श्रमिकों की जान चली गई थी। आयोग के अध्यक्ष अलेक्जेंडर थॉमस ने एक आदेश में केरल राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इडुक्की के कट्टपना में एक वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में हुई घटना के पीड़ितों के परिवारों को अधिकतम संभव वित्तीय सहायता सुनिश्चित की जाए।
यह दुखद घटना 1 अक्टूबर, 2025 को हुई थी, जब तमिलनाडु के तीन श्रमिक—जयरामन, माइकल और सुंदरपंडियन—एक होटल के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के अंदर काम कर रहे थे। वहां जमा जहरीली गैसों के कारण वे बेहोश हो गए और उनकी मृत्यु हो गई। यह घटना अपशिष्ट प्रबंधन में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षा मानकों की भारी कमी को उजागर करती है।
KSHRC ने मुख्य सचिव को विशेष निर्देश दिए हैं कि यदि प्रभावित परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, तो मुख्यमंत्री संकट राहत कोष (CMDRF) से अधिकतम पात्र सहायता राशि तुरंत स्वीकृत की जाए। इसके अलावा, इडुक्की कलेक्टर और जिला श्रम अधिकारी को कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने का निर्देश दिया गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला हॉस्पिटैलिटी और वेस्ट मैनेजमेंट सेक्टर में प्रवासी मजदूरों के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल की प्रणालीगत विफलता को दर्शाता है। KSHRC का हस्तक्षेप इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न्याय पाने का बोझ पीड़ित परिवारों से हटाकर राज्य मशीनरी पर डालता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कानूनी सहायता के माध्यम से मुआवजा मिले।
"सीवेज प्लांटों में सुरक्षा उपकरणों और वेंटिलेशन की कमी एक बार-बार होने वाला मानवाधिकार उल्लंघन है, जिसके लिए कॉर्पोरेट जवाबदेही अनिवार्य है।"
यह मामला नई दिल्ली स्थित सफाई कर्मचारी और मदुरै स्थित श्रेष्ठ द्वारा दायर याचिकाओं के माध्यम से आयोग तक पहुँचा। हालांकि याचिकाकर्ता मृतक के प्रत्यक्ष आश्रित नहीं थे, लेकिन अध्यक्ष अलेक्जेंडर थॉमस ने स्पष्ट किया कि आयोग ने इस मामले को 'जनहित' में उठाया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत में वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट और सीवेज सिस्टम ऐतिहासिक रूप से जहरीली गैसों, मुख्य रूप से हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) और मीथेन के कारण घातक साबित हुए हैं। कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के अस्तित्व के बावजूद, कई प्रवासी श्रमिक अपने अधिकारों से अनजान रहते हैं, जिससे उनकी मृत्यु के बाद उनके परिवार आर्थिक संकट में फंस जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. इडुक्की जहरीली गैस घटना के पीड़ित कौन थे?
पीड़ित तमिलनाडु के तीन श्रमिक थे जिनके नाम जयरामन, माइकल और सुंदरपंडियन थे।
2. CMDRF क्या है?
मुख्यमंत्री संकट राहत कोष एक राज्य-प्रबंधित कोष है जिसका उपयोग प्राकृतिक आपदाओं और अप्रत्याशित त्रासदियों के पीड़ितों को तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए किया जाता है।