मीरा रोड के सेवन स्क्वायर एकेडमी ने पर्युषण पर्व के दौरान छात्रों के टिफिन से प्याज और लहसुन हटाने का आदेश दिया था, जिस पर राजनीतिक विवाद होने के बाद स्कूल प्रबंधन ने अपना फैसला वापस ले लिया है।
- सेवन स्क्वायर एकेडमी ने पर्युषण पर्व के दौरान 'कंद-मूल' (प्याज, लहसुन, आलू) प्रतिबंधित करने का सर्कुलर जारी किया था।
- शिव सेना (UBT) और MNS सहित विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसे धर्म का थोपा जाना और 'फतवा' करार दिया।
- राजनीतिक दबाव और शिक्षा विभाग की संभावित कार्रवाई के बाद स्कूल ने सर्कुलर वापस ले लिया।
महाराष्ट्र के मीरा रोड ईस्ट स्थित सेवन स्क्वायर एकेडमी एक गंभीर विवाद के केंद्र में आ गई है। स्कूल प्रबंधन, जो भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता की पत्नी द्वारा संचालित है, ने 8 सितंबर को एक निर्देश जारी किया था जिसमें अभिभावकों से अनुरोध किया गया था कि वे पर्युषण पर्व (8 से 16 सितंबर) के दौरान बच्चों के टिफिन में प्याज, लहसुन और आलू जैसे 'कंद-मूल' खाद्य पदार्थों को शामिल न करें।
स्कूल ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस अवधि के दौरान स्कूल की कैंटीन में भी केवल सात्विक भोजन परोसा जाएगा। हालांकि, इस कदम को जल्द ही एक धार्मिक थोपे गए नियम के रूप में देखा गया, जिससे राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।
क्यों बढ़ा विवाद?
इस सर्कुलर का कड़ा विरोध शिव सेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) द्वारा किया गया। MNS के छात्र विंग के अध्यक्ष रॉबर्ट डी'सूजा ने इसे 'शर्मनाक' बताते हुए शिक्षा विभाग से स्कूल का लाइसेंस रद्द करने की मांग की। उनका तर्क था कि स्कूल एक धर्मनिरपेक्ष स्थान होना चाहिए जहाँ बच्चे एक-दूसरे की संस्कृति से सीखें, न कि किसी एक धर्म के नियमों का पालन करने के लिए मजबूर किए जाएं।
वहीं, शिव सेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने इस मुद्दे को अत्यंत गंभीर बताते हुए सवाल किया कि क्या अब यह तय किया जाएगा कि मुंबई में रहने वाले लोग क्या खाएंगे और क्या नहीं। पूर्व मंत्री और शिव सेना नेता प्रतीक सराइक ने इस सर्कुलर की तुलना 'फतवे' से की और कहा कि लोकतंत्र में राजनीति और धर्म का प्रवेश शैक्षणिक संस्थानों में नहीं होना चाहिए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घटना भारत के शैक्षणिक संस्थानों में धर्मनिरपेक्षता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच के तनाव को उजागर करती है। जब निजी संस्थान धार्मिक मान्यताओं को अनिवार्य या 'अनुरोध' के रूप में लागू करते हैं, तो यह अक्सर संवैधानिक मूल्यों और विविधता के सिद्धांतों से टकराता है। यह मामला यह भी दर्शाता है कि महाराष्ट्र में शैक्षणिक मुद्दे कितनी जल्दी राजनीतिक हथियार बन जाते हैं।
"शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी प्रकार का धार्मिक आग्रह, चाहे वह सात्विक भोजन के नाम पर हो, छात्रों की विविधता और व्यक्तिगत पसंद के अधिकार का उल्लंघन है।"
दूसरी ओर, विधायक नरेंद्र मेहता ने बचाव करते हुए कहा कि स्कूल का उद्देश्य केवल पवित्र वातावरण बनाए रखना था और किसी पर कोई दबाव नहीं था। उन्होंने इसे केवल एक 'अनुरोध' बताया। हालांकि, मीडिया और राजनीतिक दबाव के आगे झुकते हुए स्कूल प्रशासन ने सर्कुलर को हटा दिया है।
Frequently Asked Questions
1. स्कूल ने सर्कुलर क्यों जारी किया था?
स्कूल ने जैन धर्म के पर्युषण पर्व के दौरान पवित्रता बनाए रखने के लिए छात्रों से प्याज, लहसुन और आलू न लाने का अनुरोध किया था।
2. राजनीतिक दलों ने इसका विरोध क्यों किया?
विपक्ष का आरोप था कि स्कूल एक धर्मनिरपेक्ष स्थान है और वहां किसी विशेष धर्म की प्रथाओं को थोपना गलत है।