मेघालय उच्च न्यायालय ने पाया कि 17 विदेशी नागरिक अपनी सजा पूरी करने के बावजूद शिलॉन्ग जिला जेल में बंद हैं। इनमें एक म्यांमार नागरिक पिछले 10 वर्षों से कैद है, जबकि अन्य बांग्लादेशी और नाइजीरियाई नागरिक महीनों से वहां फंसे हुए हैं।

  • 17 विदेशी नागरिक सजा पूरी होने के बाद भी मेघालय की जेलों में बंद पाए गए।
  • एक म्यांमार नागरिक पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से अवैध रूप से कैद है।
  • राज्य में आधिकारिक 'डिटेंशन सेंटर' (नजरबंदी केंद्र) की अनुपस्थिति को इस संकट का मुख्य कारण बताया गया है।
  • उच्च न्यायालय ने मुआवजे की संभावना पर विचार करने की बात कही है।

गुवाहाटी: मेघालय उच्च न्यायालय ने एक चौंकाने वाले खुलासे में पाया है कि 17 विदेशी नागरिक अपनी निर्धारित सजा पूरी करने के बाद भी राज्य की जेलों में बंद हैं। न्यायालय द्वारा नियुक्त एक विशेष टीम ने जब शिलॉन्ग जिला जेल का दौरा किया, तो पाया कि इनमें से 15 बांग्लादेशी नागरिक, एक नाइजीरियाई और एक म्यांमार का नागरिक है। सबसे भयावह तथ्य यह है कि म्यांमार का वह नागरिक पिछले एक दशक से अधिक समय से जेल की सलाखों के पीछे है।

मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति वनलुरा डेंगडोह की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। न्यायालय ने अतिरिक्त महाधिवक्ता खालिद खान को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्होंने जेलों और कैदियों की स्थिति के बारे में "पूरी तरह से भ्रामक और गलत" जानकारी प्रदान की थी।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this case highlights a systemic failure in the intersection of criminal justice and immigration law in India. When a foreign national completes a sentence, they cannot be simply released into the community if they lack legal residency; however, keeping them in a penal institution is a violation of fundamental human rights. The lack of designated detention centers creates a legal vacuum where 'process becomes the punishment'.

"Detaining individuals beyond their judicial sentence is a grave violation of Article 21 of the Indian Constitution, regardless of their nationality."

राज्य के जेल महानिदेशक (IG Prisons) ने अदालत को सूचित किया कि मेघालय में कोई भी आधिकारिक डिटेंशन सेंटर नहीं है, जिसके कारण इन विदेशी नागरिकों को जेल में ही रखा गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार, सजा पूरी होने के बाद विदेशी नागरिकों को किसी अस्थायी सुविधा में स्थानांतरित किया जाना चाहिए था, न कि उन्हें अपराधी की तरह जेल में रखा जाना चाहिए।

अदालत ने अब अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द यह बताएं कि एक उचित डिटेंशन सेंटर स्थापित होने तक किस स्थान को अस्थायी केंद्र के रूप में नामित किया जा सकता है। साथ ही, न्यायालय ने कहा कि उन सभी व्यक्तियों के लिए मुआवजे पर विचार किया जाएगा जिन्हें सजा की अवधि से अधिक समय तक कैद में रखा गया है।

राष्ट्रीयताकैदियों की संख्याअतिरिक्त कैद की अवधि
बांग्लादेशी156 महीने से 2 वर्ष
म्यांमार110 वर्ष से अधिक
नाइजीरियाई16 महीने से 2 वर्ष
क्या आप जानते हैं?: अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, किसी भी विदेशी नागरिक को उसकी कानूनी सजा पूरी होने के बाद बिना किसी वैध आधार के हिरासत में रखना मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: विदेशी नागरिकों को सजा पूरी होने के बाद भी जेल में क्यों रखा गया?
उत्तर: मेघालय सरकार के अनुसार, राज्य में कोई आधिकारिक डिटेंशन सेंटर नहीं है, जिसके कारण उन्हें रिहा करने के बाद रखने के लिए कोई कानूनी स्थान उपलब्ध नहीं था।

प्रश्न 2: उच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या निर्देश दिए हैं?
उत्तर: न्यायालय ने सरकार को जल्द से जल्द एक डिटेंशन सेंटर नामित करने का निर्देश दिया है और अवैध रूप से कैद रखे गए लोगों के मुआवजे पर विचार करने की बात कही है।