नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में लापता 30 गुजरातियों की पहचान के लिए गुजरात सरकार ने उनके परिजनों के डीएनए नमूने एकत्र करना शुरू कर दिया है। यह प्रक्रिया छह प्रमुख प्रयोगशालाओं में मुफ्त संचालित की जा रही है।

  • लापता 30 लोगों में से 29 के परिजनों ने डीएनए नमूने प्रदान किए हैं।
  • गांधीनगर, अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, जूनागढ़ और राजकोट की प्रयोगशालाओं में प्रोफाइलिंग जारी।
  • प्रक्रिया केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशानुसार पूरी तरह निशुल्क है।
  • नेपाल-तिब्बत सीमा और भोटे कोशी नदी क्षेत्र से बरामद अवशेषों का मिलान किया जाएगा।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद लापता हुए गुजरात के नागरिकों की तलाश अब एक महत्वपूर्ण फोरेंसिक चरण में पहुंच गई है। गुजरात सरकार ने लापता व्यक्तियों की पहचान स्थापित करने के लिए उनके प्रथम-श्रेणी के रिश्तेदारों की डीएनए प्रोफाइलिंग शुरू की है। सरकार के अनुसार, अब तक 30 लापता लोगों में से 29 के परिजनों ने अपने नमूने जमा कर दिए हैं।

इस व्यापक अभियान के लिए राज्य के छह नामित प्रयोगशालाओं—गांधीनगर, अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, जूनागढ़ और राजकोट—को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह पूरी प्रक्रिया केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के तहत मुफ्त में की जा रही है, ताकि आर्थिक तंगी किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन की पहचान में बाधा न बने।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the transition to DNA profiling indicates that conventional identification methods (such as visual or document-based) have failed due to the severity of the flash floods. This move underscores the necessity of international forensic cooperation during cross-border disasters to provide closure to grieving families.

"DNA profiling is the gold standard for identification in mass casualty events where remains are severely damaged, ensuring absolute scientific certainty for the families involved."

लापता लोगों की सूची में गैर-निवासी गुजराती (NRIs) भी शामिल हैं, जिनमें से कई लोग विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। प्रभावित लोगों का संबंध अहमदाबाद, आनंद, बनासकांठा, खेड़ा, गांधीनगर, सूरत, वलसाड और राजकोट जैसे विभिन्न जिलों से है।

इस अभियान का मुख्य केंद्र नेपाल-तिब्बत सीमा और भोटे कोशी नदी का गलियारा है, जहाँ अगस्त 26 को आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। गुजरात राज्य गैर-निवासी गुजराती फाउंडेशन (NRGF) इस पूरी प्रक्रिया का समन्वय कर रहा है, जिसमें न्यूजीलैंड, अमेरिका, कनाडा और अफ्रीकी देशों में रहने वाले रिश्तेदारों से भी संपर्क किया जा रहा है।

तकनीकी स्तर पर, नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU), गांधीनगर, विदेश मंत्रालय (MEA) के साथ मिलकर काम कर रही है। एकत्र किए गए नमूनों की रिपोर्ट सीधे नेपाल सरकार को आधिकारिक ईमेल के माध्यम से भेजी जा रही है।

क्या आप जानते हैं?: गुजरात ने इससे पहले जून 2025 के अहमदाबाद एयर इंडिया क्रैश के दौरान भी 260 पीड़ितों की पहचान के लिए इसी तरह के व्यापक डीएनए परीक्षण का उपयोग किया था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: डीएनए नमूने कहाँ एकत्र किए जा रहे हैं?
उत्तर: नमूने गांधीनगर, अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, जूनागढ़ और राजकोट की निर्दिष्ट प्रयोगशालाओं में एकत्र किए जा रहे हैं।

प्रश्न 2: क्या इस प्रक्रिया के लिए कोई शुल्क लिया जा रहा है?
उत्तर: नहीं, गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशानुसार यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से निशुल्क है।