इंडिया टुडे ग्लोबल आज तक BRICS राउंडटेबल में सैन्य नेतृत्व ने भू-राजनीतिक सुरक्षा, चीन के साथ संबंधों और समुद्री सुरक्षा पर गहन चर्चा की। एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि शांति का मार्ग रणनीतिक शक्ति से होकर गुजरता है।

  • शांति की स्थापना के लिए रणनीतिक शक्ति का होना अनिवार्य है।
  • BRICS एक सैन्य गठबंधन नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक बहुपक्षीय मंच है।
  • भारत-रूस रक्षा संबंध अपनी मजबूत रणनीतिक नींव पर टिके हुए हैं।

इंडिया टुडे ग्लोबल आज तक BRICS राउंडटेबल के दौरान, पूर्व वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर.के.एस. भदौरिया और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के इर्द-गिर्द भू-राजनीतिक सुरक्षा, रक्षा कूटनीति और आर्थिक लचीलेपन का विश्लेषण किया। इस उच्च स्तरीय चर्चा में वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और भारत की रणनीतिक स्थिति पर विस्तार से बात की गई।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में बात करते हुए, एयर चीफ मार्शल भदौरिया ने उल्लेख किया कि उच्च स्तरीय वार्ताएं सीधे तौर पर द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीमा पर शांति के लिए राजनयिक और सैन्य दोनों स्तरों पर समन्वय आवश्यक है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत अब रक्षा कूटनीति में केवल प्रतिक्रियावादी नहीं, बल्कि सक्रिय भूमिका निभा रहा है। 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत आपूर्ति श्रृंखला के स्थानीयकरण और रक्षा निर्यात पर जोर देना यह दर्शाता है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत कर रहा है ताकि भविष्य के वैश्विक संकटों का सामना किया जा सके।

शांति का मार्ग अभी भी शक्ति के माध्यम से ही गुजरता है; बिना सामर्थ्य के शांति केवल एक अस्थायी समझौता है।

एडमिरल त्रिपाठी ने BRICS की प्रकृति को स्पष्ट करते हुए इसे एक सैन्य गठबंधन के बजाय एक व्यावहारिक बहुपक्षीय मंच बताया। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। पैनल ने वैश्विक व्यापार के महत्वपूर्ण बिंदुओं, जैसे हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ऊर्जा सुरक्षा जोखिमों पर भी चिंता व्यक्त की।

चर्चा के दौरान गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों पर भी प्रकाश डाला गया। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का युद्धक्षेत्र में उपयोग, साइबर सुरक्षा की कमजोरियां और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर होने वाले हमले शामिल हैं। सैन्य नेतृत्व ने माना कि भविष्य के युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि डिजिटल स्पेस में भी लड़े जाएंगे।

अंत में, भारत और रूस के बीच दीर्घकालिक रक्षा संबंधों की पुष्टि की गई। यह रेखांकित किया गया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य के बावजूद, रूस के साथ भारत के रणनीतिक रक्षा संबंध एक स्थायी नींव प्रदान करते हैं, जो भारत की रक्षा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

क्या आप जानते हैं?: हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहाँ से वैश्विक कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, जिससे यह एक रणनीतिक 'चोक पॉइंट' बन जाता है।

Frequently Asked Questions

1. BRICS का मुख्य उद्देश्य क्या है?
BRICS एक बहुपक्षीय मंच है जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, राजनीतिक समन्वय और सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करना है।

2. 'आत्मनिर्भर भारत' का रक्षा क्षेत्र में क्या महत्व है?
इसका उद्देश्य रक्षा उपकरणों के आयात को कम करना, स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना और भारत को एक वैश्विक रक्षा निर्यात केंद्र बनाना है।