केरल में पिछले दस दिनों से जारी बिजली कटौती ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। शाम 6:30 से रात 1 बजे तक लागू लोड शेडिंग के कारण छात्रों, बुजुर्गों और प्रवासी मजदूरों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
- केरल में लगातार 10वें दिन भी बिजली कटौती जारी रही।
- शाम 6:30 बजे से रात 1:00 बजे तक आधिकारिक लोड शेडिंग लागू।
- छात्रों की पढ़ाई, बुजुर्गों का स्वास्थ्य और प्रवासी मजदूरों के भोजन पर गंभीर असर।
- अंधेरे के कारण सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ीं।
केरल राज्य वर्तमान में एक गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है, जिसने राज्य के बुनियादी ढांचे और नागरिकों के दैनिक जीवन को पूरी तरह से बाधित कर दिया है। गुरुवार को लगातार दसवें दिन बिजली कटौती जारी रही, जिससे तिरुवनंतपुरम सहित कई इलाकों में अराजकता की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन द्वारा निर्धारित लोड शेडिंग का समय शाम 6:30 बजे से रात 1 बजे तक है, जो ठीक वही समय है जब अधिकांश लोग अपने घरों में होते हैं और महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
इस संकट का सबसे गहरा प्रभाव छात्रों पर पड़ा है। कक्षा 10 के छात्र एच. विष्णु के अनुसार, बिजली के अचानक कटने से पढ़ाई की लय टूट जाती है, जिससे उन्हें अपने पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए सामान्य से अधिक समय देना पड़ रहा है। केवल छात्र ही नहीं, बल्कि गृहिणियों को भी रात के घरेलू कार्यों और बच्चों की देखभाल में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बिजली संकट केवल तकनीकी विफलता नहीं है, बल्कि यह राज्य की ऊर्जा निर्भरता और बुनियादी ढांचे की कमजोरी को उजागर करता है। जब बिजली कटौती रात के समय होती है, तो यह न केवल आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करती है, बल्कि शहरी सुरक्षा को भी खतरे में डालती है।
बुजुर्गों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति और भी भयावह हो गई है। उमस भरी गर्मी और लिफ्ट जैसी आवश्यक सेवाओं के बंद होने से वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक कष्ट झेलना पड़ रहा है। 68 वर्षीय जॉर्ज मैथ्यूज ने बताया कि पावर कट के कारण उन्हें रात में अपनी पांच मंजिला इमारत की सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं।
"लगातार बिजली कटौती न केवल उत्पादकता को कम करती है, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षा की भावना पैदा करती है, जिससे आपराधिक तत्वों को बढ़ावा मिल सकता है।"
सुरक्षा के मोर्चे पर, महिलाओं और कामकाजी पेशेवरों ने चिंता व्यक्त की है। थम्पानूर बस स्टैंड जैसे व्यस्त क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटों के न जलने से रात में आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। इसके अलावा, राज्य में मौजूद प्रवासी समुदाय, जो एलपीजी संकट के कारण इंडक्शन स्टोव पर निर्भर हैं, उनके लिए भोजन पकाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूर अहमद रफिक ने बताया कि बिजली न होने से वे रात में खाना बनाने में असमर्थ हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: केरल में बिजली कटौती का समय क्या है?
उत्तर: वर्तमान में लोड शेडिंग शाम 6:30 बजे से रात 1:00 बजे तक निर्धारित की गई है।
प्रश्न 2: इस संकट से सबसे अधिक कौन प्रभावित हुआ है?
उत्तर: छात्र, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं और इंडक्शन स्टोव का उपयोग करने वाले प्रवासी मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।