सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल लगाने में देरी को लेकर FSSAI के प्रति कड़ा असंतोष जताया है। कोर्ट ने विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य और नमक-सोडियम के बढ़ते स्तर पर चिंता व्यक्त की है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल में देरी के लिए FSSAI को फटकार लगाई।
  • कोर्ट ने बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर गहरी चिंता जताई।
  • केंद्र सरकार ने पैकेटों पर बड़े 'रेड वॉर्निंग लेबल' लगाने पर सहमति व्यक्त की है।
  • FSSAI को अब नमक और सोडियम के डेटा पर विस्तृत जवाब देना होगा।

भारत के उच्चतम न्यायालय ने पैकेज्ड फूड उत्पादों पर अनिवार्य स्वास्थ्य चेतावनियों को लागू करने में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की धीमी गति पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पैकेट के सामने स्पष्ट चेतावनी न होने के कारण उपभोक्ता अपनी सेहत के बारे में सही निर्णय नहीं ले पाते हैं।

अदालत की मुख्य चिंता प्रोसेस्ड फूड में नमक, सोडियम और चीनी की अत्यधिक मात्रा को लेकर है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हालांकि तकनीकी दिशा-निर्देश मौजूद हो सकते हैं, लेकिन वास्तविक कार्यान्वयन में भारी कमी है। बेंच ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इन हानिकारक तत्वों के कारण आने वाली पीढ़ियों, खासकर बच्चों का स्वास्थ्य खतरे में है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह न्यायिक हस्तक्षेप 'स्वैच्छिक प्रकटीकरण' से 'अनिवार्य चेतावनी' की ओर एक बड़ा बदलाव है। वर्षों से पोषण संबंधी जानकारी पैकेट के पीछे छोटे अक्षरों में छिपी रहती थी। 'रेड वॉर्निंग लेबल' को अनिवार्य करके, कोर्ट प्रभावी रूप से एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों के मार्केटिंग दावों को चुनौती दे रहा है और सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहा है।

"फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग की ओर बढ़ना केवल एक नियामक बदलाव नहीं है, बल्कि भारत में गैर-संचारी रोगों की महामारी से लड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य हस्तक्षेप है।"

केंद्र सरकार ने अदालत के इस निर्देश पर अपनी सहमति जताई है और माना है कि हानिकारक सामग्रियों के सेवन को कम करने के लिए दृश्य चेतावनी प्रणाली सबसे प्रभावी तरीका है। अब FSSAI को यह निर्धारित करने के लिए कि चेतावनी की सीमा क्या होगी, सोडियम और नमक के स्तर पर व्यापक डेटा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत लंबे समय से कुपोषण और बढ़ते मोटापे की दोहरी समस्या से जूझ रहा है। FSSAI ने पहले 'ट्रैफिक लाइट' सिस्टम का पायलट परीक्षण किया था, लेकिन इसे सभी श्रेणियों के लिए अनिवार्य नहीं किया गया, जिसके कारण अब यह मामला कानूनी जांच के दायरे में आया है।

क्या आप जानते हैं?: एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, 80% से अधिक उपभोक्ता चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों पर स्पष्ट चेतावनी लेबल के समर्थन में हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: 'रेड वॉर्निंग लेबल' क्या है?
यह पैकेजिंग के सामने लगाया जाने वाला एक प्रमुख दृश्य संकेत है, जो उपभोक्ताओं को चेतावनी देता है कि उत्पाद में नमक, चीनी या संतृप्त वसा की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक है।

प्रश्न 2: सुप्रीम कोर्ट सोडियम पर इतना ध्यान क्यों दे रहा है?
सोडियम का अत्यधिक सेवन सीधे तौर पर उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों से जुड़ा है, जिनमें भारतीय आबादी में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है।