त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) नवंबर में तीर्थयात्रा सीजन शुरू होने से पहले 45 लाख अरवणा टिन का बफर स्टॉक बनाने के लिए अपने उत्पादन संयंत्र का विस्तार कर रहा है।
- TDB दैनिक उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 3.25 लाख कंटेनर करने जा रहा है।
- नवंबर तक 45 लाख अरवणा टिन का विशाल बफर स्टॉक बनाने का लक्ष्य।
- छह नए प्रिपरेशन पैन, दो कूलिंग चैंबर और एक बॉयलर जोड़े जा रहे हैं।
- पिछले सीजन में अरवणा की बिक्री से ₹180 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ।
नवंबर में शुरू होने वाले वार्षिक शबरीमाला तीर्थयात्रा सीजन से ठीक पहले, त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) ने अपनी उत्पादन सुविधाओं के विस्तार का काम शुरू कर दिया है। बोर्ड का मुख्य ध्यान अरवणा के दैनिक उत्पादन को बढ़ाने पर है, जो मंदिर का सबसे लोकप्रिय प्रसाद है, ताकि पिछले वर्षों की तरह आपूर्ति की कमी न हो।
यह विस्तार सन्निधानम स्थित मशीनीकृत अरवणा संयंत्र में किया जा रहा है। मांग को पूरा करने के लिए, TDB छह नए प्रिपरेशन पैन (वारपु), दो कूलिंग चैंबर और एक बॉयलर जोड़ रहा है। इस विस्तार से दैनिक उत्पादन क्षमता में 85,000 से 1 लाख कंटेनरों की वृद्धि होगी, जिससे कुल क्षमता 2.25 लाख से बढ़कर 3.25 लाख कंटेनर हो जाएगी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि अरवणा केवल एक आध्यात्मिक प्रसाद नहीं है, बल्कि मंदिर प्रशासन के लिए राजस्व का एक प्रमुख स्रोत भी है। पिछले सीजन में ₹180 करोड़ से अधिक की कमाई करने के बाद, उत्पादन में कोई भी कमी सीधे TDB की आय को प्रभावित करती है। इसके अलावा, 45 लाख टिन का बफर स्टॉक बनाने की योजना एक सक्रिय आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन को दर्शाती है, ताकि पिछले वर्षों की तरह प्रति श्रद्धालु 10 टिन की बिक्री सीमा न लगानी पड़े।
भक्तों द्वारा दान किए गए घी पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय औद्योगिक खरीद की ओर बढ़ना, मंदिर के परिचालन लॉजिस्टिक्स में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
कच्चे माल की खरीद एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। भक्तों द्वारा दान किए गए घी के बफर स्टॉक में गिरावट के कारण—जिसका श्रेय वितरण में कथित अनियमितताओं और अडियाशिष्ठम घी की बढ़ती बिक्री को दिया गया है—TDB इस साल भी बाहर से घी खरीदने की योजना बना रहा है। पिछले साल, मिलमा (Milma) को ₹50 प्रति लीटर की दर से 1.65 लाख लीटर घी की आपूर्ति का अनुबंध दिया गया था, हालांकि बाहरी घी की गुणवत्ता को लेकर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं।
ऐतिहासिक रूप से, TDB पूरी तरह से तीर्थयात्रियों द्वारा दिए गए घी पर निर्भर था, जिसे सन्निधानम की एक समर्पित सुविधा में शुद्ध किया जाता था। हालांकि, आधुनिक तीर्थयात्रा की भारी भीड़ ने इस मॉडल को अव्यवहारिक बना दिया है, जिससे बोर्ड को मंडलम-मकरविलक्कू सीजन को बिना किसी बाधा के चलाने के लिए हाइब्रिड खरीद रणनीति अपनाने पर मजबूर होना पड़ा है।
| विशेषता | पिछली क्षमता | नई विस्तारित क्षमता |
|---|---|---|
| दैनिक उत्पादन | 2 - 2.25 लाख कंटेनर | 3.25 लाख कंटेनर |
| तैयारी पैन (Pans) | 26 पैन | 32 पैन |
| कूलिंग चैंबर | 6 चैंबर | 8 चैंबर |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: TDB अरवणा उत्पादन क्यों बढ़ा रहा है?
बोर्ड का लक्ष्य कमी को रोकना और प्रति श्रद्धालु बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता को समाप्त करना है, साथ ही तीर्थयात्रा सीजन के दौरान उच्च मांग से राजस्व को अधिकतम करना है।
प्रश्न 2: अरवणा के लिए घी कहाँ से आता है?
पारंपरिक रूप से यह भक्तों के दान से आता था, लेकिन अब TDB मिलमा जैसे बाहरी आपूर्तिकर्ताओं से बड़ी मात्रा में घी खरीदकर इसकी पूर्ति करता है।