केंद्र सरकार ने लद्दाख के लिए अनुच्छेद 371(K) का प्रस्ताव दिया है, जिससे क्षेत्र को भूमि, संस्कृति और पर्यावरण पर विधायी शक्तियां मिल सकती हैं। यह कदम लद्दाख में लोकतंत्र की बहाली और संवैधानिक सुरक्षा की लंबे समय से चली आ रही मांग का परिणाम है।
- केंद्र ने लद्दाख के लिए विशेष संवैधानिक प्रावधान 'अनुच्छेद 371(K)' का प्रस्ताव दिया है।
- प्रस्तावित निकाय को भूमि, संस्कृति, भाषा और प्राकृतिक संसाधनों पर विधायी अधिकार मिल सकते हैं।
- यह प्रावधान छठे शेड्यूल (Sixth Schedule) से अलग होगा क्योंकि यह केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर लागू होगा।
- कार्यकारी, वित्तीय और पुलिस नियंत्रण जैसे प्रमुख मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।
केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधि समूहों—लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA)—के बीच हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आया है। सरकार ने लद्दाख के लिए एक नया संवैधानिक प्रावधान, अनुच्छेद 371(K), जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम का उद्देश्य लद्दाख के लोगों को उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करना है।
इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, एक प्रत्यक्ष निर्वाचित शासी निकाय (Governing Body) का गठन किया जाएगा। इस निकाय के पास भूमि, संस्कृति, भाषा, वन, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कानून बनाने की विधायी शक्तियां होंगी। हालांकि, लद्दाख के प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक सरकार एक विस्तृत ड्राफ्ट पेश नहीं करती, जिसमें कार्यकारी, वित्तीय और पुलिस नियंत्रण जैसी शक्तियों का स्पष्ट उल्लेख हो, यह प्रस्ताव अधूरा है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद लद्दाख को एक अलग केंद्र शासित प्रदेश (UT) बनाया गया था। शुरुआत में इसका स्वागत हुआ, लेकिन जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि लद्दाख के पास अपनी विधानसभा नहीं होगी और इसका प्रशासन नौकरशाहों द्वारा चलाया जाएगा। इससे क्षेत्र में राजनीतिक अलगाव की भावना बढ़ी। अनुच्छेद 371(K) का प्रस्ताव इस राजनीतिक शून्य को भरने और स्थानीय शासन में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने का एक प्रयास है।
"अनुच्छेद 371(K) का प्रस्ताव यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार लद्दाख की संवेदनशीलता को समझ रही है, लेकिन वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्वाचित निकाय को कितनी वास्तविक स्वायत्तता दी जाती है।"
ऐतिहासिक रूप से, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 371 और उसके उप-खंड (A से J) विभिन्न राज्यों (जैसे नागालैंड, मिजोरम, सिक्किम) के लिए विशेष प्रावधान प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, अनुच्छेद 371-A नागालैंड की सामाजिक प्रथाओं और भूमि स्वामित्व की रक्षा करता है। यदि लद्दाख के लिए 371(K) लागू होता है, तो यह पहली बार होगा जब किसी केंद्र शासित प्रदेश को इस तरह का विशेष दर्जा दिया जाएगा, जो इसे पूर्वोत्तर राज्यों के मॉडल से अलग बनाता है।
छठी अनुसूची बनाम अनुच्छेद 371(K)
लद्दाख लंबे समय से छठी अनुसूची (Sixth Schedule) की मांग कर रहा है, जो आदिवासी क्षेत्रों को स्वायत्त जिला परिषदों (ADCs) के माध्यम से विधायी और न्यायिक शक्तियां देती है। लेकिन अनुच्छेद 371(K) एक अलग दृष्टिकोण है। जहाँ छठी अनुसूची जिला स्तर पर स्वायत्तता देती है, वहीं 371(K) पूरे केंद्र शासित प्रदेश के स्तर पर एक निर्वाचित निकाय बनाने की बात करता है।
| विशेषता | छठी अनुसूची (Sixth Schedule) | अनुच्छेद 371(K) (प्रस्तावित) |
|---|---|---|
| स्तर | जिला स्तर (ADCs) | केंद्र शासित प्रदेश स्तर |
| प्रकृति | आदिवासी क्षेत्रों के लिए स्वायत्तता | विशेष संवैधानिक सुरक्षा प्रावधान |
| लागू क्षेत्र | मुख्यतः पूर्वोत्तर राज्य | लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या अनुच्छेद 371(K) से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा?
नहीं, यह राज्य का दर्जा नहीं है, बल्कि एक केंद्र शासित प्रदेश के भीतर विशेष सुरक्षा और विधायी शक्तियों वाला एक प्रशासनिक ढांचा है।
2. लद्दाख के प्रतिनिधि इस प्रस्ताव से पूरी तरह संतुष्ट क्यों नहीं हैं?
क्योंकि अभी तक कोई लिखित ड्राफ्ट नहीं आया है जो यह स्पष्ट करे कि पुलिस, वित्त और योजना बनाने की शक्तियां किसके पास होंगी।