नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में बिहार के प्रसिद्ध सत्तू और मखाने को शामिल किया गया है। यह पहल बिहार की स्थानीय कृषि और परंपराओं को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

  • ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के वेलकम किट में बिहार का सत्तू और मखाना शामिल।
  • बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 90% हिस्सा पैदा करता है।
  • 'लोकल टू ग्लोबल' विजन के तहत बिहार के पारंपरिक स्वाद को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने पेश किया गया।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन 2026 में बिहार की सांस्कृतिक और कृषि विरासत की एक शानदार झलक देखने को मिल रही है। सम्मेलन में शामिल होने वाले विदेशी प्रतिनिधियों और गणमान्य अतिथियों के स्वागत किट में बिहार के दो सबसे प्रतिष्ठित उत्पादों—सत्तू और मखाना—को विशेष स्थान दिया गया है। यह कदम न केवल बिहार के स्वाद को दुनिया तक पहुँचाएगा, बल्कि राज्य के उद्यमियों और किसानों के लिए नए वैश्विक द्वार भी खोलेगा।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह 'ब्रांड बिहार' की एक नई पहचान है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'लोकल टू ग्लोबल' संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि बिहार के स्वाद और परंपराएं अब दुनिया के सामने होंगी।

क्यों है यह महत्वपूर्ण?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, सत्तू और मखाने का अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शन केवल भोजन का आदान-प्रदान नहीं है, बल्कि यह बिहार की आर्थिक क्षमता का प्रदर्शन है। जब दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के नेता इन उत्पादों का अनुभव करेंगे, तो इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिहार के कृषि उत्पादों की मांग और मूल्य में वृद्धि होगी। यह बिहार को केवल एक ऐतिहासिक राज्य के रूप में नहीं, बल्कि एक उभरते हुए कृषि-निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

"सत्तू और मखाने का वैश्विक मंच पर पहुँचना बिहार के ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है, जिससे प्रत्यक्ष रूप से छोटे किसानों की आय बढ़ेगी।"

सत्तू, जिसे अक्सर 'देसी हॉरलिक्स' कहा जाता है, बिहार के खान-पान का अभिन्न हिस्सा है। चाहे वह लिट्टी-चोखा हो या सत्तू का शरबत, यह उत्पाद अपनी पौष्टिकता के लिए जाना जाता है। दूसरी ओर, मखाना, जो बिहार के आर्द्रभूमि (wetlands) क्षेत्रों की उपज है, अब दुनिया भर में एक 'सुपरफूड' के रूप में पहचाना जा रहा है।

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, भारत में मखाना उत्पादन में भारी वृद्धि हुई है। वर्ष 2025-26 में देश का कुल उत्पादन 80,590 मीट्रिक टन तक पहुँच गया, जिसमें अकेले बिहार की हिस्सेदारी लगभग 90% है। इसी तरह, चने (gram) के उत्पादन में भी पिछले दशक में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो सत्तू के कच्चे माल की उपलब्धता को सुनिश्चित करता है।

वर्ष कुल मखाना उत्पादन (मीट्रिक टन) औसत उत्पादकता (मीट्रिक टन/हेक्टेयर)
2024-25 63,910 2.03
2025-26 80,590 2.34

भविष्य की संभावनाओं की बात करें तो, आधुनिक पैकेजिंग और प्रोसेसिंग के माध्यम से सत्तू को भी अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य पेय के रूप में प्रमोट किया जा सकता है। मखाने की पहले से ही वैश्विक मांग है, लेकिन ब्रिक्स जैसे मंच से इसे और अधिक मजबूती मिलेगी।

क्या आप जानते हैं?: बिहार भारत के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 90% हिस्सा उत्पादित करता है, जो इसे दुनिया का मखाना हब बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. ब्रिक्स सम्मेलन में बिहार के किन उत्पादों को शामिल किया गया है?
सम्मेलन के स्वागत किट में बिहार के प्रसिद्ध सत्तू और मखाने को शामिल किया गया है।

2. मखाना उत्पादन में बिहार का क्या योगदान है?
बिहार भारत के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 90% हिस्सा उत्पादित करता है।