केरल सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकारी कार्यालयों को सुलभ बनाने के लिए भारत का पहला 'एल्डर-फ्रेंडली ऑफिस सर्टिफिकेशन' (EFOC) शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य बुनियादी ढांचे और व्यवहार में सुधार कर बुजुर्गों की समस्याओं को दूर करना है।
- भारत का पहला एल्डर-फ्रेंडली ऑफिस सर्टिफिकेशन (EFOC) केरल द्वारा लॉन्च।
- कार्यालयों को उनके प्रदर्शन के आधार पर गोल्ड, सिल्वर और ब्रोंज सर्टिफिकेट दिए जाएंगे।
- पहुंच, सेवा वितरण और स्टाफ व्यवहार जैसे 5 मुख्य मानकों पर होगा मूल्यांकन।
- निजी अस्पतालों और फार्मेसियों के लिए स्वैच्छिक भागीदारी का विकल्प।
केरल सरकार के वरिष्ठ नागरिक कल्याण विभाग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए देश का पहला एल्डर-फ्रेंडली ऑफिस सर्टिफिकेशन (EFOC) लॉन्च किया है। इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों को वरिष्ठ नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक और सुलभ बनाना है। अक्सर बुजुर्गों को सरकारी दफ्तरों में लंबी कतारों, बिना हैंडरेल वाली सीढ़ियों, छोटे अक्षरों वाले फॉर्म और ऊंची काउंटरों जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। EFOC का उद्देश्य इन सभी बाधाओं को समाप्त करना है।
इस प्रमाणन प्रणाली को वैश्विक मानकों पर आधारित किया गया है। इसमें संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह मॉडल, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 'एज-फ्रेंडली सिटीज नेटवर्क' और अमेरिका के 'सर्टिफाइड एज-फ्रेंडली एम्प्लॉयर' कार्यक्रम से प्रेरणा ली गई है। इसके अलावा, रैंप, साइनेज और शौचालयों के तकनीकी मानक 2021 के 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम' के राष्ट्रीय दिशानिर्देशों का पालन करते हैं।
मूल्यांकन के मुख्य स्तंभ
कार्यालयों का मूल्यांकन पांच प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा, जिनमें से प्रत्येक का अपना वेटेज होगा:
| मानक (Criteria) | वेटेज (Weightage) |
|---|---|
| भवन पहुंच (Building Accessibility) | 30% |
| सेवा वितरण (Service Delivery) | 25% |
| स्टाफ प्रशिक्षण और आचरण (Staff Training) | 20% |
| संचार (Communication) | 15% |
| भागीदारी (Participation) | 10% |
प्रमाणन के लिए कुछ सुविधाएं अनिवार्य होंगी, जैसे कि स्टेप-फ्री एंट्री (सीढ़ी-रहित प्रवेश), ग्राउंड फ्लोर पर शौचालय, वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्राथमिकता कतार और बुजुर्गों की सहायता के लिए एक समर्पित अधिकारी। यदि कोई कार्यालय इन अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं करता है, तो उसे उच्च स्कोर के बावजूद सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह पहल केवल बुनियादी ढांचे के बदलाव के बारे में नहीं है, बल्कि यह 'सिल्वर इकोनॉमी' और वृद्ध देखभाल के प्रति एक व्यापक सामाजिक बदलाव का संकेत है। जब राज्य स्तर पर ऐसी जवाबदेही तय की जाती है, तो यह अन्य भारतीय राज्यों के लिए एक बेंचमार्क स्थापित करता है कि कैसे जनसेवा को समावेशी बनाया जाए।
"बुजुर्गों के लिए सुलभ बुनियादी ढांचा केवल सुविधा नहीं, बल्कि उनके सम्मान और मौलिक अधिकारों की रक्षा है।"
सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए स्वतंत्र तृतीय-पक्ष एजेंसियों द्वारा निरीक्षण किया जाएगा। 85% या उससे अधिक स्कोर करने वाले कार्यालयों को 5 साल के लिए गोल्ड सर्टिफिकेट मिलेगा, जबकि 70-84% वालों को सिल्वर और 60-69% वालों को 2 साल के लिए प्रोविजनल ब्रोंज सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
इस योजना का क्रियान्वयन चरणों में होगा। पहले चरण में केरल के 14 जिलों से एक-एक कार्यालय का चयन किया जाएगा। दूसरे वर्ष में इसे ग्राम, तालुक और कलेक्टरेट कार्यालयों, ट्रेजरी, आरटीओ और सरकारी अस्पतालों तक विस्तारित किया जाएगा। तीसरे वर्ष से अधिक संस्थानों को इसमें जोड़ा जाएगा।
Frequently Asked Questions
1. क्या निजी अस्पताल भी इस प्रमाणन के लिए आवेदन कर सकते हैं?
हाँ, निजी अस्पताल, नर्सिंग होम और फार्मेसियां भुगतान के आधार पर स्वेच्छा से इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
गोल्ड रेटेड कार्यालयों को 'सिल्वर इकोनॉमी' कार्यक्रम के तहत विभिन्न योजनाओं में प्राथमिकता दी जाएगी और उन्हें एक डिजिटल QR-कोडेड सर्टिफिकेट और प्लेक मिलेगा।