चेन्नई के NULM-SHG मॉडल के तहत कार्यरत सफाई कर्मचारी स्थायी रोजगार और 832 रुपये दैनिक वेतन की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं। राज्य सरकार के साथ शुरुआती सहमति के बावजूद मुख्य मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।
- सफाई कर्मचारी स्थायी नौकरी और ₹832 प्रतिदिन वेतन की मांग कर रहे हैं।
- NULM-SHG मॉडल के तहत कार्यरत 2,900 से अधिक कर्मचारी प्रभावित हैं।
- निजीकरण के खिलाफ विरोध और बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली पर विवाद।
- अगले दौर की बातचीत 3 अक्टूबर को निर्धारित है।
चेन्नई के विभिन्न क्षेत्रों में सफाई कर्मचारियों ने पिछले दो दशकों से लंबित अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया है। नेशनल अर्बन लाइवलीहुड्स मिशन (NULM)-सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) मॉडल के तहत काम करने वाले ये कर्मचारी स्थायी रोजगार, उचित वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं। हालांकि, TVK के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने हाल ही में कल्याणकारी उपायों का वादा करते हुए एक समझौता किया है, लेकिन नियमितीकरण का मुख्य मुद्दा अभी भी अधर में है।
कर्मचारियों की स्थिति और संख्या
वर्तमान में, चेन्नई नगर निगम (GCC) के अंतर्गत कुल 21,436 सफाई कर्मचारी हैं। इनमें से केवल 3,628 स्थायी हैं, जबकि 14,447 निजी एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त हैं। NULM-SHG मॉडल के तहत करीब 2,946 कर्मचारी कार्यरत हैं, जो मुख्य रूप से रोयापुरम, तिरु.वि.का नगर और अन्ना नगर के कुछ हिस्सों में झाड़ू लगाने, कचरा इकट्ठा करने और बैटरी चालित वाहनों को चलाने का काम करते हैं। ये कर्मचारी कोविड-19 लॉकडाउन, बाढ़ और भीषण गर्मी जैसी कठिन परिस्थितियों में भी काम करते रहे हैं, फिर भी उन्हें नौकरी की सुरक्षा नहीं मिली है।
निजीकरण का विवाद और विरोध
चेन्नई नगर निगम ने निजीकरण की प्रक्रिया 1999 में शुरू की थी, जिसे 2000 में लागू किया गया। अप्रैल 2025 में, मेयर आर. प्रिया के नेतृत्व में GCC परिषद ने उन क्षेत्रों में भी सफाई कार्य को आउटसोर्स करने का प्रस्ताव पारित किया जहाँ NULM कर्मचारी काम कर रहे थे। निगम का तर्क था कि NULM कर्मचारियों की उपस्थिति कम है और कुछ कर्मचारी उपस्थिति दर्ज कराकर अन्य निजी काम करते हैं।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल वेतन का नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और गरिमा का है। स्थायी नौकरी का मतलब है ईएसआई (ESI) और भविष्य निधि (PF) जैसे लाभ, जो इन श्रमिकों की अगली पीढ़ी के लिए आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। निजी एजेंसियों को सौंपने से न केवल वेतन में कटौती का डर है, बल्कि श्रमिकों का शोषण भी बढ़ सकता है।
सफाई कर्मचारियों का नियमितीकरण केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि उनके बुनियादी मानवाधिकारों और सामाजिक न्याय की दिशा में एक आवश्यक कदम है।
अगस्त 2025 में विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक रूप ले लिया जब कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने 2021 के चुनाव पूर्व वादों को पूरा नहीं किया। इस आंदोलन को पा. रंजीत के नीलम फाउंडेशन, एनटीके के सीमन और टीवीके नेता सी. जोसेफ विजय जैसे प्रमुख व्यक्तित्वों का समर्थन मिला।
| विवरण | NULM-SHG मॉडल | निजी एजेंसी मॉडल |
|---|---|---|
| नौकरी की सुरक्षा | कम (अनुबंध आधारित) | अत्यंत कम (आउटसोर्स) |
| प्रस्तावित वेतन | ₹23,000/माह (लगभग) | ₹16,950 - ₹761/दिन |
| मुख्य लाभ | सामुदायिक समूह समर्थन | ESI और PF (सीमित) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. सफाई कर्मचारियों की मुख्य मांग क्या है?
उनकी मुख्य मांग नौकरी का नियमितीकरण (स्थायीकरण) और ₹832 का दैनिक वेतन है।
2. NULM-SHG मॉडल क्या है?
यह एक ऐसा मॉडल है जहाँ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से शहरी गरीबों को आजीविका प्रदान करने के लिए सफाई जैसे कार्यों में लगाया जाता है।