BRICS शिखर सम्मेलन 2026 से पहले दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया सेल और IFSO ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कीवर्ड्स और डिजिटल ट्रेल्स के जरिए भ्रामक खबरों और सुरक्षा खतरों की 24x7 निगरानी की जा रही है।

  • सोशल मीडिया सेल और IFSO द्वारा 24x7 डिजिटल निगरानी।
  • कीवर्ड्स और हैशटैग के जरिए संदिग्ध पोस्ट और भ्रामक खबरों की पहचान।
  • गैर-कानूनी सामग्री हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 'टेकडाउन नोटिस' जारी।
  • सत्यापित सूचनाओं के प्रसार के लिए तकनीकी प्लेटफॉर्म्स के साथ समन्वय।

आगामी BRICS शिखर सम्मेलन 2026 की सुरक्षा तैयारियों के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने अपने डिजिटल सर्विलांस तंत्र को अत्यधिक सक्रिय कर दिया है। पुलिस के विशेष विंग, जिसमें सोशल मीडिया सेल और इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) शामिल हैं, अब सार्वजनिक पोस्ट, कैप्शन और कमेंट्स की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि किसी भी संभावित सुरक्षा खतरे या कानून-व्यवस्था की स्थिति को समय रहते रोका जा सके।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (IFSO) संजय भाटिया ने पुष्टि की है कि पुलिस सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रख रही है और सम्मेलन के दौरान किसी भी 'साइबर दुर्घटना' को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसके लिए X (ट्विटर), इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर विशिष्ट कीवर्ड्स और हैशटैग का उपयोग किया जा रहा है, जो एक 'अर्ली-वार्निंग सिस्टम' के रूप में कार्य करते हैं।

निगरानी की कार्यप्रणाली और डिजिटल ट्रेल्स

दिल्ली पुलिस केवल व्यक्तिगत पोस्ट की जांच नहीं कर रही है, बल्कि ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) तकनीकों का उपयोग करके डिजिटल पैटर्न की पहचान कर रही है। यदि कोई खाता संदिग्ध पाया जाता है, तो पुलिस उसके फॉलोअर्स, फॉलोइंग लिस्ट, लाइक और टैग की गई लोकेशन का विश्लेषण करती है। इससे उन नेटवर्क का पता चलता है जो संगठित रूप से अवैध गतिविधियों या नफरत फैलाने वाले भाषणों (Hate Speech) को बढ़ावा दे रहे हैं।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल स्पेस में सूचना के नियंत्रण की एक बड़ी रणनीति है। जुलाई में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध प्रदर्शनों के बाद, पुलिस ने महसूस किया कि केवल निगरानी पर्याप्त नहीं है, बल्कि आधिकारिक सूचनाओं का प्रसार भी उतना ही महत्वपूर्ण है ताकि भ्रामक सामग्री हावी न हो सके।

डिजिटल फुटप्रिंट्स अब आधुनिक पुलिसिंग का सबसे शक्तिशाली हथियार बन चुके हैं, जहां एक साधारण कीवर्ड किसी बड़े हमले की साजिश को नाकाम कर सकता है।

जब कोई आपत्तिजनक सामग्री चिन्हित की जाती है, तो पुलिस संबंधित प्लेटफॉर्म को 'टेकडाउन नोटिस' भेजती है। यदि सामग्री आपराधिक धमकी या उकसावे वाली पाई जाती है, तो तुरंत FIR दर्ज कर गहन जांच शुरू की जाती है।

क्या आप जानते हैं?: OSINT (ओपन सोर्स इंटेलिजेंस) एक ऐसी तकनीक है जिसमें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा का विश्लेषण कर खुफिया जानकारी जुटाई जाती है, जिसका उपयोग अब वैश्विक स्तर पर आतंकवाद विरोधी अभियानों में किया जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या पुलिस निजी संदेशों (Private Messages) की निगरानी कर रही है?
उत्तर: आधिकारिक तौर पर, निगरानी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध पोस्ट, कमेंट्स और प्रोफाइल डेटा तक सीमित है, हालांकि कानूनी प्रक्रियाओं के तहत विशिष्ट खातों की जानकारी मांगी जा सकती है।

प्रश्न 2: भ्रामक खबर फैलाने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
उत्तर: ऐसी सामग्री पर टेकडाउन नोटिस जारी किया जा सकता है और गंभीर मामलों में आपराधिक धमकी या नफरत फैलाने के आरोप में FIR दर्ज की जा सकती है।