नुंगमबक्कम के अरुलमिगु अकिलंदेश्वरी समेता अगथीश्वरर मंदिर की 415 ग्राउंड से अधिक जमीन को अवैध रूप से बेचने का आरोप लगाते हुए भक्तों ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से हस्तक्षेप की मांग की है।

  • मंदिर की 415 ग्राउंड से अधिक जमीन के अवैध हस्तांतरण का आरोप।
  • पूर्व ट्रस्टियों और HR&CE विभाग के अधिकारियों के बीच 60 वर्षों की मिलीभगत का संदेह।
  • मद्रास उच्च न्यायालय ने भूमि विस्तार और अतिक्रमण पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
  • करोड़ों रुपये का किराया बकाया होने के बावजूद वसूली नहीं की गई।

चेन्नई के नुंगमबक्कम स्थित अरुलमिगु अकिलंदेश्वरी समेता अगथीश्वरर मंदिर की संपत्तियों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नेशनल हिंदू टेम्पल फेडरेशन के सदस्यों और स्थानीय भक्तों ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से आग्रह किया है कि वे हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग को मंदिर की जमीन वापस दिलाने के निर्देश दें।

आरोप है कि पिछले कई दशकों में मंदिर के पूर्व ट्रस्टियों ने विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर 415 ग्राउंड से अधिक जमीन को अवैध रूप से बेच दिया। फेडरेशन के पदाधिकारी आर. अमलराज ने बताया कि जिन लोगों ने जमीन बेची, वे मंदिर के वंशानुगत ट्रस्टी नहीं थे, फिर भी उन्होंने खुद को ट्रस्टी बताकर जमीन के टुकड़ों को बेचा और लोगों को अवैध पट्टे (पट्टा) जारी करवाए।

भारत हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ सोसायटी के दिनेश कुमार ने खुलासा किया कि इस घोटाले में एक पुरानी सब्जी मंडी और एक स्कूल भी गायब हो गया, क्योंकि इन संपत्तियों को अवैध रूप से बेच दिया गया था। इसके अलावा, कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिना किसी वैध लीज एग्रीमेंट के मंदिर की जमीन पर काबिज हैं और करोड़ों रुपये का किराया बकाया है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल जमीन के टुकड़े का नहीं है, बल्कि यह HR&CE विभाग के भीतर व्याप्त गहरे भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। जब देवताओं के नाम पर दान की गई जमीन को अधिकारियों की मिलीभगत से बेचा जाता है, तो यह राज्य द्वारा प्रबंधित धार्मिक संस्थानों के प्रति जनता के विश्वास को कम करता है। यदि यह जमीन वापस मिलती है, तो यह तमिलनाडु के अन्य मंदिरों के लिए एक मिसाल बनेगा।

छह दशकों तक चले इस संगठित मिलीभगत ने यह साबित कर दिया है कि मंदिर संपत्ति प्रबंधन में निगरानी तंत्र पूरी तरह विफल रहा है।

यह मामला अब मद्रास उच्च न्यायालय में है। जुलाई के मध्य में, अदालत ने HR&CE विभाग को छह सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था। इस रिपोर्ट में जमीन का वास्तविक विस्तार, धारा 34 और धारा 9 के तहत बेची गई जमीन का विवरण, खरीदारों की पहचान और वर्तमान अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करनी थी।

हालांकि, हालिया सुनवाई के दौरान विभाग ने रिपोर्ट जमा करने के लिए और समय मांगा है, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। भक्तों का मानना है कि विभाग जानबूझकर देरी कर रहा है ताकि अवैध कब्जाधारियों को बचाया जा सके।

क्या आप जानते हैं?: तमिल संस्कृति में 'कुल देवता' (वंशज देवता) को परिवार का आध्यात्मिक संरक्षक माना जाता है, इसलिए मंदिर की संपत्ति की रक्षा करना भक्तों के लिए केवल कानूनी नहीं बल्कि गहरा भावनात्मक और आध्यात्मिक मुद्दा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: कुल कितनी जमीन हड़पने का आरोप है?
भक्तों का आरोप है कि मंदिर की 415 ग्राउंड से अधिक जमीन पिछले कई वर्षों में अवैध रूप से बेची गई है।

p>प्रश्न 2: मद्रास उच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या आदेश दिया है?
अदालत ने HR&CE विभाग को भूमि रिकॉर्ड, अवैध बिक्री और अतिक्रमण के संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।