उपलोकायुक्त के हस्तक्षेप के बाद, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (DSEL) ने सरकारी स्कूलों के छात्रों को दिए गए घटिया गुणवत्ता वाले जूतों और मोजों की जांच के लिए जिला स्तरीय समितियों का गठन किया है।

  • उपलोकायुक्त जस्टिस के.एन. फणींद्र के आदेश के बाद DSEL ने जांच शुरू की।
  • जिला पंचायत सीईओ द्वारा स्वतंत्र समितियों का गठन किया जाएगा।
  • प्रत्येक जिले के कम से कम 25% स्कूलों का भौतिक निरीक्षण अनिवार्य।
  • रिपोर्ट जमा करने के लिए 10 दिनों की सख्त समय सीमा तय।

बेंगलुरु: कर्नाटक के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (DSEL) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए कक्षा 1 से 10 तक के सरकारी स्कूल के छात्रों को वितरित किए गए जूतों और मोजों की गुणवत्ता की जांच के लिए जिला स्तरीय जांच समितियों के गठन का आदेश दिया है। यह कार्रवाई उपलोकायुक्त जस्टिस के.एन. फणींद्र द्वारा घटिया गुणवत्ता वाले जूतों के वितरण के आरोपों पर स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए मामला दर्ज करने के निर्देश के तुरंत बाद की गई है।

विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इन जांच समितियों का गठन जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) द्वारा किया जाएगा। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निरीक्षण समिति में शामिल अधिकारी या कर्मचारी DSEL विभाग से नहीं होने चाहिए। इन समितियों को 10 दिनों के भीतर अपना सत्यापन कार्य पूरा कर रिपोर्ट सौंपनी होगी।

जांच का दायरा और मुख्य बिंदु

शिकायतों में यह बात सामने आई है कि जूते उपयोग के कुछ ही दिनों के भीतर फट रहे हैं, उनके सोल अलग हो रहे हैं और कई बच्चों को गलत आकार (oversized) के जूते दिए गए हैं। मोजों में भी इसी तरह की खामियां पाई गई हैं। विभाग अब यह जांच करेगा कि क्या आपूर्ति किए गए उत्पाद अधिकृत एजेंसियों द्वारा प्रमाणित थे और क्या वे निविदा (tender) में निर्धारित विनिर्देशों के अनुरूप थे।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल घटिया सामग्री का नहीं, बल्कि सरकारी खरीद प्रक्रिया में जवाबदेही की कमी का है। जब बच्चों की बुनियादी जरूरतों के साथ समझौता किया जाता है, तो यह सीधे तौर पर शिक्षा के बुनियादी ढांचे और प्रशासन की ईमानदारी पर सवाल उठाता है। स्वतंत्र समितियों का गठन यह संकेत देता है कि सरकार अब आंतरिक भ्रष्टाचार की संभावनाओं को खारिज नहीं कर सकती।

"सरकारी निविदाओं में गुणवत्ता नियंत्रण की कमी अक्सर भ्रष्टाचार का परिणाम होती है, जिससे अंततः सबसे कमजोर वर्ग के बच्चे प्रभावित होते हैं।"

निरीक्षण टीमों को विशेष रूप से सोल के छिलने (delamination), उंगलियों या एड़ी के पास ढीली सिलाई और सिंथेटिक सामग्री के उपयोग की जांच करने का निर्देश दिया गया है। टीमों को फुटवियर डिजाइन और विकास संस्थान (FDDI) के प्रमाणन और प्री-डिस्पैच निरीक्षण प्रमाण पत्र का भी सत्यापन करना होगा।

क्या आप जानते हैं?: सरकारी स्कूलों में वर्दी और जूते प्रदान करने का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के बीच समानता लाना और स्कूल छोड़ने की दर को कम करना है।

प्रश्न 1: जांच समिति में कौन शामिल होगा?
समिति का गठन जिला पंचायत CEO करेंगे, लेकिन इसमें DSEL विभाग का कोई भी कर्मचारी शामिल नहीं होगा ताकि जांच निष्पक्ष रहे।

प्रश्न 2: जांच की समय सीमा क्या है?
सभी जिला स्तरीय समितियों को 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी, जिसके बाद एक राज्य स्तरीय समेकित रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी।